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पानी का मुद्दा : बेनतीजा रही सलाहकार के साथ बैठक
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चंडीगढ़। एक अप्रैल से बढ़ने वाले पानी के दाम को लेकर सोमवार को यूटी प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने भाजपा, कांग्रेस, आप, शिअद और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। हालांकि काफी देर तक चली बहस के बाद बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला। सलाहकार ने इस मुद्दे को प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित के पास भेजने की बात कही है। इस पूरे प्रकरण में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने विरोध जताते कहा कि पानी के दाम बढ़ाकर जनता पर बोझ नहीं डालने दिया जाएगा। वहीं, भाजपा का रुख नरम रहा।
पानी के दाम को लेकर सलाहकार ने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें मेयर सरबजीत कौर के साथ सीनियर डिप्टी मेयर अनूप गुप्ता और डिप्टी मेयर दलीप शर्मा भी मौजूद रहे। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला, आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम गर्ग, शिरोमणि अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष हरदीप सिंह शामिल हुए।
सलाहकार ने प्रस्ताव रखा कि व्यावसायिक कनेक्शनों और बड़ी कोठियों में पानी के दाम को बढ़ा देते हैं, बाकी जगह अभी दरों को स्थिर रखा जाएगा। आप के प्रतिनिधि ने कहा कि पानी लीकेज को ठीक कर लिया जाए, घाटा अपने आप पूरा हो जाएगा। इसके लिए जनता पर बोझ डालने की जरूरत नहीं होगी। वहीं अरुण सूद ने पानी की दरों में सामान्य बढ़ोतरी पर सहमति जताई लेकिन बैठक में कोई हल नहीं निकला।
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सलाहकार ने कहा कि बैठक में चर्चा की रिपोर्ट प्रशासक को दे दी जाएगी, वहीं जनप्रतिनिधियों की बात भी उनके सामने रखी जाएगी। इस पर अंतिम निर्णय प्रशासक लेंगे। इससे पहले भी प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला था।
बैठक में आयुक्त आनिंदिता मित्रा के साथ चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा, एसई पब्लिक हेल्थ विजय प्रेमी, भाजपा पार्षद जशमनप्रीत सिंह, हरप्रीत कौर बबला, राजेंद्र शर्मा, आप पार्षद योगेश ढींगरा, अंजू कात्याल, कांग्रेस पार्षद गुरुबक्श रावत, गुरप्रीत गाबी और जसबीर सिंह मौजूद रहे।
सदन की बैठक आज, फिर होगा हंगामा
नगर निगम सदन की बैठक मंगलवार को होने जा रही है। इसमें हंगामा होना तय है। आम आदमी पार्टी (आप), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि एक अप्रैल से पानी के बढ़ रहे दामों को लेकर जब तक कोई फैसला नहीं होगा, तब तक किसी भी एजेंडे पर बात नहीं करेंगे। वहीं भाजपा के लिए भी सदन की कार्यवाही को चलाना किसी परीक्षा से कम नहीं होगा। सदन में रायपुरकलां की गोशाला के लिए पब्लिक हेल्थ के कार्य, फायर फाइटिंग सिस्टम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए लोगों से आवेदन मांगने का एजेंडा लाया जा रहा है। निर्माण और विध्वंस के मलबे के लिए पॉलिसी पर दाम तय करने के लिए चर्चा होनी है जबकि संपत्ति कर में बदलाव, लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड करने और पेट बायलॉज में बदलाव के लिए भी एजेंडा आएगा लेकिन चर्चा का विषय पानी के दामों को लेकर ही रहेगा।
तत्कालीन प्रशासक ने जारी किए थे आदेश
नगर निगम ने सदन में पेयजल आपूर्ति के घाटे को दिखाते हुए पानी के दामों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। कांग्रेस के विरोध के बावजूद सदन ने इस फैसले को पास कर दिया। प्रशासन से इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई। लोगों के विरोध के बाद जनप्रतिनिधि सदन में पानी के दामों को बदलने का प्रस्ताव फिर ले आए, सदन ने इसे पास भी कर दिया, लेकिन तत्कालीन आयुक्त ने इस पर अपनी आपत्ति लगा दी। मामला अधर में लटकता देख जनप्रतिनिधि तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मिलने पहुंचे। प्रशासक ने एक अप्रैल 2022 तक पुराने दामों को लागू रखने के आदेश जारी कर दिए। इस बार चुनाव में पानी पर काफी घमासान हुआ था, अब दाम बढ़े तो जनप्रतिनिधियों को जनता को जबाव देना मुश्किल हो जाएगा।
कोट-
सभी जनप्रतिनिधियों के सुझाव लिए हैं। उन्हें बताया है कि पहले ही निगम को पेयजलापूर्ति में 90 करोड़ का नुकसान हो रहा है। दाम नहीं बढ़ेंगे तो समस्या होगी। निगम का काम लोगों को सेवा देना है, इसके बदले शुल्क लिया जाता है। जो सुझाव मिले हैं, उन्हें प्रशासक के पास भेज देंगे।
-धर्मपाल, सलाहकार यूटी प्रशासक
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पानी के दाम को लेकर सलाहकार ने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें मेयर सरबजीत कौर के साथ सीनियर डिप्टी मेयर अनूप गुप्ता और डिप्टी मेयर दलीप शर्मा भी मौजूद रहे। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला, आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम गर्ग, शिरोमणि अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष हरदीप सिंह शामिल हुए।
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सलाहकार ने प्रस्ताव रखा कि व्यावसायिक कनेक्शनों और बड़ी कोठियों में पानी के दाम को बढ़ा देते हैं, बाकी जगह अभी दरों को स्थिर रखा जाएगा। आप के प्रतिनिधि ने कहा कि पानी लीकेज को ठीक कर लिया जाए, घाटा अपने आप पूरा हो जाएगा। इसके लिए जनता पर बोझ डालने की जरूरत नहीं होगी। वहीं अरुण सूद ने पानी की दरों में सामान्य बढ़ोतरी पर सहमति जताई लेकिन बैठक में कोई हल नहीं निकला।
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सलाहकार ने कहा कि बैठक में चर्चा की रिपोर्ट प्रशासक को दे दी जाएगी, वहीं जनप्रतिनिधियों की बात भी उनके सामने रखी जाएगी। इस पर अंतिम निर्णय प्रशासक लेंगे। इससे पहले भी प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला था।
बैठक में आयुक्त आनिंदिता मित्रा के साथ चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा, एसई पब्लिक हेल्थ विजय प्रेमी, भाजपा पार्षद जशमनप्रीत सिंह, हरप्रीत कौर बबला, राजेंद्र शर्मा, आप पार्षद योगेश ढींगरा, अंजू कात्याल, कांग्रेस पार्षद गुरुबक्श रावत, गुरप्रीत गाबी और जसबीर सिंह मौजूद रहे।
सदन की बैठक आज, फिर होगा हंगामा
नगर निगम सदन की बैठक मंगलवार को होने जा रही है। इसमें हंगामा होना तय है। आम आदमी पार्टी (आप), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि एक अप्रैल से पानी के बढ़ रहे दामों को लेकर जब तक कोई फैसला नहीं होगा, तब तक किसी भी एजेंडे पर बात नहीं करेंगे। वहीं भाजपा के लिए भी सदन की कार्यवाही को चलाना किसी परीक्षा से कम नहीं होगा। सदन में रायपुरकलां की गोशाला के लिए पब्लिक हेल्थ के कार्य, फायर फाइटिंग सिस्टम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए लोगों से आवेदन मांगने का एजेंडा लाया जा रहा है। निर्माण और विध्वंस के मलबे के लिए पॉलिसी पर दाम तय करने के लिए चर्चा होनी है जबकि संपत्ति कर में बदलाव, लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड करने और पेट बायलॉज में बदलाव के लिए भी एजेंडा आएगा लेकिन चर्चा का विषय पानी के दामों को लेकर ही रहेगा।
तत्कालीन प्रशासक ने जारी किए थे आदेश
नगर निगम ने सदन में पेयजल आपूर्ति के घाटे को दिखाते हुए पानी के दामों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। कांग्रेस के विरोध के बावजूद सदन ने इस फैसले को पास कर दिया। प्रशासन से इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई। लोगों के विरोध के बाद जनप्रतिनिधि सदन में पानी के दामों को बदलने का प्रस्ताव फिर ले आए, सदन ने इसे पास भी कर दिया, लेकिन तत्कालीन आयुक्त ने इस पर अपनी आपत्ति लगा दी। मामला अधर में लटकता देख जनप्रतिनिधि तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मिलने पहुंचे। प्रशासक ने एक अप्रैल 2022 तक पुराने दामों को लागू रखने के आदेश जारी कर दिए। इस बार चुनाव में पानी पर काफी घमासान हुआ था, अब दाम बढ़े तो जनप्रतिनिधियों को जनता को जबाव देना मुश्किल हो जाएगा।
कोट-
सभी जनप्रतिनिधियों के सुझाव लिए हैं। उन्हें बताया है कि पहले ही निगम को पेयजलापूर्ति में 90 करोड़ का नुकसान हो रहा है। दाम नहीं बढ़ेंगे तो समस्या होगी। निगम का काम लोगों को सेवा देना है, इसके बदले शुल्क लिया जाता है। जो सुझाव मिले हैं, उन्हें प्रशासक के पास भेज देंगे।
-धर्मपाल, सलाहकार यूटी प्रशासक