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Research: वॉकिंग एपीड्यूरल तकनीक से कम होती है लेबर पेन की पीड़ा, बढ़ जाता है नॉर्मल डिलीवरी का चांस

Mon, 12 Dec 2022 05:17 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 12 Dec 2022 05:17 PM IST
सार

रीढ़ की हड्डी में एनेस्थीसिया लेने के दौरान महिलाएं कैथेटर के साथ लेबर रूम में आराम से टहल भी सकती हैं। ऐसा करने से जहां उनका तनाव कम होता है वही उनकी सभी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। इससे डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियों का खतरा कम हो जाता है।

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Women prefer walking epidural technique given in spine to Avoid severe pain during labor pain
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विस्तार

लेबर पेन के दौरान भयंकर पीड़ा से बचने के लिए महिलाएं ‘वॉकिंग एपीड्यूरल तकनीक’ यानी रीढ़ में दिए जाने वाले एनेस्थीसिया को ज्यादा प्रिफर कर रही हैं। इससे जहां डिलीवरी के दौरान होने वाली पीड़ा कम होती है वहीं दूसरी परेशानियां भी ना के बराबर रह जाती हैं। इसके साथ ही नॉर्मल डिलीवरी का चांस भी बढ़ जाता है क्योंकि लेबर पेन के असहनीय पीड़ा को बर्दाश्त करने की क्षमता बढ़ने के कारण बहुत कम केस में सिजेरियन करने की नौबत आती है। 

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रीढ़ की हड्डी में एनेस्थीसिया लेने के दौरान महिलाएं कैथेटर के साथ लेबर रूम में आराम से टहल भी सकती हैं। ऐसा करने से जहां उनका तनाव कम होता है वही उनकी सभी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। इससे डिलीवरी के दौरान होने वाली परेशानियों का खतरा कम हो जाता है। इस तकनीक के लाभ को श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया एंड क्रिटिकल केयर विभाग ने शोध द्वारा साबित किया है। पीजीआई में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विभाग की प्रमुख डॉ. रुखसाना नजीब ने बताया कि इस तकनीक को श्रीनगर की महिलाएं काफी पसंद कर रही हैं क्योंकि इससे दर्द कम करने के साथ ही नॉर्मल डिलीवरी की सक्सेस दर काफी बढ़ जाती है।
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200 महिलाओं पर किया शोध... यह निकला परिणाम 
वॉकिंग एपीड्यूरल संबंधित शोध करने के लिए गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में तीन वर्ष के दौरान आने वाली 200 महिलाओं को शामिल किया गया। इन महिलाओं को दो वर्गों में बांटकर एक को तकनीक के आधार पर और दूसरे को यह सुविधा दिए बिना डिलीवरी कराई गई। डॉ. रुखसाना ने बताया कि जिन महिलाओं को एपीड्यूरल तकनीक की मदद से डिलीवरी कराई गई उनमें से 97 प्रतिशत की नॉर्मल डिलीवरी हुई। डिलीवरी के दौरान वे बेहद आराम की अवस्था में थीं। वे महिलाएं लेबर रूम में एपीड्यूरल लेते हुए आराम से टहल रही थी। उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। वहीं, जिनको इस तकनीक की सुविधा नहीं मिली वह डिलीवरी के दौरान बेहद पीड़ा में रहीं। उन्हें दर्द कम करने की दवाइयां काफी मात्रा में देनी पड़ी। वहीं उनमें से सात महिलाओं की सिजेरियन करनी पड़ी। 
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ओपीडी में गर्भवती महिलाओं को करती हैं जागरूक
डॉ. रुखसाना ने बताया कि लेबर पेन को कम करने वाली तकनीक की जानकारी देने के लिए ओपीडी में लगातार अवेयरनेस प्रोग्राम किए जाते हैं। प्रतिदिन ओपीडी में आने वाली महिलाओं को इसके बारे में बताया जाता है ताकि डिलीवरी के दौरान वे ली जाने वाली तकनीक का चुनाव करके संबंधित डॉक्टर को उसके बारे में बता सके। डॉ. रुखसाना का कहना है कि आधुनिक तकनीक को लेकर गर्भवती महिलाएं अब भी अनभिज्ञ हैं, जिसके कारण सुविधा होने के बावजूद उन्हें तमाम तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही है। इसलिए तकनीकी की जानकारी देने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम किए जाने की जरूरत है।


आप भी जान लें एपीड्यूरल तकनीक
पिड्यूरल आमतौर पर प्रसव के दौरान प्रभावी और दीर्घकालीन दर्द निवारक के तौर पर दिया जाता है। इसमें दर्द निवारक दवाओं को लगातार एक पतली नलिका के जरिये रीढ़ में दिया जाता है। इससे शरीर के निचले हिस्से में दर्द महसूस नहीं होता और गर्भवती महिला पूरी तरह होश में होती है। उस दौरान समय समय पर रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की जांच की जाती है और गर्भस्थ शिशु पर लगातार निगरानी रखी जाती है। एपिड्यूरल के जरिये जो दवाएं दी जाती हैं उसमें लोकल एनेस्थीसिया (यह दर्द, स्पर्श, हलचल और तापमान की अनुभूति को रोक देता है) और ओपिओइड दर्द निवारक (यह दर्द को कम कर देता है, मगर आप अपनी टांगों को हिला-डुला सकती हैं) दवाएं शामिल होती हैं। 

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