{"_id":"57a9f6914f1c1b0f11ee49af","slug":"trial-court-was-summoned-by-highcourt-in-karam-singh-murder-case-kambopur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फिर हाईकोर्ट पहुंचा कंबोपुरा का पूर्व सरपंच मर्डर केस, सख्त निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर हाईकोर्ट पहुंचा कंबोपुरा का पूर्व सरपंच मर्डर केस, सख्त निर्देश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 10 Aug 2016 05:03 PM IST
विज्ञापन
सीबीअाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कंबोपुरा के पूर्व सरपंच करम सिंह की हत्या के मामले की परतें फिर से उधड़ने लगी हैं। इस मामले में आरोपी हरियाणा के पूर्व विधायक ओम प्रकाश जैन के राजनीतिक सलाहकार रहे सतपाल राणा और दूसरी आरोपी हरियाणा के पूर्व मुख्य संसदीय सचिव जिले राम शर्मा के चालक सुरेश कुमार ने पंजाब-हरियाणा में याचिका दायर कर इस मामले में गवाह बनाए जाने की मांग की है। मंगलवार को सतपाल और सुरेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह ने ट्रायल कोर्ट में जारी इस मामले का स्टेटस तलब कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्तूबर को होगी।
एडवोकेट विवेक के. ठाकुर के मार्फत दायर की गई याचिका में सतपाल और सुरेश की ओर से कहा गया है कि तीनों आरोपी ओम प्रकाश जैन, जिले राम शर्मा और ओम प्रकाश जैन के पीए राजिंदर शर्मा, राजनीतिक रसूख वाले व्यक्ति हैं और उनके अधीन काम करते हुए वे उनके प्रभाव में खामोश रहे, लेकिन अब वे इस पूरे मामले की जानकारी जांच अधिकारी को देना चाहते हैं। दोनों याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि वे कंबोपुरा के पूर्व सरपंच की हत्या और उसके बाद चमेल सिंह की हत्या के मामलों के बारे में बहुत कुछ जानते हैं।
दूसरी ओर, इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है, जिसके बारे में दोनों याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सीबीआई ने उनके बयान नहीं लिए और अब वे सीबीआई को बयान देना चाहते हैं। याचिकाकर्ता सतपाल राणा का कहना है कि वे 1991 तक ओम प्रकाश जैन के राजनीतिक सलाहकार थे और ड्राइवर सुरेश 2009 तक जिले राम शर्मा के पास काम करते रहे हैं। दोनों ने याचिका में दावा किया है कि वे पूरे घटनाक्त्रस्म के बारे में ज्यादा जानकारी रखते हैं और अब जांच एजेंसी का सहयोग करना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
एडवोकेट विवेक के. ठाकुर के मार्फत दायर की गई याचिका में सतपाल और सुरेश की ओर से कहा गया है कि तीनों आरोपी ओम प्रकाश जैन, जिले राम शर्मा और ओम प्रकाश जैन के पीए राजिंदर शर्मा, राजनीतिक रसूख वाले व्यक्ति हैं और उनके अधीन काम करते हुए वे उनके प्रभाव में खामोश रहे, लेकिन अब वे इस पूरे मामले की जानकारी जांच अधिकारी को देना चाहते हैं। दोनों याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि वे कंबोपुरा के पूर्व सरपंच की हत्या और उसके बाद चमेल सिंह की हत्या के मामलों के बारे में बहुत कुछ जानते हैं।
विज्ञापन
दूसरी ओर, इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है, जिसके बारे में दोनों याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सीबीआई ने उनके बयान नहीं लिए और अब वे सीबीआई को बयान देना चाहते हैं। याचिकाकर्ता सतपाल राणा का कहना है कि वे 1991 तक ओम प्रकाश जैन के राजनीतिक सलाहकार थे और ड्राइवर सुरेश 2009 तक जिले राम शर्मा के पास काम करते रहे हैं। दोनों ने याचिका में दावा किया है कि वे पूरे घटनाक्त्रस्म के बारे में ज्यादा जानकारी रखते हैं और अब जांच एजेंसी का सहयोग करना चाहते हैं।
विज्ञापन
70 लाख में चमेल सिंह की हत्या का मामला रफादफा किया
highcourt
यह है मामला
कंबोपुरा के पूर्व सरपंच करम सिंह ने 6 जून, 2011 को एसपी पानीपत को एक शिकायत देकर ओमप्रकाश जैन और राजिंदर शर्मा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उसके पुत्र राजिंदर को कंडक्टर लगवाने के लिए तीन लाख रुपये दिए थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि एक अन्य व्यक्ति चमेल सिंह ने भी अपने पुत्र संदीप कुमार को क्लर्क लगवाने के लिए जैन और शर्मा को साढ़े चार लाख रुपये दिए थे, लेकिन राजिंदर और संदीप को नौकरी नहीं मिलने पर उन्होंने जैन और शर्मा से पैसों का तकाजा किया, लेकिन उन्हें पैसा नहीं मिला।
पुलिस को यह शिकायत देने के कुछ दिनों बाद करम सिंह की हत्या उस समय कर दी गई, जब वे जिले राम के घर जा रहे थे। उनका शव करनाल में माडल डायरी एनडीआरआई के मुख्य गेट पर ईसाई कब्रिस्तान के पास मिला। उनके पुत्र ने इस मामले में करनाल पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए जैन और शर्मा पर आरोप लगाए, लेकिन दोनों आरोपी राज्य के मंत्री होने के कारण पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट ने वर्ष 2012 में इस मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द कर दी।
70 लाख में चमेल सिंह की हत्या का मामला रफादफा किया
दोनों याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि करम सिंह की हत्या के बाद चमेल सिंह, जिसने अपने बेटे की नौकरी के लिए जैन और शर्मा को साढ़े चार लाख रुपये दिए थे, कुछ दिन बाद वह भी मृत पाए गए। इस बारे में 16 जून, 2011 को एफआईआर नंबर 542 दर्ज की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आरोपी ओमप्रकाश जैन ने चमेल सिंह के बेटे को 70 लाख रुपये देकर इस मामले को रफादफा कराया। याचिका में यह भी कहा गया है कि जैन ने इन 70 लाख रुपये का इंतजाम याचिकाकर्ताओं की मौजूदगी में किया, जिसमें 40 लाख रुपये सुशील जैन से लिए गए। आखिरकार चमेल सिंह के बेटे की ओर से दिए गए बयान के आधार पर हाईकोर्ट ने जैन के खिलाफ एफआईआर को रद कर दिया।
कंबोपुरा के पूर्व सरपंच करम सिंह ने 6 जून, 2011 को एसपी पानीपत को एक शिकायत देकर ओमप्रकाश जैन और राजिंदर शर्मा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उसके पुत्र राजिंदर को कंडक्टर लगवाने के लिए तीन लाख रुपये दिए थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि एक अन्य व्यक्ति चमेल सिंह ने भी अपने पुत्र संदीप कुमार को क्लर्क लगवाने के लिए जैन और शर्मा को साढ़े चार लाख रुपये दिए थे, लेकिन राजिंदर और संदीप को नौकरी नहीं मिलने पर उन्होंने जैन और शर्मा से पैसों का तकाजा किया, लेकिन उन्हें पैसा नहीं मिला।
पुलिस को यह शिकायत देने के कुछ दिनों बाद करम सिंह की हत्या उस समय कर दी गई, जब वे जिले राम के घर जा रहे थे। उनका शव करनाल में माडल डायरी एनडीआरआई के मुख्य गेट पर ईसाई कब्रिस्तान के पास मिला। उनके पुत्र ने इस मामले में करनाल पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए जैन और शर्मा पर आरोप लगाए, लेकिन दोनों आरोपी राज्य के मंत्री होने के कारण पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट ने वर्ष 2012 में इस मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द कर दी।
70 लाख में चमेल सिंह की हत्या का मामला रफादफा किया
दोनों याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि करम सिंह की हत्या के बाद चमेल सिंह, जिसने अपने बेटे की नौकरी के लिए जैन और शर्मा को साढ़े चार लाख रुपये दिए थे, कुछ दिन बाद वह भी मृत पाए गए। इस बारे में 16 जून, 2011 को एफआईआर नंबर 542 दर्ज की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आरोपी ओमप्रकाश जैन ने चमेल सिंह के बेटे को 70 लाख रुपये देकर इस मामले को रफादफा कराया। याचिका में यह भी कहा गया है कि जैन ने इन 70 लाख रुपये का इंतजाम याचिकाकर्ताओं की मौजूदगी में किया, जिसमें 40 लाख रुपये सुशील जैन से लिए गए। आखिरकार चमेल सिंह के बेटे की ओर से दिए गए बयान के आधार पर हाईकोर्ट ने जैन के खिलाफ एफआईआर को रद कर दिया।