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सरकारी अस्पताल में गर्भवती से इलाज से पहले मांगी कोरोना रिपोर्ट, कार में बच्ची को दिया जन्म

Sat, 18 Jul 2020 12:47 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहगढ़ साहिब/बस्सी पठाना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहगढ़ साहिब/बस्सी पठाना (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sat, 18 Jul 2020 12:47 AM IST
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Woman gave birth to a girl child in a car
मामले के बारे में जानकारी देते हुए लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बस्सी पठाना के सरकारी अस्पताल में एक गर्भवती महिला को समय पर उपचार न देने से महिला ने कार में ही बच्ची को जन्म दे दिया। उन्हें एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। वहां जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं लेकिन सरकारी अस्पताल की लापरवाही के प्रति लोगों में रोष है। सुनील कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी रेखा गर्भवती थी। उसका इलाज सिविल अस्पताल बस्सी पठाना में चल रहा था। शुक्रवार सुबह वह महिला को दर्द होने पर अस्पताल में चेकअप करवाने गए तो डॉक्टरों ने पहले महिला का कोरोना टेस्ट करने की शर्त रख दी और कहा कि बाद में ही डिलीवरी की जाएगी।

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सुनील कुमार के अनुसार उन्होंने डॉक्टरों को बच्ची की जिंदगी बचाने की गुहार भी लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। निराश होकर रेखा अपने घर आ गई। प्रसव पीड़ा दोबारा होने पर महिला को एक कार से सिविल अस्पताल फतेहगढ़ साहिब ले जा रहा था तभी थोड़ी दूरी पर कार के अंदर ही महिला ने बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद उसे एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया। पीड़ित परिवार ने इस संबंध में हेल्पलाइन 112 को भी जानकारी दे दी है। 
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सुनील कुमार ने कहा कि पंजाब सरकार बढ़िया सेहत सुविधाएं दिलाने के दावे करती आ रही है लेकिन बस्सी पठाना में इन दावों का कोई अस्तित्व नहीं है। इस मौके आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज रूपिंदर सिंह हैपी और भाजपा के एससी सेल के जिला प्रधान राजीव कुमार ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री को सेहत सेवाओं की तरफ ध्यान देना चाहिए। ऐसी घटनाएं को गंभीरता के साथ लेते हुए संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ पर कार्रवाई की जानी 
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एसएमओ बस्सी पठाना डॉ. निर्मल कौर 
महिला सुबह रुटीन चेकअप के लिए आई थी। उसके पास पिछले टेस्ट की कोई रिपोर्ट भी नहीं थी। सरकार की हिदायतों के मद्देनजर महिला का कोरोना टेस्ट करवाने को कहा गया था, जिसके बाद वह चली गई। अस्पताल में महिला विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। फिर भी ऐसे केसों को संभालने की कोशिश की जाती है। डॉक्टरों और स्टाफ पर लगाए गए आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं।

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