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ध्यान दें! 15 दिन के लिए मंत्रियों के पास तबादलों की पावर, उमड़ी भीड़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 27 Jul 2016 10:09 PM IST
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अधिकारियों के साथ सीएम खट्टर की बैठक
- फोटो : amar ujala
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हरियाणा सरकार के मंत्रियों के दरबार में दस दिनों तक पैर रखने की जगह नहीं होगी। सरकार ने मंत्रियों को तबादलों की पावर दे दी है। 27जुलाई से दस अगस्त तक मंत्रिगण तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का तबादला कर सकेंगे। मंगलवार को यहां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्री समूह की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
इसके अलावा मुख्यमंत्री की ओर से की जाने वाली घोषणाओं पर भी गंभीरता के साथ विचार किया गया है। यह निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री की ओर से की जाने वाली घोषणाओं को सिरे चढ़ाने में बजट की दिक्कत नहीं आनी चाहिए। यदि घोषणाओं को पूरा करने में पैसे की कमी आड़े आ रही है तो अन्य मदों से पैसा लेकर मुख्यमंत्री की घोषणाएं पूरी की जाएं।
इसके अलावा पूर्व सरकार के समय में चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को हरियाणा सरकार द्वारा आवेदन राशि लौटाने का फैसला भी किया गया। बैठक में यह मुद्दा सामने आया कि पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान वर्ष 2013 में कर्मचारी भर्ती बोर्ड का गठन करके चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के विभिन्न पदों के लिए आवेदन मांगे थे।
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इसमें आवेदकों के पास से फीस के रूप में 100-100 रुपये के ड्राफ्ट लिए गए थे। इस बीच प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई और भर्ती बोर्ड को भंग कर दिया गया। ऐसे में आवेदकों के करीब पांच करोड़ रुपये की धनराशि अधर में लटक गई। इस मुद्दे पर चर्चा के बाद सरकार ने इसे लौटाने का फैसला कर लिया।
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इसके अलावा मुख्यमंत्री की ओर से की जाने वाली घोषणाओं पर भी गंभीरता के साथ विचार किया गया है। यह निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री की ओर से की जाने वाली घोषणाओं को सिरे चढ़ाने में बजट की दिक्कत नहीं आनी चाहिए। यदि घोषणाओं को पूरा करने में पैसे की कमी आड़े आ रही है तो अन्य मदों से पैसा लेकर मुख्यमंत्री की घोषणाएं पूरी की जाएं।
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इसके अलावा पूर्व सरकार के समय में चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को हरियाणा सरकार द्वारा आवेदन राशि लौटाने का फैसला भी किया गया। बैठक में यह मुद्दा सामने आया कि पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान वर्ष 2013 में कर्मचारी भर्ती बोर्ड का गठन करके चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के विभिन्न पदों के लिए आवेदन मांगे थे।
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इसमें आवेदकों के पास से फीस के रूप में 100-100 रुपये के ड्राफ्ट लिए गए थे। इस बीच प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई और भर्ती बोर्ड को भंग कर दिया गया। ऐसे में आवेदकों के करीब पांच करोड़ रुपये की धनराशि अधर में लटक गई। इस मुद्दे पर चर्चा के बाद सरकार ने इसे लौटाने का फैसला कर लिया।