{"_id":"2bb21fdeb11c82e9b6859a2ef250091e","slug":"vip-car-in-no-traffic-zone-challan-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अरे! नो ट्रैफिक जोन में VIP एक्सप्रेस आ गई ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अरे! नो ट्रैफिक जोन में VIP एक्सप्रेस आ गई
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 04 Mar 2015 02:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वीआइपी कल्चर की चर्चा जोरों पर है। कभी रेलवे स्टेशन पर वीआईपी यात्रियों के लिए अलग से ड्रॉपिंग लेन बना दी जाती है तो कभी एयरपोर्ट पर। मंगलवार दोपहर को ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने अपनी लाल बत्ती वाली फॉर्च्यूनर गाड़ी प्लाजा के अंदर नो पार्किंग जोन में खड़ी कर दी।
विज्ञापन
बिट्टा की गाड़ी सेक्टर-17 में बने शोरूम के ठीक सामने खड़ी थी। यहां पर गाड़ी लाना मना है। इस जगह पर लोग पैदल टहलकर शापिंग करते हैं। इस बीच एक आम आदमी पार्टी के वालंटियर गुर जसजीत सिंह ने अपने आइपैड से फॉर्च्यूनर की फोटो क्लिक कर चंडीगढ़ के ट्रैफिक पुलिस के फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर दी।
विज्ञापन
इसमें गाड़ी का नंबर पीबी65 पी 5590 भी अपलोड कर दिया गया। करीब आधे धंटे बाद ट्रैफिक पुलिस का गुर जसजीत सिंह के पास मैसेज आता है। उनसे उनका एड्रेस और पिक्चर का रियल टाइम पूछकर जिसकी गाड़ी होती है उसके नाम से चालान इशू कर दिया जाता है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि गाड़ी नो पार्किंग जोन में खड़ी थी। इसलिए उसका चालान इशू कर दिया गया है।
विज्ञापन
क्या कहना है बिट्टा का है: बिट्टा का कहना है कि मुझे नो पार्किंग जोन के बारे में पता नहीं था। मेरे साथ सिर्फ मेरे सुरक्षाकर्मी थे। सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षाकर्मी मेरी गाड़ी आगे लेकर गए थे। अगर मुझे पता होता तो गाड़ी आगे लेकर नहीं जाता है। अब अगर पुलिस कहेगी भी तो मैं अपनी गाड़ी आगे लेकर नहीं जाऊंगा। हालांकि मुझे चालान कटने की जानकारी नहीं है।
कौन है बिट्टा
मनजिंदर सिंह बिट्टा आतंकवादी विरोधी मोर्चे के चेयरमैन हैं। 90 के दशक में वे यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष थे। जब वे अध्यक्ष थे तो उस दौरान पंजाब में आतंकवाद चरम पर थे। सात जुलाई, 1992 में अमृतसर में एक बम धमाके में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया था। इस धमाके में 13 लोग भी मारे गए थे। इसके बाद 11 सितंबर 1993 को नई दिल्ली स्थित रायसीना रोड यूथ कांग्रेस के भवन में दोबारा उन पर हमला किया गया।
इस हमले में भी वे बाल-बाल बच गए। हादसे में उनके दो बॉडीगार्ड भी शहीद हुए थे। जांच में पता चला कि हमले को देविंदर पाल सिंह भुल्लर ने अंजाम दिया था। आतंकवादियों के हमले को देखते हुए उन्हें सरकार की ओर से सुरक्षा दी गई है।
आम आदमी के नाते दी शिकायत
शिकायतकर्ता व आप के कार्यकर्ता गुर जसजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने एक आम आदमी की हैसियत से ट्रैफिक पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत पर ट्रैफिक पुलिस ने तुरंत गौर किया और उस पर कार्रवाई भी हुई है। अगर वीआईपी लोग ऐसे ही दबादबा बनाते रहे तो आम आदमी के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह नहीं जानते हैं कि यह किसी गाड़ी थी।