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Highcourt: अंग प्रत्यारोपण के लिए पांच साल तक की वेटिंग, केंद्र सरकार और पीजीआई को नोटिस
Fri, 04 Oct 2024 02:26 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 04 Oct 2024 02:26 PM IST
सार
पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग का ऑपरेशन थिएटर अगस्त 2021 से बंद पड़ा है, ऐसे में अंगदान करने वालों की मौजूदगी होने के बावजूद लोगों को प्रत्यारोपण न होने के कारण जान गंवानी पड़ रही है। हाईकोर्ट ने इस जानकारी पर हैरानी जताई।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में सही नीति के अभाव में अंग प्रत्यारोपण की वेटिंग अवधि करीब 5 साल है और 90 प्रतिशत लोग अंगों के इंतजार में दम तोड़ देते हैं।
पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग का ऑपरेशन थिएटर अगस्त 2021 से बंद पड़ा है, ऐसे में अंगदान करने वालों की मौजूदगी होने के बावजूद लोगों को प्रत्यारोपण न होने के कारण जान गंवानी पड़ रही है। इस जानकारी पर हैरानी जताते हुए हाईकोर्ट ने भारत सरकार और पीजीआई के निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
एडवोकेट रंजन लखनपाल ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि देश में पहला अंग प्रत्यारोपण 1970 में हुआ था और 1994 में मानव अंग प्रत्यारोपण एक्ट को लागू किया गया। बाद में इसे बदल कर ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एंड टिशु एक्ट बनाया गया। याची ने बताया कि इस समय करीब 2 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें किडनी की जरूरत है। एक दानकर्ता 9 लोगों का जीवन बचा सकता है, लेकिन सही नीति नहीं होने से अंगों का इंतजार करने वाले 90 प्रतिशत लोग वेटिंग लिस्ट में ही मर जाते हैं।
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मृतक व्यक्ति से आंखें, किडनी, फेफड़े, दिल, लीवर व स्किन ली जा सकती है। याची ने बताया कि हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में अंग प्रत्यारोपण के लिए 5 साल तक की वेटिंग है। चेन्नई में वहां के नीतिगत निर्णय के कारण अंग प्रत्यारोपण की वेटिंग केवल 3 माह की है। वहां पर निजी व सरकारी अस्पतालों ने ब्रेन डेड की एक सूची तैयार की है। अंग की जरूरत की स्थिति में इनकी उपलब्धता करवा दी जाती है। 37 अस्पतालों का एक नेटवर्क तैयार किया गया है। 2012 में पूरे देश में हुए अंगप्रत्यारोपण के मामलों में से आधे तमिलनाडु में हुए थे।
याची ने बताया कि इस क्षेत्र में पीजीआई बड़ा संस्थान है और यहां पर स्टाफ मौजूद होने के बावजूद प्रत्यारोपण नहीं हो पा रहा है। पीजीआई पर हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान, हिमाचल और जम्मू तक के लोग निर्भर हैं।
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पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग का ऑपरेशन थिएटर अगस्त 2021 से बंद पड़ा है, ऐसे में अंगदान करने वालों की मौजूदगी होने के बावजूद लोगों को प्रत्यारोपण न होने के कारण जान गंवानी पड़ रही है। इस जानकारी पर हैरानी जताते हुए हाईकोर्ट ने भारत सरकार और पीजीआई के निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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एडवोकेट रंजन लखनपाल ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि देश में पहला अंग प्रत्यारोपण 1970 में हुआ था और 1994 में मानव अंग प्रत्यारोपण एक्ट को लागू किया गया। बाद में इसे बदल कर ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एंड टिशु एक्ट बनाया गया। याची ने बताया कि इस समय करीब 2 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें किडनी की जरूरत है। एक दानकर्ता 9 लोगों का जीवन बचा सकता है, लेकिन सही नीति नहीं होने से अंगों का इंतजार करने वाले 90 प्रतिशत लोग वेटिंग लिस्ट में ही मर जाते हैं।
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मृतक व्यक्ति से आंखें, किडनी, फेफड़े, दिल, लीवर व स्किन ली जा सकती है। याची ने बताया कि हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में अंग प्रत्यारोपण के लिए 5 साल तक की वेटिंग है। चेन्नई में वहां के नीतिगत निर्णय के कारण अंग प्रत्यारोपण की वेटिंग केवल 3 माह की है। वहां पर निजी व सरकारी अस्पतालों ने ब्रेन डेड की एक सूची तैयार की है। अंग की जरूरत की स्थिति में इनकी उपलब्धता करवा दी जाती है। 37 अस्पतालों का एक नेटवर्क तैयार किया गया है। 2012 में पूरे देश में हुए अंगप्रत्यारोपण के मामलों में से आधे तमिलनाडु में हुए थे।
याची ने बताया कि इस क्षेत्र में पीजीआई बड़ा संस्थान है और यहां पर स्टाफ मौजूद होने के बावजूद प्रत्यारोपण नहीं हो पा रहा है। पीजीआई पर हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान, हिमाचल और जम्मू तक के लोग निर्भर हैं।