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Chandigarh News: 227.70 करोड़ की पाइपलाइन परियोजना पर यू-टर्न, अब अगली निगम सदन बैठक में होगी खुली बहस
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चंडीगढ़। 31 जुलाई की नगर निगम सदन बैठक में बिना चर्चा के पारित किए गए 227.70 करोड़ रुपये के कजौली फेज-3 पाइपलाइन परियोजना के एजेंडे पर आखिरकार नगर निगम प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े। अब यह प्रस्ताव अगली निगम सदन बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद ही रखा जाएगा। मेयर सौरभ जोशी ने नगर निगम आयुक्त अमित कुमार को पत्र लिखकर एजेंडा दोबारा सदन में लाने और पूरी पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह निर्णय भाजपा के छह पार्षदों और सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में लगातार उठाए गए विरोध के बाद लिया गया। यदि प्रशासन प्रस्ताव वापस लेने पर सहमत नहीं होता तो भाजपा पार्षद बुधवार को निगम कार्यालय के बाहर धरना देने की तैयारी कर चुके थे।
मेयर ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों का विरोध नहीं है लेकिन जनता के करोड़ों रुपये से जुड़ी परियोजनाओं को पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ सदन में रखा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि 227.70 करोड़ रुपये की परियोजना की लागत एजेंडे के विषय (सब्जेक्ट) में क्यों नहीं लिखी गई, जबकि इतनी बड़ी वित्तीय जानकारी विवरण के भीतर छिपाकर दी गई थी। उन्होंने एजेंडा को दोबारा तैयार कर अगली बैठक में रखने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग भी की।
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उधर, पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की ओर से भी मामले में जवाब मांगे जाने के बाद निगम आयुक्त अमित कुमार ने चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा के साथ बैठक कर पूरे प्रकरण की समीक्षा की।
27 किलोमीटर पाइपलाइन बदलने की है परियोजना
227.70 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक करीब 27 किलोमीटर लंबी पीएससी पाइपलाइन को एमएस पाइपलाइन से बदला जाना है। इसके साथ ही जलापूर्ति क्षमता 20 एमजीडी से बढ़ाकर 40 एमजीडी करने की योजना है।
कोरम पूरा कराने बुलाए गए विपक्षी पार्षद
31 जुलाई की बैठक में चार नियमित एजेंडों के बाद 16 टेबल एजेंडों को एंटीसिपेटेड अप्रूवल के तहत बिना चर्चा पारित किया गया था। इनमें 227.70 करोड़ रुपये की परियोजना भी शामिल थी। बैठक के दौरान कोरम कम होने पर कांग्रेस पार्षद जसबीर सिंह बंटी और गुरप्रीत सिंह गाबी को बुलाया गया। दोनों ने प्रस्ताव के समर्थन में हाथ उठाए। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अन्य पार्षदों ने भी उस समय कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। बाद में मामला मीडिया में आने के बाद दोनों विपक्षी दलों ने विरोध दर्ज कराया।
ई-फाइल में दर्ज हैं सभी मंजूरी के रिकॉर्ड
सूत्रों के अनुसार परियोजना की फाइल पर एक्सईएन अमित शर्मा, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर धर्मेंद्र शर्मा, चीफ इंजीनियर और निगम आयुक्त की मंजूरी दर्ज है। यह पूरी प्रक्रिया ई-फाइल प्रणाली में रिकॉर्ड है, जिसे हटाया नहीं जा सकता।
दो आरएफपी एजेंडे दोबारा नहीं आएंगे
भाजपा पार्षदों ने सेक्टर-25 के ड्राई व मिक्स वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और सात धोबीघाटों में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े आरएफपी एजेंडे भी दोबारा सदन में लाने की मांग की थी, लेकिन मेयर और निगम प्रशासन ने फिलहाल केवल 227.70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना पर ही दोबारा चर्चा कराने पर सहमति दी है।
यह निर्णय भाजपा के छह पार्षदों और सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में लगातार उठाए गए विरोध के बाद लिया गया। यदि प्रशासन प्रस्ताव वापस लेने पर सहमत नहीं होता तो भाजपा पार्षद बुधवार को निगम कार्यालय के बाहर धरना देने की तैयारी कर चुके थे।
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मेयर ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों का विरोध नहीं है लेकिन जनता के करोड़ों रुपये से जुड़ी परियोजनाओं को पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ सदन में रखा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि 227.70 करोड़ रुपये की परियोजना की लागत एजेंडे के विषय (सब्जेक्ट) में क्यों नहीं लिखी गई, जबकि इतनी बड़ी वित्तीय जानकारी विवरण के भीतर छिपाकर दी गई थी। उन्होंने एजेंडा को दोबारा तैयार कर अगली बैठक में रखने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग भी की।
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उधर, पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की ओर से भी मामले में जवाब मांगे जाने के बाद निगम आयुक्त अमित कुमार ने चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा के साथ बैठक कर पूरे प्रकरण की समीक्षा की।
27 किलोमीटर पाइपलाइन बदलने की है परियोजना
227.70 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक करीब 27 किलोमीटर लंबी पीएससी पाइपलाइन को एमएस पाइपलाइन से बदला जाना है। इसके साथ ही जलापूर्ति क्षमता 20 एमजीडी से बढ़ाकर 40 एमजीडी करने की योजना है।
कोरम पूरा कराने बुलाए गए विपक्षी पार्षद
31 जुलाई की बैठक में चार नियमित एजेंडों के बाद 16 टेबल एजेंडों को एंटीसिपेटेड अप्रूवल के तहत बिना चर्चा पारित किया गया था। इनमें 227.70 करोड़ रुपये की परियोजना भी शामिल थी। बैठक के दौरान कोरम कम होने पर कांग्रेस पार्षद जसबीर सिंह बंटी और गुरप्रीत सिंह गाबी को बुलाया गया। दोनों ने प्रस्ताव के समर्थन में हाथ उठाए। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अन्य पार्षदों ने भी उस समय कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। बाद में मामला मीडिया में आने के बाद दोनों विपक्षी दलों ने विरोध दर्ज कराया।
ई-फाइल में दर्ज हैं सभी मंजूरी के रिकॉर्ड
सूत्रों के अनुसार परियोजना की फाइल पर एक्सईएन अमित शर्मा, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर धर्मेंद्र शर्मा, चीफ इंजीनियर और निगम आयुक्त की मंजूरी दर्ज है। यह पूरी प्रक्रिया ई-फाइल प्रणाली में रिकॉर्ड है, जिसे हटाया नहीं जा सकता।
दो आरएफपी एजेंडे दोबारा नहीं आएंगे
भाजपा पार्षदों ने सेक्टर-25 के ड्राई व मिक्स वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और सात धोबीघाटों में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े आरएफपी एजेंडे भी दोबारा सदन में लाने की मांग की थी, लेकिन मेयर और निगम प्रशासन ने फिलहाल केवल 227.70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना पर ही दोबारा चर्चा कराने पर सहमति दी है।