पंजाब-हरियाणा के दो मामले: खन्ना में महिला ने सड़क पर बच्चे को दिया जन्म, अंबाला में शौचालय में जन्मी बच्ची
पंजाब के खन्ना में इलाज से मना करने के बाद एक महिला ने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। वहीं हरियाणा के अंबाला में एक महिला ने नागरिक अस्पताल के शौचालय में बच्ची को जन्म दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के कैबिनेट मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली के विधानसभा क्षेत्र खन्ना में सेहत सुविधाओं की अव्यवस्था से इंसानियत एक बार फिर शर्मसार हुई है। इसकी ताजी तस्वीर रविवार को देखने को मिली। यहां एक गर्भवती महिला सिविल अस्पताल में प्रसव के लिए आई तो डॉक्टर ने इलाज करने से मना कर दिया।
महिला के पति किशन ने बताया कि वह पत्नी मीरा को लेकर जैसे ही सिविल अस्पताल से बाहर सड़क पर पहुंचे वैसे ही बच्चे का जन्म हो गया। बता दें कि प्रवासी महिला मीरा अपने परिवार के साथ मिलिट्री ग्राउंड स्थित झुग्गियों में रहती है। किशन ने बताया कि मीरा को सुबह प्रसव पीड़ा हुई तो वह उसे सिविल अस्पताल ले आए। यहां डॉक्टरों ने इलाज करने से साफ मना कर दिया। काफी मिन्नत के बाद भी जब डॉक्टर ने बात नहीं सुनी तो वह उसे लेकर अस्पताल से बाहर ले आए। अस्पताल के बाहर ही प्रसव पीड़ा तेज हुई और मीरा ने सड़क पर ही बेटे को जन्म दे दिया। हालांकि, बच्चा और मां पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
डॉक्टर और स्टाफ का मुंह मीठा करवा किया कटाक्ष
इसी बीच खन्ना के समाजसेवी निर्मल सिंह निम्मा, शशिवर्धन और संजीव कुमार मौके पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर और स्टाफ का मुंह मीठा करवाकर उन पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि लोगों के सड़कों पर उतरने से पहले ही डॉक्टर अपने काम करने के तरीके में सुधार ले आएं तो बेहतर होगा। डॉ. रविंदर कौर का कहना है कि वह मामले के बारे में लिखित में एसएमओ को बता चुके हैं।
डॉ. रविंदर कौर ने हमें लिखित में बताया कि उन्होंने इलाज करने से मना नहीं किया था। मरीज को दाखिल करवाकर घर से कागजात लाने को बोला गया था। परंतु वे मरीज को साथ लेकर ही चले गए। प्रवासी होने के कारण शायद वह भाषा नहीं समझ सके हैं। - सतपाल, एसएमओ सिविल अस्पताल।
अंबाला: अस्पताल के शौचालय में दिया बच्ची को जन्मी, मचा हड़कंप
उधर, हरियाणा के अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल के शौचालय में न्यू टैगोर गार्डन निवासी 22 वर्षीय सुलेखा ने बच्ची को जन्म दिया। शोर सुनने के बाद स्टाफ सहित तीमारदार शौचालय में गए तो देखा कि महिला व उसका बच्चा दोनों खून से लथपथ थे। सूचना मिलने पर अस्पताल के स्टाफ कर्मियों ने आनन-फानन शौचालय से निकालकर लेबर रूम में दाखिल किया। जहां प्राथमिक उपचार देने के बाद सफाई की गई।
स्टाफ की माने तो जच्चा व बच्चा दोनों की तबीयत में सुधार है। सुलेखा ने इस दौरान प्रसूति विभाग के स्टाफ पर भी लापरवाही का आरोप लगाया। उसका कहना है कि वह सुबह आठ बजे से अस्पताल में दाखिल थी। दवाई देने के बाद स्टाफ ने दोबारा चेकअप करना उचित नहीं समझा।
दर्द से कराहते हुए कई बार स्टाफ को भी बुलाया लेकिन काम में व्यस्त होने की बात बोलते हुए टाल दिया जा रहा था। शौचालय जाने के लिए वह प्रसूति विभाग से बाहर आ गई और जैसे ही दरवाजा बंदकर बैठी तो अचानक बच्ची का जन्म हो गया। गनीमत यह रही कि बच्ची पानी में नहीं डूबी। उधर, स्टाफ ने भी सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि बच्चा होने में समय था और शौचालय में जाने से पहले डॉक्टर व स्टाफ को बताने की बात बोली गई थी लेकिन किसी को नहीं बताया।