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पीयू मैनेजमेंट कोर्सेज की सीटें भी रह सकती हैं खाली
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की बड़ी आय मैनेजमेंट कोर्सेज की फीस के जरिये भी होती है लेकिन इस बार कोरोना इस आय को कम कर सकता है। दूसरे राज्यों के स्टूडेंट्स यहां तक पहुंचने में असमर्थ होंगे। वह चाहेंगे कि अपने आसपास के विश्वविद्यालयों में ही दाखिले हो जाएं ताकि वह पढ़ाई जाकर कर सकेंगे।
अब पीयू ऐसी योजना बनाने में जुटा है कि यह सीटें किसी हाल में खाली न रह जाएं। पीयू में एक दर्जन कोर्सेज ऐसे हैं जो मैनेजमेंट के हैं। इनकी फीस एक सेमेस्टर की 50 हजार से लेकर एक लाख तक है। इतनी मोटी फीस विद्यार्थी तभी देंगे जब वह क्लास वर्क का लाभ उठा पाएंगे।
कोविड को लेकर छात्रों में भय
जानकारों का कहना है कि कोविड का पता नहीं कब तक चलेगा। छात्रों में इसको लेकर भय है। देशभर में अपने घरों से दूर पढ़ाई करने वाले छात्र लॉकडाउन में फंस गए थे। वह नहीं चाहेंगे कि फिर ऐसी नौबत आए। ऐसे में वह घर के आसपास के कॉलेज, विश्वविद्यालयों में एडमिशन लेना चाहेंगे। सूत्रों का कहना है कि पीयू इस पर योजना तो बना रहा है लेकिन योजना हवाई हुई तो सीटें खाली रह सकती हैं और पीयू को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों की टीम इस कार्य में लगानी चाहिए जो बेहतर योजना बना सकें।
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अब पीयू ऐसी योजना बनाने में जुटा है कि यह सीटें किसी हाल में खाली न रह जाएं। पीयू में एक दर्जन कोर्सेज ऐसे हैं जो मैनेजमेंट के हैं। इनकी फीस एक सेमेस्टर की 50 हजार से लेकर एक लाख तक है। इतनी मोटी फीस विद्यार्थी तभी देंगे जब वह क्लास वर्क का लाभ उठा पाएंगे।
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कोविड को लेकर छात्रों में भय
जानकारों का कहना है कि कोविड का पता नहीं कब तक चलेगा। छात्रों में इसको लेकर भय है। देशभर में अपने घरों से दूर पढ़ाई करने वाले छात्र लॉकडाउन में फंस गए थे। वह नहीं चाहेंगे कि फिर ऐसी नौबत आए। ऐसे में वह घर के आसपास के कॉलेज, विश्वविद्यालयों में एडमिशन लेना चाहेंगे। सूत्रों का कहना है कि पीयू इस पर योजना तो बना रहा है लेकिन योजना हवाई हुई तो सीटें खाली रह सकती हैं और पीयू को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों की टीम इस कार्य में लगानी चाहिए जो बेहतर योजना बना सकें।
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