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अमानवीयताः इमरजेंसी में इलाज के लिए 4 घंटे तड़पती रही महिला

Sun, 10 Apr 2016 10:31 AM IST
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला Updated Sun, 10 Apr 2016 10:31 AM IST
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woman agonized in emergency for treatment from 4 hours
सेक्टर 6 अस्पताल पंचकूला में महिला पेशेंट - फोटो : amar ujala

सेक्टर 6 स्थित जनरल अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों की लापरवाही से करीब चार घंटे महिला आंख के इंफेक्शन से तड़पती रही। उसके बार-बार कहने पर भी डॉक्टरों ने इमरजेंसी कॉल कर आई सर्जन को नहीं बुलाया।

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इतना ही नहीं इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने महिला से कहा कि इमरजेंसी कॉल पर डॉक्टर सुबह नहीं आएंगे। उन्हें एक घंटे बाद ओपीडी में ही दिखाना होगा। नियमानुसार इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर को अगर पेशेंट की हालत गंभीर लगती है तो वह इमरजेंसी कॉल कर डॉक्टर को बुला सकते हैं।
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जीरकपुर निवासी नीतू खुराना (35) आंख में इंफेक्शन होने के बाद पति के साथ शनिवार सुबह आठ बजे जनरल अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंची थी। नीतू खुराना का आरोप है कि वह दर्द से तड़पती रही लेकिन बार-बार कहने के बाद भी आई सर्जन को इमरजेंसी कॉल कर नहीं बुलाया गया। यहां तक कि पहले तो डॉक्टरों ने उनकी जांच करने के बजाया यह कह दिया कि ओपीडी के समय आई सर्जन से आप आंखों की जांच करा लेना। उस समय इमरजेंसी में बिजली न होने से अंधेरा था। फिर नीतू के पति ने कहा कि अस्पताल में पावर बैकअप के लिए जेनरेटर है चलाया क्यों नहीं जा रहा है। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
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शिकायत की बात पर हरकत में आया स्टाफ
महिला ने जब इस मामले की डीजी से शिकायत की बात कही तो डॉक्टरों का स्टाफ हरकत में आया। इसके आधे घंटे बाद जेनरेटर चलवाया गया और इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने महिला को दर्द का इंजेक्शन लगाया। इसके बाद भी राहत मिलने के बजाय दर्द और सूजन बढ़ने लगा। तब तक ओपीडी का समय खत्म हो गया। जब महिला आई ओपीडी में पहुंची तो डॉक्टर ने कहा कि परेशानी ज्यादा थी तो इमरजेंसी कॉल करवाकर डाक्टर को बुला लेते। यह हमारी ड्यूटी है। अगर ऐसा है तो इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने आई सर्जन को क्यों नहीं बुलाया।

तीन ओपीडी कार्ड, फिर भी नहीं मिला इलाज
पंचकूला के जनरल अस्पताल के इमरजेंसी में आई इंफेक्शन की शिकायत लेकर पहुंची नीतू खुराना को तीन ओपीडी कार्ड बनवाने के बाद भी आराम नहीं मिला। इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ सेक्टर-32 के जीएमसीएस जाना पड़ा। वहां डॉक्टरों ने कहा कि और देरी होती तो दिक्कत बढ़ सकती थी। नीतू ने बताया कि सोमवार को वह सीएम विंडो और डीजी हेल्थ से इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों की शिकायत देंगी।  
 चार बार काटने पड़े चक्कर
नीतू खुराना ने बताया कि अस्पताल के इमरजेंसी से आई ओपीडी में पहुंची तो डॉक्टर ने कहा कि ओपीडी कार्ड बनवाकर लाएं। क्योंकि डॉक्टर को यह नहीं पता था कि वह इमरजेंसी के चक्कर काटकर आई हैं। जब वह ओपीडी कार्ड बनवाकर पहुंची तो आंखों का दर्द काफी बढ़ गया था। डॉक्टर को उन्होंने इमरजेंसी की बात बताई।

आई सर्जन ने कहा कि उन्हें इमरजेंसी कॉल कर वहीं बुला लेना चाहिए था। वहां डॉक्टर ने नीतू के आंखों की जांच के बाद इंफेक्शन की वजह से स्किन ओपीडी में जांच के लिए भेजा। जहां डॉक्टर ने स्किल ओपीडी कार्ड बनवाने के लिए कहा। वहां से नीतू के पति ने तीसरी बार स्किन ओपीडी के लिए कार्ड बनवाने गए। पहले इमरजेंसी में डेढ़ घंटे खराब हुए। इसके बाद ओपीडी के रजिस्ट्रेशन और ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने में साढ़े तीन घंटे नीतू अपने पति के साथ अस्पताल में चक्कर काटती रही। इसके बावजूद उन्हें आराम नहीं मिला तो वह इलाज के लिए जीएमसीएच-32 गईं।


वीके बंसल, सिविल सर्जन सामान्य अस्पताल पंचकूला ने बताया कि यदि किसी मरीज के साथ स्टाफ ने ऐसा बरताव किया है तो बहुत गलत है। मैं सोमवार को इस मामले में इमरजेंसी में तैनात स्टाफ से पूछताछ करूंगा। यदि जरूरत पड़ी तो स्टाफ से स्पष्टीकरण भी लूंगा। किसी भी मरीज के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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