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पंजाब में जारी रहेगा किसानों का संघर्ष, 18 नवंबर को चंडीगढ़ में होगी संगठनों की बैठक 

Sat, 14 Nov 2020 03:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़/नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़/नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 14 Nov 2020 03:00 AM IST
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The struggle of the farmers will continue in punjab
पंजाब का किसान

केंद्रीय मंत्रियों के साथ दिल्ली में किसान संगठनों की बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन एकता (डकोंदा) के नेता बूटा सिंह बुर्जगिल ने बताया कि किसान संगठनों की तरफ से आंदोलन संबंधी तय की गई रूपरेखा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनका संघर्ष पहले की तरह की जारी रहेगा। वे पंजाब में यात्री ट्रेनों का घेराव करेंगे। मालगाड़ियों को दी गई छूट जारी रहेगी। 

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उन्होंने कहा कि 18 नवंबर को चंडीगढ़ में किसान संगठनों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें 26-27 नवंबर को दिल्ली चलो आंदोलन के लिए पंजाब के किसानों की दिल्ली रवानगी संबंधी रूपरेखा तय की जाएगी। बुर्जगिल ने कहा कि पंजाब के 30 किसान संगठन बीते 45 दिन से जारी आंदोलन को आगे भी जारी रखेंगे और 26-27 नवंबर को देशभर के 500 किसान संगठनों के साथ लाखों किसानों के काफिले के रूप में दिल्ली कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के सामने अब संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने साफ किया कि जब तक तीनों घातक कृषि कानून रद नहीं किए जाते, संघर्ष जारी रहेगा। 
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मंत्रियों ने कृषि कानूनों की खूबियां बताईं, किसान बोले- कानून समझने नहीं आए
सूत्रों के अनुसार, बैठक में केंद्र सरकार की तरफ से पंजाबी भाषा में एक प्रेजेंटेशन दी गई जिसमें तीनों कृषि कानूनों की खूबियों के साथ-साथ नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए किए शुरू की गई योजनाओं की जानकारी दी गई। इसमें कहा कहा गया कि किस तरह 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का वादा मोदी सरकार पूरा करने वाली है। बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और नरेंद्र तोमर ने एनडीए और यूपीए सरकारों के शासनकाल में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) की तुलना भी की।
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इस पर किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे यहां कृषि कानूनों को समझने नहीं आए। उन्हें यह जानना है कि केंद्र सरकार किसानों के बारे में क्या इरादा रखती है। मंत्रियों ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और कृषि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए एमएसपी पर कृषि उपज की खरीद जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कृषि कानून किसानों के हितों के लिए हैं और इसे लेकर सरकार उनसे किसी भी फोरम पर बातचीत के लिए तैयार है।

किसानों को सशक्त बनाने के किए गए हैं सुधार : कृषि मंत्री
कृषि मंत्री ने पंजाब के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से किसानों को सशक्त बनाने के लिए कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों की जानकारी दी। इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के लिए कृषि हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता पर है । उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए कई उपाय कर रही है जिसमें आत्मनिर्भर भारत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नए कृषि कानूनों से न केवल किसानों को अपनी उपज को लाभकारी मूल्य पर बेचने की स्वतंत्रता मिलेगी बल्कि किसानों के हितों की रक्षा भी होगी । बातचीत के दौरान मंत्रियों ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को यह भी बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी प्रणाली पर कृषि उपज की खरीद पहले की तरह जारी रहेगी।


नए कृषि अधिनियम से मंडियों को किसानों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा की गई अन्य पहलों जैसे कृषि अवस्थापना निधि और 10,000 किसान उत्पादक संगठनों के गठन के साथ किसान प्रतिनिधियों को भी अवगत कराया गया।बातचीत के दौरान किसान कल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया कि भारत सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।

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