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आपराधिक केस चलाने की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- युवकों के साथ दोनों बहनों ने भी उठाई परेशानी

Fri, 25 Dec 2020 12:08 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Fri, 25 Dec 2020 12:08 AM IST
सार

  • एक बहन ने अदालत में कहा- मामले के ज्यादा तूल पकड़ने का उसे भी खेद 
  • 2017 में कोर्ट ने मामले में आरोपी युवक मोहित, कुलदीप व दीपक को कर दिया था बरी 
  • दिसंबर 2017 में याचिका दायर करके दोनों बहनों के खिलाफ की थी कार्रवाई की मांग 
  • दोनों बहनों के वकील बोले- किसी अदालत नहीं कहा कि दोनों बहनों ने झूठी गवाही दी

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Two sisters gets big relief to Court in Six year old Case
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

2014 में रोहतक से खरखौदा जा रही रोडवेज की बस में कथित छेड़छाड़ व मारपीट के बहुचर्चित मामले में गुरुवार को एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत ने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने यह कहते हुए दोनों बहनों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया कि बरी हुए तीन युवकों मोहित, दीपक व कुलदीप को समाज में परेशानी हुई लेकिन दोनों बहनों को भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। ऐसे में दोनों बहनों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की याचिका खारिज की जाती है।

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किसी अदालत ने नहीं कहा- दोनों बहनों ने दी झूठी गवाही
एडीजे कोर्ट में मामले को लेकर बहस हुई, जिसमें दोनों बहनों के वकील पीयूष गक्खड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में फैसले दे चुके हैं कि इस तरह के मामलों में जब तक अदालत को यह न लगे कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से समाज पर असर पड़ रहा है। तब तक ऐसे मामलों में कार्रवाई से बचना चाहिए। इस केस में तीन आरोपी युवकों को अदालत 2017 में बरी कर चुकी है। दूसरा, अब तक किसी अन्य अदालत ने यह नहीं कहा कि, दोनों बहनों ने झूठी गवाही दी।
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केवल पुलिस द्वारा दाखिल चालान रिपोर्ट व साक्ष्यों के आधार पर तीनों युवकों को बरी किया गया था। तीसरा, आरोपी युवकों के बरी होने के करीब चार साल बाद दोनों बहनों के खिलाफ कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं बनता है। इसके अलावा मामले में एक लड़की ने कोर्ट में पूरे मामले के बढ़ने पर खेद भी व्यक्त किया। 

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यह था मामला 

सोनीपत जिले की दो बहनें रोहतक स्थित महिला कॉलेज की छात्राएं थी। नवंबर 2014 में कॉलेज से घर लौट रही थी। 30 नवंबर को एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दोनों बहनों और कुछ युवकों के बीच सीट को लेकर झगड़ा हुआ। दोनों बहनों ने मामले में तीन युवकों दीपक, कुलदीप व मोहित के खिलाफ छेड़छाड़ व मारपीट का केस दर्ज करवाया। 

तत्कालीन भाजपा सरकार ने दोनों बहनों को सम्मानित करने का निर्णय लिया। मीडिया में भी उनको बहादुर बहनें बताया गया। मामले में नया मोड़ दो दिसंबर को आया, जब दोनों बहनों का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पार्क के अंदर वे झगड़ा करतीं नजर आईं। साथ ही लड़कों के परिजन सीएम से मिले। सरकार ने दोनों बहनों को 26 जनवरी को सम्मानित करने व 31-31 हजार रुपये इनाम की राशि देने की घोषणा पर रोक लगा दी। 

फौज भर्ती होने का आवेदन हो गया था रद्द
मामले में एक आरोपी युवक ने फौज में भर्ती के लिए आवेदन कर रखा था। मामले के तूल पकड़ने पर सेना की ओर से उसका आवेदन रद्द कर दिया गया था। हालांकि लाई डिटेक्टिव टेस्ट रिपोर्ट में आरोप साबित नहीं हो सके। अदालत ने मार्च 2017 में सबूतों के अभाव में तीनों युवकों को बरी कर दिया। इसी बीच दिसंबर 2019 में डॉक्टर सुभाष ने अदालत में याचिका दायर करके दोनों बहनों के खिलाफ झूठे मामले में युवकों को फंसाने पर आपराधिक केस चलाने की मांग की लेकिन निचली अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके खिलाफ उसने एडीजे कोर्ट में अपील की। अब एडीजे कोट में भी उसकी याचिका खारिज हो गई।

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