{"_id":"18ff0690e62bc38bb8933595fb8ab83c","slug":"timber-industry-at-panchkula-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टिंबर इंडस्ट्री: सरकारी औपचारिकताएं, पलायन कर रहे उद्योग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टिंबर इंडस्ट्री: सरकारी औपचारिकताएं, पलायन कर रहे उद्योग
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Tue, 24 Nov 2015 02:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंचकूला में टिंबर इंडस्ट्री का हाल-बेहाल है। उद्योग पलायन कर रहे हैं। अब तक आठ इंडस्ट्रीज पलायन कर चुकी हैं और यहां सिर्फ 25 टिंबर इंडस्ट्री ही रह गईं हैं।
विज्ञापन
सरकारी औपचारिकताओं को पलायन का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। इंडस्ट्रियलिस्ट्स का कहना है कि पंचकूला में पॉल्यूशन के साथ ही तमाम क्लीयरेंस उन्हें लेनी पड़ती हैं। मगर इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम नहीं है।
विज्ञापन
इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों की मानें तो पंचकूला की टिंबर इंडस्ट्री का कुछ साल पहले तक सौ करोड़ का टर्नओवर होता था, अब यह टर्नओवर सिर्फ तीस फीसदी रह गया है। इसका कारण है बिजली के ज्यादा रेट, अलग टिंबर इंडस्ट्री न होना और पाल्यूशन क्लीयरेंस के साथ अन्य औपचारिकताएं को माना जा रहा है, जिन्हें पूरा करते-करते ही उद्यमी परेशान हो जाते हैं। पहले यह इंडस्ट्री सौ से ज्यादा लोगों को रोजगार देती थी, अब इसके हालात खराब हो चुके हैं।
विज्ञापन
वुडन टूल्स बनते हैं यहां
पंचकूला की टिंबर इंडस्ट्री में वुडन टूल्स बनाए जाते हैं। इसके साथ ही पंचकूला, चंडीगढ़ और अन्य स्थानों पर लकड़ी की सप्लाई की जाती है। इसके साथ ही इंडस्ट्री में दरवाजे भी बनाए जाते हैं।
टिंबर इंडस्ट्री को नहीं मिली अलग से जगह
पंचकूला में टिंबर इंडस्ट्री के लिए अलग जगह मांगी गई थी मगर अब तक यह मांग नहीं पूरी हो सकी है। पंचकूला के उद्यमियों का कहना है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को भी एचएसआईडीसी जैसी नीतियां बनानी चाहिए, जिससे उद्यमियों को राहत मिल सके।
टिंबर इंडस्ट्री : एक नजर
कुल यूनिट्स : 25
कुल टर्नओवर : 30 करोड़ रुपये
रेवेन्यू : 5 करोड़ रुपये
पंचकूला में टिंबर इंडस्ट्री का हाल बेहाल हो चुका है। कई ऐसे इंडस्ट्रियलिस्ट हैं जो कि इस उद्योग को छोड़कर दूसरे उद्योग में पलायन कर गए। कुछ हिमाचल में बद्दी की ओर रुख कर गए। पंचकूला में पॉल्यूशन के साथ ही तमाम क्लीयरेंस हमको लेनी पड़ती हैं। इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम जरूरी है।
दिनेश सिंगला, उद्यमी
टिंबर ही नहीं, पंचकूला में किसी भी इंडस्ट्री को कोई सपोर्ट नहीं है। टिंबर के उद्यमी काफी समय से अलग इंडस्ट्री की डिमांड कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांग अब तक नहीं सुनी गई। सिंगल विंडो सिस्टम न होना भी हमारे लिए भी एक बड़ी बाधा बन चुका है।
रमेश अग्रवाल, प्रेसिडेंट, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पंचकूला