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Haryana News: भाजपा-जजपा सत्ता के साथी, संगठन के नहीं, पंचायत चुनाव में जुदा रहीं राहें

Sun, 27 Nov 2022 07:49 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 27 Nov 2022 07:49 PM IST
सार

भाजपा-जजपा में गठबंधन से जुदा होने को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कदम से कदम मिलाकर सरकार चला रहे हैं। संगठन के तौर पर दोनों दलों ने अगले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी तैयारियां तेज की हुई हैं।

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There is no alliance between BJP JJP organizations
मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)

विस्तार

हरियाणा में भाजपा-जजपा सत्ता के साथी हैं, दोनों दलों के संगठन का आपस में गठबंधन नहीं है। सरकार में साथ रहते गठबंधन दल तीनों विधानसभा उपचुनाव मिलकर लड़ चुके हैं। हालांकि, तीनों उपचुनाव में उम्मीदवार भाजपा का ही रहा। 2024 का विधानसभा चुनाव साथ या अलग-अलग लड़ने को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है।

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ताजा पंचायती राज चुनाव भाजपा-जजपा ने अलग-अलग लड़ा। भाजपा ने जिला परिषद की 102 सीटों पर पार्टी सिंबल पर उम्मीदवार उतारे। वहीं, जजपा ने सिर्फ तीन जगह ही पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ा। इसमें खास बात यह रही कि जहां भाजपा ने अपने उम्मीदवार उतारे, वहां जजपा ने अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया। भाजपा ने जजपा के लिए कुरुक्षेञ और नूंह जिलों में उनके प्रभाव वाली तीन सीटें छोड़ दी थीं।
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पंचायती राज चुनाव साथ लड़ने को लेकर दोनों दलों के बीच गठबंधन नहीं हुआ था। भाजपा प्रदेश चुनाव प्रचार समिति ने जिला परिषद चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ने का फैसला जिला इकाइयों पर छोड़ा था। जजपा ने भी पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में यही फैसला लिया। 

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जिला इकाइयों की घोषणा पर ही जजपा ने केवल तीन जगह सिंबल पर अपने उम्मीदवार उतारे। इसी साल निकाय चुनाव से पहले भाजपा ने अलग मैदान में उतरने का निर्णय लिया था, जिसे हाईकमान के दबाव में बाद में बदलना पड़ा। निकाय चुनाव दोनों दलों ने गठबंधन के तहत ही लड़ा था। भाजपा ने जजपा के लिए नगर परिषद और नगरपालिकाओं की सीटें छोड़ दी थीं।

अब तीन नगर निगमों पर निगाहें
पंचायत चुनाव निपटने के बाद अब दोनों दलों की निगाहें गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर नगर निगम के चुनाव पर टिक जाएंगी। दोनों ही दल इन निगमों पर अपना कब्जा जमाना चाहेंगे। मानेसर नगर निगम में पहली बार ही चुनाव होना है। राजनीतिक तौर पर यह तीनों निगम बेहद अहम हैं। अभी यहां से सांसद व अधिकतर विधायक भाजपा के ही हैं। इस चुनाव में भाजपा-जजपा साथ मैदान में उतरेंगे या नहीं, इसका फैसला आने वाले दिनों में हो जाएगा। चूंकि, 2024 के चुनाव से पहले शहरी क्षेत्र में यह बड़ा चुनाव होना है।

जजपा के साथ आगे बढ़ने के हक में नहीं भाजपा संगठन
भाजपा का संगठन जजपा के साथ मिलकर 2024 का विधानसभा चुनाव लड़ने के हक में नहीं है। निकाय और पंचायत चुनाव से पहले संगठन की बैठकों में वरिष्ठ नेता और अनेक विधायक अलग चुनाव लड़ने का मशविरा दे चुके हैं। कुछ का तो यह भी कहना है कि जजपा के मंञियों वाले विभागों में कथित घोटालों के आरोप लगने से सरकार की छवि पर असर पड़ा है। यह बात भाजपा आलाकमान के पास भी पहुंची है। बावजूद इसके भाजपा-जजपा का गठबंधन प्रदेश में बरकरार है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।

राहें जुदा करने को लेकर जल्दबाजी नहीं
भाजपा-जजपा में गठबंधन से जुदा होने को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कदम से कदम मिलाकर सरकार चला रहे हैं। संगठन के तौर पर दोनों दलों ने अगले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी तैयारियां तेज की हुई हैं। जजपा नौ दिसंबर को भिवानी में होने वाले अपने चौथे स्थापना दिवस को लेकर फील्ड में डटी है। इस रैली से जजपा की भविष्य की राजनीति के संकेत मिलेंगे।

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