Chandigarh: निगम सदन की बैठक में हंगामा, जलभराव का मुद्दा भी उठा, आप ने कहा- सड़कें बन गईं तालाब, अब नाव ही चलवा दें
जलभराव का वीडियो दिखाते हुए आप पार्षदों ने कहा कि शहरवासियों को एक-एक नाव दे देनी चाहिए ताकि वह अपने जरूरी काम कर सकें। इसके बाद आप पार्षदों ने सांसद के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
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यह एक स्मार्ट सिटी है, कम से कम शहरवासियों के लिए नाव ही चलवा दें। मानसून की पहली बारिश में शहर में हुए जलभराव पर यह तंज आम आदमी पार्टी की पार्षद प्रेमलता ने गुरुवार को सदन की बैठक कसा। सदन में शहर की सड़कों के तालाब बनने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने दो टूक कहा कि जब मानसून आने की जानकारी पहले से ही थी तो निगम ने तैयारियां क्यों नहीं कीं?
नगर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि शहर के पाइप लाइनों से पानी की निकासी की क्षमता 15 मिलीमिटर की है जबकि बारिश 80 मिलीमिटर तक हो गई। दूसरी ओर चो भी ऊपर तक भरी हैं। पानी की निकासी वाले पाइप चो में डूबे हैं। पानी का स्तर कम होते ही सड़कों पर भरा पानी निकल जाएगा। पार्षद प्रेमलता ने कहा कि मेरे यहां के हालात देखें, घरों के बाहर निकलना मुश्किल है। इस पर एसई विजय प्रेमी ने कहा कि शाम तक पानी निकल जाएगा। प्रेमलता ने कहा कि शाम को मेरे वार्ड में निरीक्षण करने आइए मैं आपको दिखा दूंगी पानी कितना भरा हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष योगेश ढींगरा ने कहा कि मेरे यहां की स्थिति भी बहुत खराब है। कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह ने कहा कि बुड़ैल में कई दिनों से पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है। सड़क को ऐसे ही छोड़ दिया गया है। वहां आज पानी भर गया और लोग इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। इस अव्यवस्था में उनका क्या दोष है और मैं उन्हें क्या जवाब दूं। इस दौरान अन्य पार्षदों ने भी जलभराव का मुद्दा उठाया।
अमृत योजना के 180 करोड़ में 60 करोड़ रुपये इसी कार्य के लिए
पार्षदों का हंगामा बढ़ता देख आयुक्त ने बताया कि शहर में डाली गईं पाइपलाइनें काफी पुरानी हैं। अमृत योजना के अंतर्गत शहर को मिलने वाले 180 करोड़ रुपये में से 60 करोड़ रुपये सिर्फ स्टॉर्म वाटर लाइन के लिए ही रखे गए हैं। हर साल बारिश में शहर में पानी निकासी की समस्या होती है इसलिए इस समस्या के समाधान की योजना बना ली है।
शहर में सांसद मिलती हैं न विकास कार्य: प्रेमलता
आप पार्षद प्रेमलता ने बैठक की शुरुआत में भाजपा को घेरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले सात सालों में भाजपा ने जो विकास किया आज सामने आ गया है। सांसद किरण खेर लोगों से मिलती नहीं हैं। वह पूरे कोरोना काल में शहर छोड़कर मुंबई में बैठी रहीं। जनप्रतिनिधियों से बोलने का भी उन्हें तरीका नहीं है। आप पार्षदों के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया गया, उसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
जलभराव का वीडियो दिखाते हुए आप पार्षदों ने कहा कि शहरवासियों को एक-एक नाव दे देनी चाहिए ताकि वह अपने जरूरी काम कर सकें। इसके बाद आप पार्षदों ने सांसद के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपा पार्षद महेश इंदर सिंह सिद्धू ने भी दिल्ली का एक वीडियो दिखाकर वहां के हालात के बारे में आप पार्षदों को बताया। प्रेमलता ने सदन में कागज की नाव दिखाते हुए कहा कि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी है कम से कम नाव ही चलवा दीजिए।
वार्ड 14 में 55 बेड का अस्पताल बनाने के प्रस्ताव पर हंगामा
सदन की बैठक में 55 बेड के अस्पताल को लेकर भी खूब हंगामा हुआ। आम आदमी पार्टी के पार्षद रामचंद्र यादव ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव ने सभी के सामने स्पष्ट रूप से कहा था कि अस्पताल वार्ड 15 में बनेगा जबकि प्रस्ताव वार्ड 14 का आया है। इस पर भाजपा पार्षदों ने कहा कि नए स्थान पर अस्पताल बनने से काफी लोगों को राहत मिलेगी और सड़क किनारे होने से लोग आसानी से आ जा सकेंगे। इसके बाद एजेंडा के पक्ष और विरोध में वोटिंग हुई।
भाजपा के 14 पार्षदों ने इसका समर्थन किया लेकिन आप पार्षद पुरानी जगह और नई जगह अस्पताल बनाने के प्रस्ताव पर अड़ गए। बाद में एजेंडे को खारिज कर दिया गया। आप पार्षदों ने कहा कि भाजपा हमारे साथ धक्का कर रही है। सदन में लाए गए टेबल एजेंडा के अनुसार वार्ड नंबर 14 में सिटको पेट्रोल पंप और सामुदायिक केंद्र के बीच मुख्य सड़क पर अस्पताल बनाने का सुझाव प्रशासन को देने के लिए कहा गया।
भाजपा का तर्क था कि इससे डड्डूमाजरा, पुलिस कांप्लेक्स, धनास, मिल्क कॉलोनी, अमन चमन कॉलोनी, आंबेडकर कॉलोनी, सारंगपुर और 8400 ईडब्ल्यूएस कॉलोनी के लोगों को इससे फायदा मिलेगा। 40 साल पहले यह जगह गोशाला के लिए प्रशासन ने चिह्नित की थी। अब मिल्क कॉलोनी आवासीय कॉलोनी में परिवर्तित हो गई है इसलिए यह गोशाला बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है।
आप पार्षद ने कहा कि जो प्रशासक के सलाहकार के साथ हुई बैठक में जो तय हुआ था, उसी पर अमल होना चाहिए। कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत गाबी ने कहा कि वर्ष 2014 में तत्कालीन मेयर पूनम शर्मा के समय यह प्रस्ताव पास हुआ था। उस समय क्या तय हुआ था और दोनों जगह बनने से क्या फायदा व नुकसान होगा, इसकी समीक्षा करने के लिए एक कमेटी गठित करनी चाहिए।
मेयर पर बना दबाव, ज्यादा पार्षद होने के बावजूद नहीं कराई वोटिंग
काफी हंगामे के बाद मेयर सरबजीत कौर ने कहा कि जो इस एजेंडे को रद्द करना चाहते हैं हाथ उठाएं। 13 भाजपा पार्षदों ने हाथ उठा दिए। अब आप को लगा कि कांग्रेस का समर्थन मिला तो यह प्रस्ताव उनके पक्ष में आ जाएगा, इसलिए उन्होंने कहा कि पुरानी जगह पर अस्पताल बनाने के लिए वोटिंग कराई जाए। इस पर मेयर तैयार नहीं थीं।
पार्षदों के दबाव के बाद सेक्रेटरी ने नियम भी पढ़कर बता दिए,उसके हिसाब से भी बहुमत ज्यादा हो तो पार्षदों के अनुसार एजेंडा पर मत लेना चाहिए, लेकिन मेयर पर इतना दबाव बन गया कि उन्होंने एजेंडा के पक्ष और विपक्ष पर ही वोटिंग करने को कहा। पुरानी जगह और नई जगह पर अस्पताल बनाने के प्रस्ताव पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया।