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Hindi News ›   Chandigarh ›   Who will lead the Punjab Congress in Assembly elections 2022

पंजाब में कौन होगा कांग्रेस का कैप्टन: पार्टी के पास राज्य में बड़े चेहरे की कमी, नए नेता के सामने होंगी कई चुनौतियां

Sun, 19 Sep 2021 03:17 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 19 Sep 2021 03:17 AM IST
सार

कैप्टन जैसा बड़ा चेहरा पंजाब में खोजना कांग्रेस हाईकमान के सामने बड़ी चुनौती है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नरेंद्र मोदी के अजेय रथ को पंजाब में रोका था। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को पंजाब में बड़ी जीत दिलाई। ऐसे में अब हाईकमान को 2022 विधानसभा में जीत हासिल कर कांग्रेस को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाने वाले नेता की तलाश है। 

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Who will lead the Punjab Congress in Assembly elections 2022
सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कांग्रेस हाईकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर और विधायक दल का नया नेता तो चुन लिया है लेकिन पार्टी के सामने अब यक्ष प्रश्न यह है कि छह माह बाद होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की नैया कौन पार कराएगा? ऐसा कौन सा ‘कैप्टन’ है जो अपने बूते कांग्रेस को दोबारा सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाएगा।

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पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का भी मानना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब में कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे हैं और 2017 के चुनाव में पार्टी की जीत का सारा श्रेय उनके कद्दावर व्यक्तित्व को ही जाता है लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। कैप्टन पार्टी में हाशिए पर चले गए हैं और विधानसभा चुनाव बहुत करीब हैं। इस बीच, पार्टी सूत्रों का कहना है कि शनिवार को हुई विधायक दल की बैठक में नए नेता के रूप में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के नाम पर मुहर लगना तय हो गया है। अगर हाईकमान जाखड़ को विधायक दल का नेता घोषित करता है तब भी पंजाब कांग्रेस के फिर से दो छोर उभरने की आशंका है। 
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दरअसल, प्रदेश कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री बनने पर सुनील जाखड़ के बीच भी तालमेल बैठने पर संशय है। सिद्धू-कैप्टन की तरह सिद्धू-जाखड़ भी एक-दूसरे को बहुत पसंद नहीं करते। ऐसी स्थिति में दोनों के बीच वरिष्ठता की होड़ लग सकती है, जो सीधे पार्टी को ही नुकसान पहुंचाएगी।
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सुनील जाखड़ और नवजोत सिद्धू भले ही पंजाब कांग्रेस के जाने-पहचाने चेहरे हैं लेकिन दोनों नेता अपने बूते पार्टी को चुनाव जिता सकें, यह आसान नहीं है। वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की हालत भी यह है कि सभी नेता पंजाब में मालवा, माझा, दोआबा के हिस्सों में बंटे हैं और उनकी ताकत अपने क्षेत्रों तक सीमित है। पार्टी के पास इस समय ऐसा कोई नेता नहीं है जो राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में अपनी मजबूत पैठ साबित कर सके। यह रुतबा केवल कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही हासिल था और प्रदेश के लोग उन्हें सुनते भी हैं। आने वाले समय में पता चलेगा कि पार्टी हाईकमान की ओर से पंजाब में चुनाव से ठीक पहले किया गया प्रयोग कितना सफल होगा।

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