इस खूंखार डाकू से कांपते थे लोग, आज बांच रहे गीता
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वह शख्स आज राजयोगी ब्रह्म कुमार बन कर लोगों को आध्यात्म, गीता व योग की शिक्षा दे रहा है। कलायत के ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय प्रजापिता विश्वविद्यालय में पहुंचे 92 वर्षीय पंचम भाई ने लोगों को गीता का ज्ञान व योग की जानकारी दी तथा अपने अनुभव ‘अमर उजाला’ से सांझे किए।
चौथी तक पढ़े और ऐसे बने डाकू
14 अप्रैल को 1924 को एमपी भिंड के गांव सीमपुरा में जन्मे पंचम उर्फ ब्रह्म कुमार केवल चौथी कक्षा तक पढ़े हैं। वे बताते हैं युवा हुए तो उनके परिवार को सबल लोगों ने बहुत परेशान किया। प्रतिकार लेने के लिए वे डाकू बन गए तथा कुछ ही समय में अपनी एक बड़ी फौज तैयार कर ली।
14 वर्षों के डाकू जीवन में उन पर 100 कत्ल, 200 अगवा, अपहरण व डकैती के मामले दर्ज थे। उन पर सरकार ने उनको जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर एक करोड़ रुपये का इनाम रखा था। तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की सरकार ने उनके ग्रुप को पकड़ने के लिए अनेक आपरेशन चलाए, फोर्स बुलाई तथा हजारों जवान हमें पकड़ने के लिए दिन रात एक किए रहते थे। उसके बावजूद भी उनके गुट का आतंक बढ़ता ही गया। आगरा जैसे शहर भी उनका नाम सुनते ही बंद हो जाते थे।
ब्रह्मा बाबा ने दिखाया सद्मार्ग
पंचम भाई ने बताया कि सभी डाकू मां दुर्गा की साधना करते थे तथा प्रतिदिन कई किलो देसी घी से मां का हवन करते थे। एक बार उन्होंने मां के दर्शनों का संकल्प लिया।
कई दिनों तक मां की अखंड साधना के बाद भी मायूसी ही हाथ लगी तो गुस्से में आकर उन्होंने मां की साधना न करने की प्रतिज्ञा की तथा बंदूक उठा कर नरसंहार के लिए चल दिए। दोपहर करीब 12 बजे उन्हें एक दिव्य स्वरूप के दर्शन हुए तथा उन्हें नरसंहार किए जाने से रोकते हुए कहा कि तुम्हारे जीवन में अब बदलाव का समय आ गया है तथा कुछ समय बाद तुम्हें चैतन्य देवियों का सानिध्य मिलेगा, जो तुम्हें भगवान से मिलाने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।