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जालंधरः तीन बड़े प्रोजेक्ट अटके, डंप से लेकर एलईडी लाइटों का शुरू हुआ विरोध

Thu, 26 Jul 2018 09:45 AM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Updated Thu, 26 Jul 2018 09:45 AM IST
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Three Big Project Stakes, protest against Dumps and LED Lights
नगर निगम की बैठक
नगर निगम में कांग्रेस को सत्ता पर काबिज हुए छह माह से अधिक का वक्त बीत चुका है लेकिन किसी नए प्रोजेक्ट को शुरू करना तो दूर उलटा पुराने तीन प्रोजेक्ट को लेकर पंगा पड़ा हुआ है और निगम में तीनों मुख्य प्रोजेक्ट हवा में अटके हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। 
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जालंधर के मेयर जगदीश राज राजा जहां खुद स्वीपिंग मशीन में गड़बड़ी का आरोप लगाकर मैदान में हैं। वहीं कांग्रेस के पार्षद वरियाणा में कूड़े के डंप और एलईडी लाइटों में घोटालों को लेकर विरोध कर रहे हैं। 
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वरियाणा कूड़े के डंप का मामला
वरियाणा से कूड़े का डंप हटाने व प्रस्तावित कूड़ा प्लांट रद्द करने की मांग को लेकर वेस्ट से विधायक सुशील रिंकू की पत्नी पार्षद डॉ. सुनीता रिंकू और इलाके के पार्षद लखबीर सिंह बाजवा खुद मैदान में हैं। इलाके के लोगों में भी इसको लेकर रोष पनप रहा है। वरियाणा डंप रिमूवल ज्वाइंट एक्शन कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी व पार्षद का तर्क है कि वरियाणा में कूड़े से खाद बनाने के प्लांट से पांच लाख के करीब लोग प्रभावित होंगे।
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Three Big Project Stakes, protest against Dumps and LED Lights
नगर निगम की बैठक
वरियाणा गांव के साथ जालंधर कुंज, जालंधर विहार, जालंधर प्राइम, गौतम नगर, न्यू गौतम नगर, शिव नगर, गुरु राम दास नगर, कबीर विहार, माता संत कौर नगर, गांव नागरा, गांव नंदनपुर, गांव मंड, गांव संगल सोहल, हेलरां, मीरपुर, तलवाड़ा सहित कई घनी आबादी वाले रिहाइशी इलाके पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि डंप से खाद बनाने का काम शुरू होने के बाद 6 शहरों से यहां पर कूड़ा फेंका जाएगा, जिससे शहर की 70 प्रतिशत आबादी प्रभावित होगी। इस तरह से पांच लाख के करीब शहरवासी इससे प्रभावित होंगे। अगर कूड़े का प्लांट लग गया तो लोगों को परेशानी बढ़ जाएगी। इसको लेकर कांग्रेसी पार्षद काफी परेशान हैं। 

स्वीपिंग मशीन का पहिया रुका, मेयर का जबरदस्त विरोध
मेयर जगदीश राज राजा खुद स्वीपिंग मशीन के विरोध में हैं और उन्होंने इस मुद्दे को हाउस से लेकर खुले मंच पर उठाया है। यह प्रोजेक्ट शिअद भाजपा कार्यकाल में लाया गया था। जिसमें रोजाना 20 से अधिक सड़कों की सफाई की जाती थी। मेयर राजा का कहना है कि अब तक कंपनी की 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की पेमेंट बन चुकी है। इस हिसाब से 7 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला होने की आशंका है।

इस मामले में डीसीएल द्वारा दी गई रिपोर्ट में कॉन्ट्रैक्ट में कई खामियां होने की पुष्टि की गई है। कंपनी के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक हर दिन सड़कों की सफाई होनी थी, जबकि हर तीसरे दिन सफाई हो रही है। कहा कि इससे साफ है कि कंपनी को दोगुनी पेमेंट दी जा रही है। कंपनी की पेमेंट नगर निगम ने रोक दी है, जिस कारण यह प्रोजेक्ट हवा में अटक गया है। मेयर ने इसकी जांच के लिए हाउस में प्रस्ताव भी पास करवा लिया है।

 

Three Big Project Stakes, protest against Dumps and LED Lights
मेयर जगदीश राज राजा
एलईडी में 100 करोड़ के घोटाले का आरोप
कांग्रेस पार्षद रोहन सहगल शहर के ड्रीम प्रोजेक्ट एलईडी में घोटाला होने का शोर मचा रहे हैं। आशंका है कि जिन शर्तों पर कंपनी से काम कराया जा रहा है, उसके मुताबिक इसमें 65 करोड़ रुपये का भुगतान ज्यादा करना होगा। इसमें काफी गड़बड़ी नजर आ रही है। इसकी जांच होनी चाहिए। पीसीपी इंटरनेशनल कंपनी को हर लाइट की मेंटेनेंस के लिए प्रति महीना 66.75 रुपए देने होंगे।

इस हिसाब से करीब हर साल 5 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि बनेगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सोडियम लाइट्स जोकि खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही हैं, उसकी मेंटेनेंस के लिए करीब 40 रुपये प्रति महीना प्रति लाइट दिए जा रहे हैं। नई लगने वाली एलईडी स्ट्रीट में खराबी कम आने की उम्मीद है। इसलिए सोडियम लाइट के मुकाबले करीब 25 रुपए प्रति महीना प्रति लाइट देना गलत है।

प्रोजेक्ट को 15 महीने में पूरा किया जाना था
नगर निगम ने अगस्त 2017 में चंडीगढ़ की टीसीपी इंटरनेशनल कंपनी से शहर की 65 हजार सोडियम लाइटों को एलईडी में बदलने का कॉन्ट्रैक्ट किया गया था। यह प्रोजेक्ट को 15 महीने में पूरा किया जाना था। पर अलग-अलग कारणों से प्रोजेक्ट अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सका है। पहले बैंक ने कंपनी को निगम की साढ़े चार करोड़ की गारंटी देने से इंकार करने के चलते मामला लटका रहा। इसके बाद एस्क्रो खाता खुलवाने में कई तकनीकी दिक्कतें पेश आईं। कंपनी की तरफ से तेजी से शहर में एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं, लेकिन कांग्रेसी पार्षद इसको लेकर काफी शोर मचा रहे हैं।
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