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Chandigarh News: राव जिस भी पार्टी में गए, उसी का गढ़ हो गया अहीरवाल

Mon, 10 Jun 2024 04:52 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jun 2024 04:52 AM IST
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Whichever party Rao went to Ahirwal became its stronghold
-कभी कांग्रेस का गढ़ रहे अहीरवाल में अब दस साल से भाजपा का कब्जा
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-लगातार तीसरी बार मोदी कैबिनेट में मिला राव को स्थान

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अहीरवाल और दक्षिण हरियाणा में रामपुरा हाउस और राव इंद्रजीत सिंह का जलवा बरकरार है। लगातार पिछले 25 साल से राव का यहां पर कब्जा है। खास बात ये है कि वह कांग्रेस में भी रहे और अब भाजपा में भी, लेकिन विरोधी उनका तोड़ नहीं निकाल पाए। गुरुग्राम लोकसभा सीट से छठी बार सांसद बनने वाले राव इंद्रजीत सिंह लगातार तीसरी बार मोदी कैबिनेट में शामिल किए गए हैं। खास बात ये है कि राव जिस भी दल में गए, अहीरवाल उसी पार्टी का गढ़ बन गया।
महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र पर एकछत्र राज करते हुए उनके पिता राव बिरेंद्र सिंह ने 1998 में उन्हें अपनी जगह लोकसभा प्रत्याशी बनाया था। राव पहले ही चुनाव में जीत हासिल कर संसद की चौखट पर पहुंच गए और देश की 12वीं लोकसभा के सदस्य बने। यहां से उनका देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने का सिलसिला आरंभ हुआ। हालांकि, अगले ही चुनाव यानी साल 1999 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2004 के चुनाव में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों से अपनी हार का बदला चुकता किया। 1998 से 99 तक राव संसद विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर्यावरण और वन संबंधी स्थायी समिति के सदस्य भी रहे। 2004 में वह फिर महेंद्रगढ़ से चौदहवीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। मई 2004 में उन्हें केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री बनाया गया। 2006 तक वह इस जिम्मेदारी को निभाते रहे। फरवरी 2006 से 2009 तक राव केंद्रीय रक्षा उत्पादन राज्य मंत्री रहे। 2014 से पहले पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से नाराज होकर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और तभी से अहीरवाल में उन्होंने कांग्रेस के गढ़ को भाजपा का गढ़ बना रखा है।
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मई 2014 में उन्होंने गुरुग्राम से सोलहवीं लोकसभा का चुनाव लड़ा और लगातार इस क्षेत्र से दूसरी तथा सांसद के रूप में तीसरी जीत हासिल की। 27 मई 2014 से 9 नवंबर 2014 तक वह केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) योजना सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन एवं योजना बनाए गए। मई 2019 में उन्होंने गुरुग्राम से जीत की हैट्रिक लगाते हुए सत्रहवीं लोकसभा के लिए निर्वाचित सदस्य के रूप में संसद में प्रवेश किया। बतौर सांसद उनका पांचवां कार्यकाल रहा। जून 2019 से लेकर संसद भंग होने तक वह केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), योजना, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन बने रहे।
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