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हरियाणा: कार्तिकेय को जिताकर भाजपा ने चित किए अनेक विरोधी, ब्राह्मण समुदाय को बड़ा संदेश

Sun, 12 Jun 2022 02:02 AM IST
भूपेंद्र सिंह यशपाल शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 12 Jun 2022 02:02 AM IST
सार

हरियाणा में ब्राह्मण समुदाय को बड़ा संदेश दिया है। अरविंद शर्मा के मुकाबले विनोद शर्मा का मजबूत विकल्प तैयार किया जा सकता है। भाजपा ने भूपेंद्र हुड्डा को उनके पुराने मित्र के जरिये मात दे डाली।

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Victory of Karthikeya defeats many political opponents of BJP in Haryana
कार्तिकेय शर्मा और कृष्ण लाल पंवार के साथ सीएम मनोहर लाल। - फोटो : करुण शर्मा

विस्तार

हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में हुए बड़े सियासी उलटफेर के अनेक मायने हैं। निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा को जिताकर भाजपा ने एक तीर से कई राजनीतिक विरोधियों को चित किया है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उनके पूर्व में घनिष्ठ मित्र रहे विनोद शर्मा के जरिये ही मात दे डाली। कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन की जीत-हार से हुड्डा की सीधी प्रतिष्ठा जुड़ी हुई थी।

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माकन के हारने के बाद हुड्डा विरोधी पार्टी में उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेंगे। विरोधी खेमा दिल्ली दरबार में भी माकन की हार का ठीकरा हुड्डा पर फोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। हुड्डा की घेराबंदी करने में उनके विरोधी पीछे रहने वाले नहीं हैं। कार्तिकेय शर्मा की जीत से भाजपा ने ब्राह्मण समुदाय को भी बड़ा संदेश दिया है।
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पार्टी नेतृत्व ने यह बताने की कोशिश की है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा ब्राह्मण नेता के तौर पर मजबूत विकल्प मौजूद हैं। जीटी रोड बेल्ट के साथ ही विनोद की प्रदेश के अन्य हिस्सों में खासीपकड़ है। पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा उनके समधी हैं और कांग्रेस के कई नेताओं के साथ प्रदेश में उनके करीबी रिश्ते हैं। इसे देखते हुए भाजपा 2024 के विधानसभा चुनाव में उनके राजनीतिक अनुभव का लाभ लेना चाहेगी।  
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रोहतक से सांसद अरविंद शर्मा बीते कुछ समय से मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुए थे। उनके बागी तेवरों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व बीते दिनों कुछ असहज दिखा, लेकिन राज्यसभा चुनाव में सधी हुई चाल चलकर अरविंद को चारों खाने चित कर दिया।

भाजपा विनोद शर्मा के जरिये कांग्रेस के दमदार ब्राह्मण नेताओं में भी सेंध लगाने की फिराक में है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कार्तिकेय को जिताने के लिए खुद मोर्चा संभाला था। उन्होंने जजपा, निर्दलीय विधायकों और पार्टी नेताओं के साथ मिलकर पूरी बिसात बिछाई।

कांग्रेस का एक वोट रदद होते ही पलट गई बाजी
 कांग्रेस के 31 विधायकों में से 30 के वोट भी माकन को मिलते तो वह जीत जाते, लेकिन उसमें से भी एक वोट रदद हो गया। मतों की पुनर्गणना में जैसे ही कांग्रेस 29 से आगे नहीं बढ़ पाई, वैसे ही कार्तिकेय और उनके समर्थकों की बांछें खिल गईं। जिस कांग्रेस विधायक का वोट रदद हुआ है, उसे पहली प्राथमिकता भरने के साथ पेन से लंबी लकीर खींच दी थी। इससे वोट रदद हो गया।


एक वोट रदद होते ही कांग्रेस दिग्गजों राजीव शुक्ला, विवेक बंसल, बीबी बत्रा, अशोक अरोड़ा व आफताब अहमद ने माथा पकड़ लिया। ये नेता समझ ही नहीं पाए कि जीत अचानक हार में कैसे बदल गई। तुरंत इसकी सूचना पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा को दी गई। ये दोनों नेता भी हतप्रभ रह गए और कुछ देर के लिए दोनों नेताओं को भी हार विश्वास नहीं हुआ।

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