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Chandigarh News: इसरो के दिए सटीक निशानों से ऑपरेशन सिंदूर में हुआ आतंकियों को खात्मा

Tue, 05 Aug 2025 01:35 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Aug 2025 01:35 AM IST
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The terrorists were killed in Operation Sindoor due to the accurate targeting given by ISRO
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने अंतरिक्ष अनुसंधान और स्टार्टअप अवसरों पर लेक्चर दिया। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी, नवाचार और युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। डॉ. सोमनाथ ने युवाओं से इसरो के साथ जुड़कर अंतरिक्ष मिशनों में योगदान देने का आह्वान किया।
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उन्होंने बताया कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) स्थापित करेगा और 2047 तक चंद्रमा, मंगल व उससे आगे मिशन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि भारत अब अंतरिक्ष में दिशा दे रहा है। स्टार्टअप के लिए अवसर तलाशने हेतु उन्होंने न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड, विक्रम-1 स्काईरूट एयरोस्पेस, पिक्सल, अग्निकूल और सेटश्योर जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया जो लॉन्च वाहन और सेटेलाइट सिस्टम पर इसरो के साथ काम कर रही हैं। इसरो को 45 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट आवंटित है जिसका उपयोग विभिन्न परियोजनाओं में होता है।
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ऑपरेशन सिंदूर में अंतरिक्ष का योगदान
डॉ. सोमनाथ ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में सेटेलाइट डेटा और कावा स्पेस की तकनीक ने अहम भूमिका निभाई। सेटेलाइट्स ने टारगेट क्षेत्र की निगरानी और डेटा विश्लेषण में सहायता की।
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कृषि और मौसम में सेटेलाइट की भूमिका
कृषि निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) के जरिए इसरो लाखों किसानों की मदद कर रहा है। सेटेलाइट्स मौसम पैटर्न, जैसे मानसून और ठंडी हवाओं का विश्लेषण कर फसलों की कटाई का सही समय बताते हैं जिससे पोषक तत्वों की गुणवत्ता बनी रहती है।


पीयू का स्टूडेंट सेटेलाइट प्रोजेक्ट
पंजाब स्केल डेवलपमेंट मिशन की मैनेजर सिमरनजीत कौर ने बताया कि पीयू के भौतिकी विभाग के साथ स्टूडेंट सेटेलाइट प्रोजेक्ट जल्द लॉन्च होगा। यह सेटेलाइट अंतरिक्ष मलबे (स्पेस डेब्री) को एकत्र कर पृथ्वी पर लाएगी जो अंतरिक्ष की बड़ी समस्या का समाधान करेगी। इस प्रोजेक्ट पर एक साल से काम चल रहा है और इसे 2025 के अंत तक शुरू करने की योजना है। यह पंजाब यूनिवर्सिटी की बड़ी उपलब्धि होगी।


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