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वित्तमंत्री पीयूष गोयल आज पेश करेंगे अंतरिम बजट, मोदी सरकार से जनता को क्या-क्या उम्मीदें...पढ़ें

Fri, 01 Feb 2019 09:37 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 01 Feb 2019 09:37 AM IST
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what The peoples expect from interim budget 2019 in chandigarh
बजट 2019 - फोटो : फाइल फोटो

मोदी सरकार आज अपना आखिरी बजट पेश करेगी। यह अंतरिम बजट होगा। चुनावी साल होने के कारण इस बजट से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। सबसे बड़ी आस मध्य वर्ग को है, जो इनकम टैक्स में राहत के साथ महंगाई पर लगाम लगाने की मांग कर रहा है। मौजूदा समय में सेक्शन 80 सी के तहत एक व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा निवेश कर करीब डेढ़ लाख रुपये तक टैक्स छूट का लाभ उठा सकता है। 

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इस लिहाज से यह सीमा काफी कम है। इसे बढ़ाकर दो से ढाई लाख रुपये तक किए जाने की मांग है। वहीं, महंगाई की मार से भी लोग परेशान हैं। इसके अलावा किसान भी सरकार से आस लगाकर बैठे हैं। वहीं, बेरोजगारों को इस बजट से रोजगार जबकि व्यापारियों को जीएसटी की स्लैब में बदलाव की उम्मीद है।
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रोजगार बढ़ाने की दिशा में काम की मांग
इस समय सबसे बड़ी चिंता रोजगार की है। बजट से ठीक एक दिन पहले आए नेशनल सैंपल सर्वे आफिस (एनएसएसओ) के मुताबिक साल 2017-18 में रोजगार की हालत पिछले 44 सालों में सबसे खराब है। साल 2014 चुनाव के दौरान मोदी सरकार ने घोषणा की थी कि हर साल दो करोड़ रोजगार उपलब्ध कराएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लोग हाथ में डिग्री लिए घूम रहे हैं, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। पीयू व पेक के छात्रों का कहना है कि अंतरिम बजट में रोजगार की दिशा में कोई ऐसा कदम बढ़ाया जाए, जिससे युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिले।

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आयुष्मान का दायरा बढ़े, स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी कम हो

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budget

पिछले बजट में आयुष्मान भारत की स्कीम को लांच किया गया था, जो मील का पत्थर साबित हो रही है। लेकिन इसमें अब भी खामियां हैं। इसमें किसी भी ट्रांसप्लांट को शामिल नहीं किया गया है और कई ऐसे लोग हैं, जो लाभार्थियों की सूची में ही नहीं है, जबकि वे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। 

लोग चाहते हैं कि एक तो पांच लाख तक के सभी ट्रांसप्लांट आयुष्मान के दायरे में लाए जाएं और गरीब व मध्यवर्गीय लोगों को भी इस स्कीम के दायरे में लाया जाए। इस क्षेत्र में दूसरी बड़ी मांग स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी कम करने की है। आज स्वास्थ्य बीमा हर दूसरे व्यक्ति की जरूरत बन चुका है। इस पर करीब 18 फीसदी जीएसटी की दर लग रही है। इसे कम से कम होना चाहिए, ताकि लोगों को सस्ता इलाज मिल सके।

टैक्स छूट सीमा ढाई लाख रुपये तक बढ़ाई जाए
2.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट सीमा की बढ़ाने की मांग की जा रही है। पिछले बजट में ढाई लाख रुपये प्रति वर्ष से 5 लाख रुपये प्रति वर्ष की आय सीमा में आने वाले लोगों के लिए तत्कालीन दस फीसदी इनकम टैक्स रेट को घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया था। जबकि 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये की आय सीमा में आने वाले लोगों का इनकम टैक्स रेट 20 प्रतिशत ही रख दिया गया।

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budget - फोटो : File Photo

 जिससे 5 प्रतिशत के बाद 20 प्रतिशत का यह टैक्स रेट काफी अधिक लगता है। इसलिए लोग इस मामले में कुछ रियायत की उम्मीद कर रहे हैं। म्यूच्यूअल फंड से 1 लाख रुपये से अतिरिक्त मुनाफे पर दस फीसदी टैक्स लगाया गया था। पिछले दो से तीन सालों में म्यूचुअल फंड के बारे में काफी प्रचार किया गया है। छोटे निवेशकों की तादाद बढ़ी है। ऐसे में इसमें टैक्स कम करना चाहिए, ताकि निवेशकों की संख्या में बढ़ोतरी हो।

किसानों को मिले मंथली इनकम
बजट से पहले यूनिवर्सल बेसिक इनकम की बात हो रही है। यानी लोगों को हर महीने कुछ पैसे का इंतजाम। लेकिन लोग मानते हैं कि इससे पहले किसानों के बारे में सोचना होगा। उनकी हर महीने की सैलरी तय करनी चाहिए। खासकर उन लोगों की, जिनके पास खुद की कोई जमीन नहीं है और वह किसी दूसरे के खेती में काम करते हैं। इसके अतिरिक्त स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को लागू किया जाए और सभी फसलों में न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की गई है। 

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सांकेतिक तस्वीर

इस बार के बजट में किसानों के विकास के लिए कुछ बेहतर करने की उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों का विकास भी इससे जुड़ा है। साथ ही आठ लाख तक की आय वाले इकनॉमिक वीकर लोगों को जो दस फीसदी आरक्षण देने की बात हुई है, जबकि उसमें तमाम लोग इनकम टैक्स चुका रहे हैं, ऐसे में इस बजट में इस गैप पर निर्णय लिए जाने की संभावना है। -प्रो. उपिंदर साहनी, चेयरमैन, इकनॉमिक्स डिपार्टमेंट पीयू

बजट अच्छा आएगा क्योंकि चुनाव आने वाले हैं। यह अंतरिम बजट है, इसलिए इस बजट से कोई बड़ी उम्मीद नहीं कर सकते, लेकिन हो सकता है कि टैक्स में छूट की सीमा बढ़ा दी जाए। चंडीगढ़ को इस बजट से खास उम्मीद नहीं है। रेलवे बजट भी साथ होगा। वहीं महिलाओं को आकर्षित करने के लिए सरकार स्त्री धन को लीगल कर सकती है। अजय जग्गा, वकील व जीएसटी एक्सपर्ट

किसान हमारे अन्नदाता हैं। स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने की बात कई सालों से हो रही है। अब इससे ऊपर उठने की बात होनी चाहिए। हर फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना जरूरी है। मैं अभी मध्यप्रदेश का दौरा करके आया हूं। वहां किसानों से बात करने से पता चला कि कई किसानों की साल भर की इनकम 50 हजार से भी कम है। यह काफी चिंताजनक बात है। बजट में इस बारे में जरूर सोचना होगा। राहुल महाजन, विशेषज्ञ आर्गेनिक फार्मिंग

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