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Who is Amritpal Singh: जानें चार माह के सफर में अमृतपाल सिंह कैसे बना खालिस्तानी मूवमेंट का अगुवा
Fri, 24 Feb 2023 12:55 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 24 Feb 2023 12:55 PM IST
सार
2012 से पहले ही अमृतपाल का परिवार दुबई चला गया था। वहां परिवार ने ट्रांसपोर्ट का काम शुरू कर दिया। 2013 में दुबई में ट्रांसपोर्ट का कामकाज खुद देखने लगा। अगस्त 2022 में अमृतपाल दुबई से अकेला ही पंजाब आया था।
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प्रेसवार्ता करते अमृतपाल सिंह।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह ने मात्र चार माह पहले ही इस संगठन की बागडोर संभाली है। अमृतपाल अमृतसर के गांव जंडुपुर खेरा का रहने वाला है। 2012 से पहले ही अमृतपाल का परिवार दुबई चला गया था। वहां परिवार ने ट्रांसपोर्ट का काम शुरू कर दिया। 2013 में दुबई में ट्रांसपोर्ट का कामकाज खुद देखने लगा।
अगस्त 2022 में अमृतपाल दुबई से अकेला ही पंजाब आया था। अक्तूबर में अमृतपाल ने जरनैल सिंह भिंडरावाला के गांव रोडे में ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के नए मुखिया के तौर पर ओहदा संभाला। यह संगठन दिल्ली हिंसा के आरोपी दीप सिद्धू ने बनाया था। इस दौरान आयोजित समारोह में अमृतपाल ने खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला का अनुयायी बताते हुए सिख युवाओं को अगली जंग के लिए तैयार होने का आह्वान किया था। इसके बाद खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई थी। उसके बारे में जांच शुरू की गई। पैतृक गांव में जांच करने गए गुप्तचर विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि लोगों ने बताया कि वह काफी शर्मीला था। पढ़ाई में भी औसत ही था। खालिस्तानी विचारधारा का पाठ उसे दुबई में ही पढ़ाया गया है।
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अगस्त 2022 में अमृतपाल दुबई से अकेला ही पंजाब आया था। अक्तूबर में अमृतपाल ने जरनैल सिंह भिंडरावाला के गांव रोडे में ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के नए मुखिया के तौर पर ओहदा संभाला। यह संगठन दिल्ली हिंसा के आरोपी दीप सिद्धू ने बनाया था। इस दौरान आयोजित समारोह में अमृतपाल ने खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला का अनुयायी बताते हुए सिख युवाओं को अगली जंग के लिए तैयार होने का आह्वान किया था। इसके बाद खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई थी। उसके बारे में जांच शुरू की गई। पैतृक गांव में जांच करने गए गुप्तचर विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि लोगों ने बताया कि वह काफी शर्मीला था। पढ़ाई में भी औसत ही था। खालिस्तानी विचारधारा का पाठ उसे दुबई में ही पढ़ाया गया है।
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अमृतपाल की दस्तारबंदी में शामिल हुए थे खालिस्तानी समर्थक
गांव रोडे में अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी में ऐसे संगठन के सदस्य भी शामिल हुए जिनका किसी न किसी रूप में खालिस्तानी दहशतगर्दी से संबंध रहा। मंच से भी खालिस्तानी नारे लगाए गए। बब्बर खालसा, प्रतिबंधित इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन और पूर्व में बैन रहे संगठनों के पुराने सदस्य भी इसमें दिखे।
आईएसआई की शह पर अमृतपाल को भेजा गया : कैप्टन
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार को खालिस्तान के मुद्दे पर कार्रवाई करने की जरूरत है। उन्होंने आशंका जताई कि दुबई निवासी अमृतपाल को पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर पंजाब में फिर से खालिस्तान का मुद्दा भड़काने के लिए भेजा गया है। कैप्टन ने कहा कि अमृतपाल का परिवार दुबई में रहता है। पंजाब सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए कि इसकी मंशा क्या है। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। वह (पंजाब सरकार) कुछ नहीं कर रहे।
भिंडरांवाला का परिवार कर चुका है किनारा
दमदमी टकसाल के मुखी रहे संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने वारिस पंजाब दे जत्थेबंदी के मुखी अमृतपाल सिंह से किनारा कर लिया है। जसबीर सिंह ने कहा कि अमृतपाल सिंह की विचारधारा से उनका कोई लेना देना नहीं है। अमृतपाल भिंडरांवाला की जगह नहीं ले सकता। वो एक अलग शख्सियत थे। उन्होंने कभी भी खालिस्तान बनाने की मांग नहीं की थी।
श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई जरनैल सिंह रोडे ने कहा कि खालिस्तान अमृतपाल का अपना और उसकी जत्थेबंदी का एजेंडा हो सकता है। भिंडरांवाला परिवार इससे इत्तफाक नहीं रखता। उन्होंने कहा कि अमृतपाल यदि सिख धर्म के प्रचार प्रसार या अमृतपान की मुहिम चलाता है तो हम उसका साथ देंगे, लेकिन अलग खालिस्तान या राज्य की मांग का वह समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला ने भी कभी खालिस्तान की मांग नहीं की थी। वे हमेशा ही आनंदपुर साहिब मत्ते को लागू करने की मांग करते थे। इसके तहत राज्यों को अधिकार दिए जाने की वकालत थी, उसमें खालिस्तान की कोई बात नहीं थी।
गांव रोडे में अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी में ऐसे संगठन के सदस्य भी शामिल हुए जिनका किसी न किसी रूप में खालिस्तानी दहशतगर्दी से संबंध रहा। मंच से भी खालिस्तानी नारे लगाए गए। बब्बर खालसा, प्रतिबंधित इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन और पूर्व में बैन रहे संगठनों के पुराने सदस्य भी इसमें दिखे।
आईएसआई की शह पर अमृतपाल को भेजा गया : कैप्टन
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार को खालिस्तान के मुद्दे पर कार्रवाई करने की जरूरत है। उन्होंने आशंका जताई कि दुबई निवासी अमृतपाल को पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर पंजाब में फिर से खालिस्तान का मुद्दा भड़काने के लिए भेजा गया है। कैप्टन ने कहा कि अमृतपाल का परिवार दुबई में रहता है। पंजाब सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए कि इसकी मंशा क्या है। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। वह (पंजाब सरकार) कुछ नहीं कर रहे।
भिंडरांवाला का परिवार कर चुका है किनारा
दमदमी टकसाल के मुखी रहे संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने वारिस पंजाब दे जत्थेबंदी के मुखी अमृतपाल सिंह से किनारा कर लिया है। जसबीर सिंह ने कहा कि अमृतपाल सिंह की विचारधारा से उनका कोई लेना देना नहीं है। अमृतपाल भिंडरांवाला की जगह नहीं ले सकता। वो एक अलग शख्सियत थे। उन्होंने कभी भी खालिस्तान बनाने की मांग नहीं की थी।
श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई जरनैल सिंह रोडे ने कहा कि खालिस्तान अमृतपाल का अपना और उसकी जत्थेबंदी का एजेंडा हो सकता है। भिंडरांवाला परिवार इससे इत्तफाक नहीं रखता। उन्होंने कहा कि अमृतपाल यदि सिख धर्म के प्रचार प्रसार या अमृतपान की मुहिम चलाता है तो हम उसका साथ देंगे, लेकिन अलग खालिस्तान या राज्य की मांग का वह समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला ने भी कभी खालिस्तान की मांग नहीं की थी। वे हमेशा ही आनंदपुर साहिब मत्ते को लागू करने की मांग करते थे। इसके तहत राज्यों को अधिकार दिए जाने की वकालत थी, उसमें खालिस्तान की कोई बात नहीं थी।