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Chandigarh News: वर्क फ्रॉम होम का लालच देकर लाखों की ठगी करने वाले गिरोह का शातिर काबू

Sat, 05 Aug 2023 02:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Aug 2023 02:07 AM IST
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The vicious control of the gang that cheated lakhs by luring work from home
चंडीगढ़। वर्क फ्रॉम होम का लालच देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के एक शातिर को पुलिस ने दिल्ली के रोहिणी के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। बीते 1 जुलाई को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में दर्ज मामले में यह गिरफ्तारी हुई है। साइबर अपराध पुलिस थाने में दी शिकायत में चंडीगढ़ की एक महिला ने कहा था कि उन्हें एक वर्चुअल नंबर से एक व्हाट्सएप संदेश आया था। संदेश भेजने वाली ने खुद को जेब्रा टेकिज सॉल्यूशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सागरिका यादव बताया था। उसने शिकायतकर्ता को कहा कि वर्क फ्रॉम होम के जरिए वह अच्छा पैसा कमा सकती है। इसके लिए सिर्फ उसे कुछ यूट्यूब वीडियो को लाइक और सब्सक्राइब करना है। शुरुआत में कुछ रकम के मुनाफे का लालच देकर उसे एक वेबसाइट पर एक खाता खोलने को कहा गया, जिसे मल्टी ट्रेडिंग एक्सचेंज कंपनी वेबसाइट बताया गया। शिकायतकर्ता को बताया गया कि खाता खोलने के दौरान उसने कुछ गलती कर दी, जिस कारण ग्रुप के अन्य सदस्य काम नहीं कर पा रहे हैं और भारी नुकसान हुआ है। इसके बाद शिकायतकर्ता को कुछ टास्क पूरे करने का झांसा देकर 7,62,000 रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने जांच के दौरान खुफिया जानकारी के आधार पर दिल्ली के रोहिणी निवासी 24 वर्षीय बीटेक छात्र तौफीक आलम को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन और 14 टेलीग्राम खातों की जानकारी मिली। इस तरह शातिर फंसाते थे लोगों को
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जांच में सामने आया कि आरोपी सौरभ सिंह, पूजा मेहरा तथा जेम्स के नाम से टेलीग्राम आईडी चला रहा था। पुलिस का कहना है कि तौफीक आलम कई टेलीग्राम ग्रुप का सदस्य है और वह बैंक खातों की जानकारी चीन और दुबई में बैठे आकाओं को टेलीग्राम हैंडलर के जरिए देता था। पुलिस के मुताबिक इस तरह के अपराध में आरोपी वर्क फ्रॉम होम का लालच देकर पीड़ितों को टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप जॉइन करने के लिए कहते हैं, जिसमें 5 से 10 सदस्य पहले से होते हैं। पीड़ित को एहसास दिलाया जाता है कि वह मुनाफा कमा रहा है, जिसके बाद उसे कुछ रकम में निवेश करने का लालच दिया जाता है। इसके बाद मुनाफे की रकम निकलवाने के लिए और रकम निवेश करने को कहा जाता था। एक बार भारी रकम इकट्ठा होने पर पीड़ित को ग्रुप से हटा दिया जाता था और नए ग्रुप में शामिल होने को कहा जाता था। पीड़ित के खाते से जुड़ी जानकारी गिरोह के दुबई, चीन, इंडोनेशिया और पाकिस्तान में बैठे आकाओं को दी जाती थी और लाखों की ठगी की जाती थी। पुलिस को जांच के दौरान 27 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिसमें करोड़ों रुपये की ट्रांजेक्शन की गई थी। यह खाते निजी बैंकों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले जाते थे।
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