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मजदूर वर्ग को महज 10 रुपये में मिलेगा भरपेट भोजन, जानिए पूरी योजना

Mon, 02 Jan 2017 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 02 Jan 2017 12:23 AM IST
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workers will get enpogh food in just ten rupees, know the whole plan
खाना - फोटो : Demo

यूटी में सोमवार से मजदूर वर्ग और जरूरतमंद लोगों को महज 10 रुपये में भरपेट खाना मिलेगा। प्रधानमंत्री अन्नापूर्णा अक्षयपात्र योजना के तहत इस वर्ग को पैक्ड फूड के पैकेट बांटे जाएंगे। 

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प्रशासक वीपी सिंह बदनौर सुबह 11 बजे करुणा सदन में इस योजना का आधिकारिक शुभारंभ करेंगे। उनके साथ इस मौके पर सांसद किरण खेर, एडवाइजर परिमल राय और डीसी अजीत बालाजी जोशी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। 
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मोबाइल कैंटीन पांच गाड़ियां शहर के अलग-अलग हिस्सों में भोजन बांटेंगी। यूटी प्रशासन लेबर, स्लम वासियों और स्वास्थ्य लाभ के लिए दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को सब्सिडी रेट पर खाना उपलब्ध करवाएगा। 
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पिछले दो दिनों से ट्रायल बेस पर अभी 200 से 300 पैकेट निशुल्क बांटे जा रहे थे। सोमवार से मांग के हिसाब से पैकेट की संख्या बढ़ाई जाएगी। लेबर डिपार्टमेंट, रेड क्रॉस, स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न एनजीओ-संस्थानों की मदद से यह पूरी योजना चलाई जा रही है। 

चेन्नई और दिल्ली में पहले से ऐसी सुविधा

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भोजन

विभिन्न एनजीओ और संस्थानों से मिली डोनेशन की मदद भी इसके लिए ली जा रही है। करीब 70 लाख रुपये से करुणा सदन में भोजन तैयार करने के लिए मशीनें लगाई गई हैं। पैकेट में 6 रोटी, सब्जी और आचार मिलेगा। 

मोबाइल कैंटीन वाहन के दोनों और योजना का नाम लिखा होगा। जिससे लोगों को आसानी से इसका पता चल सके। भोजन की गुणवत्ता परखने के लिए फूड सेफ्टी विंग और रेड क्रॉस के अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है। 

जो खाने की गुणवत्ता रोजाना जांचेगी। इस पूरी योजना के कोर्डिनेशन का काम रेड क्रॉस देखेगी। अभी केवल रात का भोजन ही बांटा जाएगा। यह कैंटीन मुख्य तौर पर कंस्ट्रक्शन, इंडस्ट्रियल लेबर, स्लम वासियों, शहर में स्वास्थ्य लाभ और अन्य कार्यों से आने वाले लोगों को सस्ते रेट में पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के लिए यह कैंटीन शुरू होगी। कंस्ट्रक्शन यूनिट, इंडस्ट्रियल-स्लम एरिया और गवर्नमेंट अस्पतालों के आस-पास मोबाइल कैंटीन उपलब्ध रहेगी।

चेन्नई और दिल्ली में पहले से ऐसी सुविधा
चेन्नई और दिल्ली में पहले से ही सब्सिडी युक्त खाना लोगों को मिल रहा है। चेन्नई की अम्मा कैंटीन चुनाव के दौरान काफी चर्चा में भी रही है। इन दोनों शहरों के बाद अब चंडीगढ़ में इस तरह की पहल हो रही है।

6 हजार लेबर और इंडस्ट्रियल वर्कर्ज हैं पंजीकृति
चंडीगढ़ में 6 हजार लेबर और इंडस्ट्रियल वर्कर्ज लेबर डिपार्टमेंट के पास पंजीकृत हैं। जबकि गैर पंजीकृत की संख्या 10 हजार के करीब है। इसके अलावा 50 हजार लोग अलग-अलग स्लम एरिया में बसे हुए हैं। इन सब लोगों को मोबाइल कैंटीन का सीधा फायदा मिलेगा।

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