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कोरोना वायरसः जीएमसीएच के डॉक्टरों की सहायता को आगे आए एलुमनी, एक पोस्ट पर जुटाया सामान
Mon, 30 Mar 2020 11:32 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2020 11:32 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर- 32(जीएमसीएच) चंडीगढ़ के चिकित्सकों व स्टाफ के पास अपनी सुरक्षा के लिए पर्सनल प्रोटेक्ट इक्यूपमेंट (पीपीई) पूरे नहीं हैं। कोरोना कहर बरपा रहा है। स्थिति भयावह होती जा रही है। ऐसे में एक चिकित्सक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करमदद मांगी है। यह पोस्ट पढ़ते ही सिंगापुर व अमेरिका में रिसर्च कर रहे एलुमनी ने फंड की व्यवस्था की और सभी पीपीई की व्यवस्था कर दी। यह सामान मंगलवार तक कॉलेज के पास पहुंचेगा।
फंड इकट्ठा करने के लिए डॉ. साहिल व डॉ. रोहन ने लगा दी जी जान
पूरी दुनिया में इस समय डॉक्टरों व उनके साथ काम करने वाले स्टाफ की सुरक्षा बहुत जरूरी है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम पूरे नहीं हो पा रहे हैं। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के डॉक्टरों के पास एन- 95 मास्क तक नहीं हैं। स्थिति भयावह है। ऐसे में इंडिया के हॉस्पिटल भी अपने-अपने चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए इंतजाम कर रहे हैं। जीएमसीएच के चिकित्सकों के पास भी इंतजाम पूरे नहीं हैं। आखिर वह खुद की सुरक्षा कर ही तो कोरोना के मरीजों को देख पाएंगे।
कॉलेज के डॉ. दिनेश ने सोशल मीडिया पर 27 मार्च को पोस्ट किया। उसमें पीपीई की गहन जरूरत बताई। यह पोस्ट सिंगापुर में रिसर्च फेलो डॉ. साहिल ठाकुर ने पढ़ी। उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने ठाना कि इस समय कॉलेज के लिए काम करने का समय है। उन्होंने जीएमसीएच से ही पढ़े डॉ. रोहन बीर सिंह धालीवाल से संपर्क किया। वह भी अमेरिका में रिसर्च फेलो हैं। दोनों ने उसी दिन से जी जान लगा दी और अलग-अलग वेबसाइट बनाकर लोगों से मदद मांगी।
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फंड इकट्ठा करने के लिए डॉ. साहिल व डॉ. रोहन ने लगा दी जी जान
पूरी दुनिया में इस समय डॉक्टरों व उनके साथ काम करने वाले स्टाफ की सुरक्षा बहुत जरूरी है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम पूरे नहीं हो पा रहे हैं। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के डॉक्टरों के पास एन- 95 मास्क तक नहीं हैं। स्थिति भयावह है। ऐसे में इंडिया के हॉस्पिटल भी अपने-अपने चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए इंतजाम कर रहे हैं। जीएमसीएच के चिकित्सकों के पास भी इंतजाम पूरे नहीं हैं। आखिर वह खुद की सुरक्षा कर ही तो कोरोना के मरीजों को देख पाएंगे।
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कॉलेज के डॉ. दिनेश ने सोशल मीडिया पर 27 मार्च को पोस्ट किया। उसमें पीपीई की गहन जरूरत बताई। यह पोस्ट सिंगापुर में रिसर्च फेलो डॉ. साहिल ठाकुर ने पढ़ी। उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने ठाना कि इस समय कॉलेज के लिए काम करने का समय है। उन्होंने जीएमसीएच से ही पढ़े डॉ. रोहन बीर सिंह धालीवाल से संपर्क किया। वह भी अमेरिका में रिसर्च फेलो हैं। दोनों ने उसी दिन से जी जान लगा दी और अलग-अलग वेबसाइट बनाकर लोगों से मदद मांगी।
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ऐसे जुटाया फंड और की सामान की व्यवस्था
अमेरिका के कुछ लोगों ने डॉ. रोहन की वेबसाइट लिंक के जरिये फंड भेजा तो कुछ इंडिया के लोगों ने डॉ. साहिल ठाकुर की वेबसाइट पर मदद की। कुछ रुपये आने पर इन दोनों चिकित्सकों ने पीपीई की सप्लाई करने वाले वेंडरों को तलाशा, लेकिन सामान की किल्लत बहुत थी। काफी जगह प्रयास किए। एक जगह सफलता मिली।
उस वेंडर ने पीपीई देने का वायदा कर दिया और पैसे भी उन्हें दिए। अब डॉ. साहिल व डॉ. रोहन की मदद से जीएमसीएच को मंगलवार तक 250 एन 95 मास्ट व 100 गाउन मिलेंगे। इसके अलावा वीरवार को भी शूज कवर गाउन, गोगल व मास्क और दिए जाएंगे। डॉ. साहिल कहते हैं कि उनका प्रयास जारी रहेगा। चिकित्सक सुरक्षित रहेंगे तभी वह मरीजों को ठीक कर पाएंगे।
साहिल व रोहन की अपील, घरों में रहें सब लोग
मालूम हो कि डॉ. साहिल ने जीएमसीएच से एमबीबीएस व एमएस किया है और उसके फेलोशिप पर सिंगापुर चले गए। इसी तरह फेलोशिप पर डॉ. रोहन अमेरिका में गए। उन्होंने यहां से एमबीबीएस की पढ़ाई की। यहां के वह एलुुमनी हैैं। डॉ. साहिल ने कहा है कि चिकित्सकों की सुरक्षा के सामान की बहुत कमी है। इसलिए जनता से अपील है कि वह घरों में रहें ताकि वह बीमार नहीं पड़ेंगे और चिकित्सकों को अधिक सामान की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उस वेंडर ने पीपीई देने का वायदा कर दिया और पैसे भी उन्हें दिए। अब डॉ. साहिल व डॉ. रोहन की मदद से जीएमसीएच को मंगलवार तक 250 एन 95 मास्ट व 100 गाउन मिलेंगे। इसके अलावा वीरवार को भी शूज कवर गाउन, गोगल व मास्क और दिए जाएंगे। डॉ. साहिल कहते हैं कि उनका प्रयास जारी रहेगा। चिकित्सक सुरक्षित रहेंगे तभी वह मरीजों को ठीक कर पाएंगे।
साहिल व रोहन की अपील, घरों में रहें सब लोग
मालूम हो कि डॉ. साहिल ने जीएमसीएच से एमबीबीएस व एमएस किया है और उसके फेलोशिप पर सिंगापुर चले गए। इसी तरह फेलोशिप पर डॉ. रोहन अमेरिका में गए। उन्होंने यहां से एमबीबीएस की पढ़ाई की। यहां के वह एलुुमनी हैैं। डॉ. साहिल ने कहा है कि चिकित्सकों की सुरक्षा के सामान की बहुत कमी है। इसलिए जनता से अपील है कि वह घरों में रहें ताकि वह बीमार नहीं पड़ेंगे और चिकित्सकों को अधिक सामान की जरूरत नहीं पड़ेगी।