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नए सेक्टरों को भी मिलेगा टर्शरी वाटर
अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला
Updated Thu, 06 Feb 2014 09:04 AM IST
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अगले वर्षों के दौरान विकसित होने वाले नए सेक्टरों के घरों में फ्रेश से साथ-साथ टर्शरी वाटर का भी कनेक्शन दिया जाएगा।
हुडा की इस योजना के तहत नए सेक्टरों में पीने के पानी के साथ ही टर्शरी वाटर के लिए भी अलग पाइपलाइन डाली जाएगी। सबसे ज्यादा फायदा पिंजौर और कालका में विकसित होने वाले नए सेक्टरों को होगा।
इस टर्शरी वाटर का टॉयलेट के फ्लश और कार वॉश में उपयोग किया जा सकेगा, जिससे 20-25 फीसदी पानी की बचत होगी। फ्रेश वाटर की तुलना में इसका चार्ज भी करीब एक तिहाई होगा।
नई योजना के तहत पार्कों के अलावा घरों में भी इसकी सप्लाई होेने पानी की बर्बादी कम होगी। पानी की बचत और डैम से मिलने वाले पानी में कमी के मद्देनजर ही हुडा की ओर से इस तरह की योजना तैयार की जा रही है।
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हुडा की ओर से सेक्टर-20 में नए टर्शरी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जहां से पूरे जिले भर में टर्शरी वाटर की आपूर्ति की जाएगी।
नए प्लांट का निर्माण कार्य 2016 मार्च तक पूरा हो जाएगा और यहां से रोजाना 17 एमजीडी टर्शरी वाटर की आपूर्ति की जा सकेगी। यह कार्य पूरा होने के बाद ही नई योजना के तहत काम हो सकेगा।
पुराने सेक्टरों को भी मिलेगी सुविधा
हुडा के नियमों के मुताबिक, पुराने बसे सेक्टरों में अगर टर्शरी वाटर की आपूर्ति करने की मांग की जाती है तो एक कनाल या इससे बड़े प्लॉट धारकों को अलग कनेक्शन मुहैया कराई जा सकती है।
इसके अलावा पार्कों के लिए भी अलग पाइपलाइन डाली जाएगी।
तीन बार ट्रीटमेंट और टर्शरी वाटर तैयार
गंदा पानी अक्सर बहाव के साथ किसी दूसरी जगह चला जाता है, लेकिन जल संरक्षण के लिहाज से गंदे पानी को भी दो से तीन बार ट्रीट किया जाता है।
इसमें से न केवल गंदगी, बल्कि बदबू को भी दूर किया जाता है, ताकि सिंचाई या पीने, नहाने को छोड़कर बाकी कामों में इसका उपयोग किया जा सके।
ट्रीटमेंट के बाद अगर इस पानी को देखा जाए तो फ्रेश और टर्शरी वाटर में कोई फर्क नहीं दिखेगा।
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हुडा की इस योजना के तहत नए सेक्टरों में पीने के पानी के साथ ही टर्शरी वाटर के लिए भी अलग पाइपलाइन डाली जाएगी। सबसे ज्यादा फायदा पिंजौर और कालका में विकसित होने वाले नए सेक्टरों को होगा।
इस टर्शरी वाटर का टॉयलेट के फ्लश और कार वॉश में उपयोग किया जा सकेगा, जिससे 20-25 फीसदी पानी की बचत होगी। फ्रेश वाटर की तुलना में इसका चार्ज भी करीब एक तिहाई होगा।
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नई योजना के तहत पार्कों के अलावा घरों में भी इसकी सप्लाई होेने पानी की बर्बादी कम होगी। पानी की बचत और डैम से मिलने वाले पानी में कमी के मद्देनजर ही हुडा की ओर से इस तरह की योजना तैयार की जा रही है।
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हुडा की ओर से सेक्टर-20 में नए टर्शरी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जहां से पूरे जिले भर में टर्शरी वाटर की आपूर्ति की जाएगी।
नए प्लांट का निर्माण कार्य 2016 मार्च तक पूरा हो जाएगा और यहां से रोजाना 17 एमजीडी टर्शरी वाटर की आपूर्ति की जा सकेगी। यह कार्य पूरा होने के बाद ही नई योजना के तहत काम हो सकेगा।
पुराने सेक्टरों को भी मिलेगी सुविधा
हुडा के नियमों के मुताबिक, पुराने बसे सेक्टरों में अगर टर्शरी वाटर की आपूर्ति करने की मांग की जाती है तो एक कनाल या इससे बड़े प्लॉट धारकों को अलग कनेक्शन मुहैया कराई जा सकती है।
इसके अलावा पार्कों के लिए भी अलग पाइपलाइन डाली जाएगी।
तीन बार ट्रीटमेंट और टर्शरी वाटर तैयार
गंदा पानी अक्सर बहाव के साथ किसी दूसरी जगह चला जाता है, लेकिन जल संरक्षण के लिहाज से गंदे पानी को भी दो से तीन बार ट्रीट किया जाता है।
इसमें से न केवल गंदगी, बल्कि बदबू को भी दूर किया जाता है, ताकि सिंचाई या पीने, नहाने को छोड़कर बाकी कामों में इसका उपयोग किया जा सके।
ट्रीटमेंट के बाद अगर इस पानी को देखा जाए तो फ्रेश और टर्शरी वाटर में कोई फर्क नहीं दिखेगा।