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ट्रैफिक अर्बन प्लानिंग पर खर्च होंगे एक सौ करोड़ रुपये
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चंडीगढ़। ट्राइसिटी में ट्रैफिक अर्बन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी प्लानिंग पर एक सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां ट्रैफिक कंजेशन कम करने के साथ ही वाहनों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए साल 2016 में हुए एग्रीमेंट के अनुसार चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार मिलकर 25-25 करोड़ खर्च करेंगे। इस संदर्भ में एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि मीटिंग में ट्राइसिटी के ट्रैफिक को लेकर कई मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ। इसमें रिंग रोड और इलेक्ट्रिक बसों के चलाने पर आगामी तीन सितंबर को होने वाली तीनों प्रदेशों की मीटिंग में सहमति बनने की उम्मीद है। इसके साथ ही ट्राइसिटी को नई पहचान देने के लिए ग्रेटर चंडीगढ़ के रूप में विकसित किए जाने की योजना पर काम तेजी से चल रहा है।
शुक्रवार को सेक्टर 9 स्थित यूटी सचिवालय के सभागार में ट्राइसिटी ट्रांसपोर्ट प्लानिंग को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन, हरियाणा और पंजाब के अफसरों की एक उच्चस्तरीय मीटिंग हुई, जिसमें रिंग रोड, मोनो व मेट्रो के मुद्दे पर भी चर्चा हुई है। इसके अलावा मीटिंग में ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के विकल्प तलाशे गए। अब तीन सितंबर को होने वाली बैठक में इन मुद्दों पर हरियाणा और पंजाब अपनी अपनी राय देंगे। इसके बाद यह तय होगा कि ट्राइसिटी अर्बन प्लानिंग कनेक्टविटी के लिए क्या बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वहीं, एडवाइजर का कहना है कि मीटिंग में ट्रैफिक के कई मुद्दों पर एक दूसरे से चर्चा हुई है। अब आगामी मीटिंग तीन सितंबर को होनी है, जिसमें सभी अपनी अपनी राय देंगे। उनका कहना है कि रिंग रोड और इलेक्ट्रिक बसों को ट्राइसिटी में चलाने पर बात बन सकती है।
मोनो या फिर मेट्रो पर ली गई राय
चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में लोगों को कई जगहों पर ट्रैफिक की बढ़ती समस्या से लगातार जूझना पड़ रहा है। ट्राइसिटी में सिटी में कार पूलिंग से लेकर ट्रैफिक घटाए जाने के अन्य विकल्प भी बैठक में उठाए गए। मेट्रो और मोनो रेल को लेकर बैठक में व्यापक चर्चा हुई। इस पर पंजाब और हरियाणा से आए अफसरों ने भी अपना-अपना पक्ष रखा। बैठक में उनसे भी पूछा जाएगा कि मेट्रो के विकल्प को अगर चुना जाता है तो क्या दोनों राज्य हिस्सेदारी देने को तैयार हैं। तीन सितंबर को होने वाली तीनों प्रदेशों की उच्चस्तरीय मीटिंग में कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।
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इन योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा
ट्राइसिटी शहरी योजना और परिवहन, मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम, राज्यों के साथ समझौता और समग्र योजना के तहत बस सिस्टम, पब्लिक बाइक शेयरिंग (पीबीएस) और ई-रिक्शा के बीच क्षेत्रीय गतिशीलता योजना का मुख्य फोकस मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम था। एमआरटीएस की योजना को अंतिम रूप देने पर जोर दिया गया। ट्राइसिटी में निर्बाध कनेक्टविटी के लिए चंडीगढ़ प्रशासन पीआर-4, पीआर-5 सड़कों पर काम कर रहा है।
शहर में लगातार बढ़ रही ट्रैफिक समस्या
बताते चलें कि ट्राइसिटी में ट्रैफिक की ऐसी समस्या उभर कर सामने आ रही है, जिसका प्रशासन को अभी तक कोई हल नहीं मिल रहा। लगातार बढ़ रही आबादी और व्हीकलों की संख्या के चलते शहर के प्रमुख स्थानों व चौराहों पर जाम लगने से पब्लिक लगातार जूझ रही है। ट्राइसिटी में ट्रैफिक समस्या से निजात के लिए चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार को 25-25 करोड़ मिलाकर कुल एक सौ करोड़ रुपये खर्च करने हैं। इसकी रूपरेखा साल 2016 में तैयार की गई थी। इसे लेकर भी मीटिंग में चर्चा हुई, जिसमें कहा गया कि सभी अपनी-अपनी हिस्सेदारी को सुनिश्चित करें, जिससे प्लानिंग को विस्तार दिया जा सके।
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शुक्रवार को सेक्टर 9 स्थित यूटी सचिवालय के सभागार में ट्राइसिटी ट्रांसपोर्ट प्लानिंग को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन, हरियाणा और पंजाब के अफसरों की एक उच्चस्तरीय मीटिंग हुई, जिसमें रिंग रोड, मोनो व मेट्रो के मुद्दे पर भी चर्चा हुई है। इसके अलावा मीटिंग में ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के विकल्प तलाशे गए। अब तीन सितंबर को होने वाली बैठक में इन मुद्दों पर हरियाणा और पंजाब अपनी अपनी राय देंगे। इसके बाद यह तय होगा कि ट्राइसिटी अर्बन प्लानिंग कनेक्टविटी के लिए क्या बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वहीं, एडवाइजर का कहना है कि मीटिंग में ट्रैफिक के कई मुद्दों पर एक दूसरे से चर्चा हुई है। अब आगामी मीटिंग तीन सितंबर को होनी है, जिसमें सभी अपनी अपनी राय देंगे। उनका कहना है कि रिंग रोड और इलेक्ट्रिक बसों को ट्राइसिटी में चलाने पर बात बन सकती है।
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मोनो या फिर मेट्रो पर ली गई राय
चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में लोगों को कई जगहों पर ट्रैफिक की बढ़ती समस्या से लगातार जूझना पड़ रहा है। ट्राइसिटी में सिटी में कार पूलिंग से लेकर ट्रैफिक घटाए जाने के अन्य विकल्प भी बैठक में उठाए गए। मेट्रो और मोनो रेल को लेकर बैठक में व्यापक चर्चा हुई। इस पर पंजाब और हरियाणा से आए अफसरों ने भी अपना-अपना पक्ष रखा। बैठक में उनसे भी पूछा जाएगा कि मेट्रो के विकल्प को अगर चुना जाता है तो क्या दोनों राज्य हिस्सेदारी देने को तैयार हैं। तीन सितंबर को होने वाली तीनों प्रदेशों की उच्चस्तरीय मीटिंग में कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।
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इन योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा
ट्राइसिटी शहरी योजना और परिवहन, मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम, राज्यों के साथ समझौता और समग्र योजना के तहत बस सिस्टम, पब्लिक बाइक शेयरिंग (पीबीएस) और ई-रिक्शा के बीच क्षेत्रीय गतिशीलता योजना का मुख्य फोकस मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम था। एमआरटीएस की योजना को अंतिम रूप देने पर जोर दिया गया। ट्राइसिटी में निर्बाध कनेक्टविटी के लिए चंडीगढ़ प्रशासन पीआर-4, पीआर-5 सड़कों पर काम कर रहा है।
शहर में लगातार बढ़ रही ट्रैफिक समस्या
बताते चलें कि ट्राइसिटी में ट्रैफिक की ऐसी समस्या उभर कर सामने आ रही है, जिसका प्रशासन को अभी तक कोई हल नहीं मिल रहा। लगातार बढ़ रही आबादी और व्हीकलों की संख्या के चलते शहर के प्रमुख स्थानों व चौराहों पर जाम लगने से पब्लिक लगातार जूझ रही है। ट्राइसिटी में ट्रैफिक समस्या से निजात के लिए चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार को 25-25 करोड़ मिलाकर कुल एक सौ करोड़ रुपये खर्च करने हैं। इसकी रूपरेखा साल 2016 में तैयार की गई थी। इसे लेकर भी मीटिंग में चर्चा हुई, जिसमें कहा गया कि सभी अपनी-अपनी हिस्सेदारी को सुनिश्चित करें, जिससे प्लानिंग को विस्तार दिया जा सके।