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Chandigarh News: धोखाधड़ी व जालसाजी के 10 पुराने मामले में निगम के दो कर्मचारी बरी
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चंडीगढ़। नगर निगम में जेई पिता की मौत के बाद मकान से जुड़े करीब सात लाख रुपये के ड्यूज से बचने के लिए दस्तावेजों से छेड़खानी करने के मामले में विजिलेंस की ओर से दर्ज 10 साल पुराने मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई हुई। नगर निगम के दो आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं होने मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया।
इस मामले में जीरकपुर निवासी हरसिमरनजीत सिंह और सेक्टर-20 निवासी अश्वनी कुमार के खिलाफ यूटी विजिलेंस थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं सहित भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत 11 दिसंबर, 2015 को केस दर्ज किया गया था। दरअसल, चीफ विजिलेंस अधिकारी को एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि अकाउंट्स आफिसर (रेंट) ऑफिस, सेक्टर-9 में क्लर्क हरसिमरनजीत सिंह की उसके पिता की मौत पर अनुकंपा के आधार पर नौकरी लगी थी। उसके पिता को सेक्टर-28 में मकान मिला हुआ था, जो उनकी मौत के बाद भी परिवार ने खाली नहीं किया। इस मकान पर सात लाख रुपये का ड्यूज था। वह उसी तरह के मामले डील कर रहा था। उसने सेक्टर-28 के उस मकान के रजिस्टर से छेड़खानी की और एक फर्जी वेकेशन शीट जारी कर दी ताकि ड्यूज पेमेंट से बच सके। प्रारंभिक जांच के बाद हरसिमरनजीत सिंह और अश्वनी कुमार के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई थी लेकिन जांच टीम आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत पेश नहीं कर सकी जिसके चलते दोनों को अदालत ने बरी कर दिया है। ये दोनों कर्मचारी नगर निगम में नौकरी कर रहे हैं।
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इस मामले में जीरकपुर निवासी हरसिमरनजीत सिंह और सेक्टर-20 निवासी अश्वनी कुमार के खिलाफ यूटी विजिलेंस थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं सहित भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत 11 दिसंबर, 2015 को केस दर्ज किया गया था। दरअसल, चीफ विजिलेंस अधिकारी को एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि अकाउंट्स आफिसर (रेंट) ऑफिस, सेक्टर-9 में क्लर्क हरसिमरनजीत सिंह की उसके पिता की मौत पर अनुकंपा के आधार पर नौकरी लगी थी। उसके पिता को सेक्टर-28 में मकान मिला हुआ था, जो उनकी मौत के बाद भी परिवार ने खाली नहीं किया। इस मकान पर सात लाख रुपये का ड्यूज था। वह उसी तरह के मामले डील कर रहा था। उसने सेक्टर-28 के उस मकान के रजिस्टर से छेड़खानी की और एक फर्जी वेकेशन शीट जारी कर दी ताकि ड्यूज पेमेंट से बच सके। प्रारंभिक जांच के बाद हरसिमरनजीत सिंह और अश्वनी कुमार के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई थी लेकिन जांच टीम आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत पेश नहीं कर सकी जिसके चलते दोनों को अदालत ने बरी कर दिया है। ये दोनों कर्मचारी नगर निगम में नौकरी कर रहे हैं।
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