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वेरका ने बूथ अनुबंध में किया दगा, पीयू को खबर तक नहीं लगने दी
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की जांच में वेरका कटघरे में आ गया है। पीयू के साथ अनुबंध हुआ था तो ठेकेदारी प्रथा से बूथ कैसे संचालित किया गया। इस पर पीयू के अधिकारी सख्त हो गए हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि लीज डीड में किसके नाम सामने आए हैं। वेरका ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है या किसी ठेकेदार को दिया है। वह अभिलेख पीयू ढूंढ रहा है। पीयू ने यह संदेश दे दिया है कि यहां वेरका को अपना कर्मचारी अनुबंध के मुताबिक तैनात करना होगा या फिर यहां बूथ नहीं रहेगा।
सूत्रों का कहना है कि पीयू की जांच में यह निकलकर आया है कि वेरका ने पीयू के साथ जो अनुबंध किया था, उस पर वेरका खरा नहीं उतरा। खुद के कर्मचारियों की ओर से संचालन करवाने की बजाय इसे ठेकेदार को दे दिया। जानकारों का कहना है कि इसका टेंडर होना चाहिए था, लेकिन बूथ के लिए टेंडर नहीं हुआ। पीयू अब इस बिंदु पर जांच कर रहा है ताकि समुचित कार्रवाई की जा सके। वेरका के अधिकारी इस प्रकरण को दबाने में लगे हुए हैं।
इस बारे में वेरका के चंडीगढ़ के डिप्टी मैनेजर सिमर गिल कहते हैं कि यह प्रकरण मोहाली के अंतर्गत आता है। वहीं मोहाली के अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो वह रिसीव नहीं कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पीयू अब कार्रवाई पूरी करेगा।
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सूत्रों का कहना है कि पीयू की जांच में यह निकलकर आया है कि वेरका ने पीयू के साथ जो अनुबंध किया था, उस पर वेरका खरा नहीं उतरा। खुद के कर्मचारियों की ओर से संचालन करवाने की बजाय इसे ठेकेदार को दे दिया। जानकारों का कहना है कि इसका टेंडर होना चाहिए था, लेकिन बूथ के लिए टेंडर नहीं हुआ। पीयू अब इस बिंदु पर जांच कर रहा है ताकि समुचित कार्रवाई की जा सके। वेरका के अधिकारी इस प्रकरण को दबाने में लगे हुए हैं।
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इस बारे में वेरका के चंडीगढ़ के डिप्टी मैनेजर सिमर गिल कहते हैं कि यह प्रकरण मोहाली के अंतर्गत आता है। वहीं मोहाली के अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो वह रिसीव नहीं कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पीयू अब कार्रवाई पूरी करेगा।
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