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स्टील के गोदामों से रोकी जाएगी अनाज की बर्बादी, यहां से ली है हरियाणा ने सीख
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 01 Apr 2017 09:28 AM IST
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स्टील के गोदाम
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गेहूं उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल हरियाणा में आने वाले दिनों में अनाज की बर्बादी रोकने का खट्टर सरकार ने नायाब तरीका निकाला है। अब राज्य में स्टील के गोदाम बनाकर अन्न को खराब होने से बचाया जाएगा। सरकार ने मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज चौहान व छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह की साइलोज योजना से यह सीख ली है। खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री कर्णदेव कांबोज योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए दोनों राज्यों का दौरा कर चुके हैं।
इसके बाद स्टील के गोदाम बनाने की टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। पहले चरण में साढ़े नौ लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाए जाएंगे। पांच लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और सहयोगी एजेंसियां, जबकि साढ़े चार लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम भारतीय खाद्य निगम बनाएगा। कर्णदेव कांबोज ने बताया कि प्रदेश में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन अनाज हर साल खुले में रहता है, जिसमें से आधे से अधिक या तो चोरी होता है या फिर धूप और बरसात के चलते बर्बाद हो जाता है।
स्टील के गोदाम बनाकर भंडारण के अंतर को कम किया जाएगा, साथ ही इन गोदामों में लंबे समय तक अनाज सुरक्षित रहेगा। सरकार ने अनाज बर्बाद होने के लिए विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। अनाज चोरी या खराब होने पर अधिकारियों से इसकी भरपाई की जाएगी। अभी तक अनाज सड़ने पर कोई नहीं पूछता था। कागजों में खानापूर्ति कर अधिकारी काम चला लेते थे, जबकि अब बचना मुश्किल होगा। आने वाले दिनों में और गोदाम बनाने पर भी विचार किया जाएगा।
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इसके बाद स्टील के गोदाम बनाने की टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। पहले चरण में साढ़े नौ लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाए जाएंगे। पांच लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और सहयोगी एजेंसियां, जबकि साढ़े चार लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम भारतीय खाद्य निगम बनाएगा। कर्णदेव कांबोज ने बताया कि प्रदेश में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन अनाज हर साल खुले में रहता है, जिसमें से आधे से अधिक या तो चोरी होता है या फिर धूप और बरसात के चलते बर्बाद हो जाता है।
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स्टील के गोदाम बनाकर भंडारण के अंतर को कम किया जाएगा, साथ ही इन गोदामों में लंबे समय तक अनाज सुरक्षित रहेगा। सरकार ने अनाज बर्बाद होने के लिए विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। अनाज चोरी या खराब होने पर अधिकारियों से इसकी भरपाई की जाएगी। अभी तक अनाज सड़ने पर कोई नहीं पूछता था। कागजों में खानापूर्ति कर अधिकारी काम चला लेते थे, जबकि अब बचना मुश्किल होगा। आने वाले दिनों में और गोदाम बनाने पर भी विचार किया जाएगा।
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