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पश्चिम एशिया संकट: पुराना बासमती अटका, 15 लाख टन नई फसल तैयार; सात दिन की जगह निर्यात में लग रहा एक महीना

Fri, 16 Oct 2026 08:43 AM IST
Akash Dubey राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Akash Dubey Updated Fri, 16 Oct 2026 08:43 AM IST
सार

पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से पंजाब के बासमती निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ी हैं। समुद्री भाड़ा छह गुना बढ़कर 3000 डॉलर हो गया है, जिससे निर्यात में देरी हो रही है। 

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West Asia crisis Old Basmati stuck 1.5 million tonnes of new harvest ready
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया संकट के कारण पंजाब के बासमती चावल निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले साल का चावल अभी तक पूरी तरह निर्यात नहीं हो पाया है, जबकि खरीफ सीजन का नया बासमती भी मंडियों में पहुंचने लगा है। करीब 15 लाख मीट्रिक टन नया बासमती निर्यात के लिए तैयार है। दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से समुद्री भाड़ा छह गुना तक बढ़ गया है। जिस निर्यात में पहले सात दिन लगते थे, अब उसमें एक महीने तक का समय लग रहा है। इससे निर्यातकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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पंजाब में करीब 30 लाख मीट्रिक टन बासमती का उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग 15 लाख टन बासमती तैयार होता है। इसका करीब 80 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों को निर्यात किया जाता है। प्रदेश की मिलों में अभी भी पिछले साल का दो लाख टन चावल पड़ा है, जबकि एक लाख टन चावल का निर्यात अधर में है। इस तरह कुल तीन लाख टन चावल का निर्यात अटका हुआ है। अब नई फसल आने से निर्यातकों के सामने पुराने स्टॉक को निकालने और नए चावल के लिए जगह बनाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

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होर्मुज मार्ग बंद होने से बढ़ी परेशानी
ईरान ने इस साल फरवरी में अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया था। बासमती चावल के निर्यात के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है। पंजाब से सबसे अधिक बासमती ईरान को निर्यात किया जाता है। इसके अलावा इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन समेत मध्य पूर्व के कई देशों में भी चावल भेजा जाता है। यूरोपीय संघ, तुर्किये और ब्रिटेन भी पंजाब के बासमती के प्रमुख बाजारों में शामिल हैं।

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तीन हजार डॉलर तक पहुंचा समुद्री भाड़ा
पंजाब बासमती मिलर्स एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के वित्त सचिव नरेश गोयल ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने के कारण समुद्री भाड़ा 500 डॉलर से बढ़कर 3000 डॉलर तक पहुंच गया है। निर्यात में देरी होने से भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि फरवरी से अब तक करीब 60 करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित हुआ है। इससे पहले काफी समय तक निर्यात पूरी तरह बंद भी रहा था। यदि होर्मुज मार्ग जल्द नहीं खुला तो निर्यातकों को आगे और नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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बासमती चावल के निर्यात में आई गिरावट
एसोसिएशन के प्रधान बाल कृष्ण बाली ने बताया कि बासमती का निर्यात जारी है, लेकिन इसमें पहले के मुकाबले अधिक समय लग रहा है। इससे निर्यातकों की लागत बढ़ रही है और कारोबार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी करीब सात लाख टन बासमती आता है। इस तरह कुल 22 लाख टन बासमती का निर्यात करना है, लेकिन मौजूदा हालात में इसे पहले की तरह जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है। बाली के अनुसार, पूरे देश से करीब 48 हजार करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात होता है, जिसमें पंजाब की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। ऐसे में युद्ध जल्द समाप्त होना और होर्मुज मार्ग से निर्यात सामान्य होना जरूरी है, ताकि कारोबार पहले की तरह पटरी पर लौट सके।

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