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अफवाहों पर विराम: 5जी और कोरोना संक्रमण के बीच कोई संबंध नहीं, विशेषज्ञों की अपील-इस पर ध्यान न दें 

Tue, 25 May 2021 03:44 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 25 May 2021 03:44 PM IST
सार

5जी तकनीक को कोविड 19 महामारी से जोड़ने के दावे झूठे हैं और इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। 

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There is no connection between 5G and Coronavirus, says expert
मोबाइल टावर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

5जी मोबाइल टॉवरों की टेस्टिंग से कोरोना वायरस की दूसरी लहर पैदा होने से संबंधित फैलाई जा रही सूचनाएं भ्रामक व निराधार हैं। पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. रविंद्र खैवाल का कहना है कि लोग इस पर विश्वास न करें, क्योंकि कोरोना वायरस रेडियो तरंगों व मोबाइल नेटवर्क से नहीं फैल सकता। 

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उन्होंने बताया कि कोविड 19 और 5जी नेटवर्क में कोई संबंध नहीं है तथा वायरस रेडियो तरंगों/मोबाइल नेटवर्क से नहीं फैल सकता है। कोरोना वायरस एक कम्युनिकेबल डिजीज है जिसका मोबाइल टावर या 5जी रेडियो तरंगों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस तरह की आधारहीन गलत सूचना को सच न मानें।
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भारत सरकार ने भी ठहराया गलत
डॉ. खैवाल ने बताया कि भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी), स्वास्थ्य मंत्रालय तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी कहा है कि ये संदेश गलत हैं तथा 5जी तकनीक और कोविड- 19 के फैलने में कोई संबंध नहीं है। वहीं सरकार ने अपील की है कि लोग इस मामले में गलत सूचनाओं और अफवाहों से भ्रमित न हों। 
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सरकार ने यह भी कहा है कि मोबाइल टावरों से नॉन-आयोनाइजिंग रेडियो फ्रीक्वेंसी निकलती हैं, जो बहुत कमजोर होती हैं और मनुष्यों समेत किसी भी जीवित कोशिका को नुकसान नहीं पहुंचा सकती हैं। दूरसंचार विभाग ने रेडियो फ्रीक्वेंसी फील्ड की एक्सपोजर लिमिट के लिए मानक निर्धारित किए हैं, जो इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (आईसीएनआईआरपी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से तय की गई सुरक्षित सीमा से करीब 10 गुना अधिक कठोर हैं।

भ्रामक सूचनाएं फैलाना अपराध
डॉ. खैवाल ने बताया कि कोरोना महामारी के इस मुश्किल समय में जब ज्यादातर काम जैसे चिकित्सा सेवा, पढ़ाई, जरूरी सामानों की उपलब्धता, व्यापार और यहां तक कि किसानों को उनके ऊपज की खरीद का भुगतान आदि सभी टेलीकॉम सेवा की मदद से ऑनलाइन हो रहे हैं, ऐसे में इन अफवाहों पर किसी भी प्रकार से टेलीकॉम नेटवर्क को क्षति पहुंचाना न केवल कानूनी बल्कि एक सामाजिक अपराध भी है। सरकार ने यह भी कहा है कि 5जी नेटवर्क की टेस्टिंग अभी भारत में कहीं भी शुरू ही नहीं हुई है। ऐसे में यह दावे कि भारत में 5जी ट्रायल्स या नेटवर्क कोरोना वायरस पैदा कर रहे हैं, निराधार और गलत हैं।

पहले मेट्रो सिटी में होगी जांच
पहले दौर के 5जी ट्रायल्स दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों में होंगे। पंजाब और हरियाणा इनमें शामिल भी नहीं हैं। कुछ महीनों बाद इसके लिए स्पेक्ट्रम मिलेगा और उसके बाद ही निर्धारित फ्रीक्वेंसी के आधार पर टेलीकॉम ऑपरेटर्स इक्विपमेंट खरीद सकेंगी तब जाकर कहीं टेस्टिंग शुरू होगी। दुनिया में पहले ही कई देशों में 5जी नेटवर्क शुरू हो चुके हैं और लोग सुरक्षा के साथ इन सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।


कोर्ट ने भी दिया निर्देश
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भी पंजाब और हरियाणा की सरकारों से कहा है कि ऐसे लोगों को, जो कोविड का इलाज घर में रह करवा रहे हैं, फोन पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ऑपरेटर्स को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। 

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