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धान की बुवाई पहले करने के खिलाफ फैसला लेने का समय गुजरा: हाईकोर्ट

Fri, 16 May 2025 08:29 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 May 2025 08:29 PM IST
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Time has passed to decide against early sowing of paddy: High Court
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने धान की बुवाई के मौसम को स्थगित करने संबंधी पंजाब सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को निष्फल करार दिया है, क्योंकि फसल पहले ही बोई जा चुकी है और संबंधित अवधि भी बीत चुकी है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल पंजाब के सात निवासियों की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें धान की रोपाई की तिथि को पहले करने संबंधी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जो कथित रूप से स्थापित कृषि पद्धति और पंजाब उप-भूमि जल संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। अधिनियम का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि तिथियों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी कोई छूट नहीं दी गई है।

इसमें कहा गया है कि निर्धारित 20 जून या बाद की तिथि के बजाय कुछ क्षेत्रों में 1 जून से रोपाई की अनुमति देने का निर्णय प्रत्यक्ष उल्लंघन है, जिसे मानसून के आगमन के साथ धान की बुवाई को समन्वित करने के लिए तैयार किया गया था। याचिका का विरोध करते हुए एजी पंजाब मनिंदरजीत सिंह बेदी और एडिशनल एजी चंचल सिंगला ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने गलत वैधानिक प्रावधान पर भरोसा किया था। याचिकाकर्ता ने एक दस्तावेज पर भरोसा किया था, जिसमें संबंधित अधिसूचना की अवधि और समय सीमा के बारे में गलत जानकारी थी। खंडपीठ ने तारीखों की जांच करने पर पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया मुद्दा पहले ही निरर्थक हो चुका है, क्योंकि संबंधित समय अवधि पहले ही बीत चुकी है। इसलिए याचिका का निपटारा कर दिया गया।
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