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चंडीगढ़ में जैन मुनि से मिले संगीतकार विशाल डडलानी, मुनि बोले माफ किया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 21 Sep 2016 10:49 PM IST
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विशाल डडलानी बुधवार सुबह सेक्टर-27 स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे
बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार विशाल डडलानी ने विवादित टिप्पणी के लिए बुधवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-27 स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर पहुंचकर जैन मुनि तरुण सागर से पंचमाफी मांगी। डडलानी ने जैन मुनि से कहा कि उन्हें ऐसी टिप्पणी करने पर बेहद दुख और खेद है, वह ऐसी भूल फिर कभी नहीं करेंगे।
जैन मुनि ने जैन समाज के लोगों से कहा कि वे डडलानी के खिलाफ की गई एफआईआर वापस ले लें और विशाल डडलानी के खिलाफ चल रहे विवाद को समाप्त करें। उन्होंने विशाल डडलानी को अपने प्रवचनों की किताबें भी दीं।
यह है पंचमाफी
पंचमाफी में हाथ जोड़ना, सिर झुकाना, दिल पर हाथ रखना, कान पकड़ना और किसी भी धर्म पर कोई गलत टिप्पणी न करने का प्रण लेना आता है।
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जैन मुनि ने जैन समाज के लोगों से कहा कि वे डडलानी के खिलाफ की गई एफआईआर वापस ले लें और विशाल डडलानी के खिलाफ चल रहे विवाद को समाप्त करें। उन्होंने विशाल डडलानी को अपने प्रवचनों की किताबें भी दीं।
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यह है पंचमाफी
पंचमाफी में हाथ जोड़ना, सिर झुकाना, दिल पर हाथ रखना, कान पकड़ना और किसी भी धर्म पर कोई गलत टिप्पणी न करने का प्रण लेना आता है।
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आत्मा की आवाज यहां ले आई
vishal dadlani
जैन मुनि तरुण सागर ने कहा कि उन्होंने तो विशाल डडलानी को पहले ही माफ कर दिया था, लेकिन उनके संस्कारों व उनकी आत्मा की आवाज ने ही उन्हें खुद यहां चलकर आने और पंचमाफी मांगने को मजबूर किया। वहीं विशाल डडलानी ने कहा कि वह किसी के कहने पर माफी मांगने नहीं आए हैं, बल्कि खुद अपने दिल की आवाज पर प्रायश्चित करने व महाराज के दर्शन करने चंडीगढ़ आए हैं।
ऐसे संत बहुत कम होते हैं
विशाल डडलानी ने कहा कि यहां आने से पहले उन्होंने जैन मुनि के प्रवचनों को ध्यान से देखा व सुना है। यहां आकर उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई व उन्होंने महसूस किया है कि तरुण सागर सच्चे अर्थों में संत हैं। ऐसे संत बहुत कम होते हैं यहीं आकर उन्हें आत्म संतुष्टि प्राप्त हुई है। विशाल डडलानी ने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम के दौरान उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने दोबारा जैन मुनि के पास आने की इच्छा भी जाहिर की।
ऐसे संत बहुत कम होते हैं
विशाल डडलानी ने कहा कि यहां आने से पहले उन्होंने जैन मुनि के प्रवचनों को ध्यान से देखा व सुना है। यहां आकर उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई व उन्होंने महसूस किया है कि तरुण सागर सच्चे अर्थों में संत हैं। ऐसे संत बहुत कम होते हैं यहीं आकर उन्हें आत्म संतुष्टि प्राप्त हुई है। विशाल डडलानी ने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम के दौरान उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने दोबारा जैन मुनि के पास आने की इच्छा भी जाहिर की।