चंडीगढ़ स्थापना दिवस: विरासत को सहेजते आगे बढ़ रहा चंडीगढ़, डेढ़ दशक में बदल जाएगी तस्वीर
14 साल के लंबे इंतजार और कई बैठकों के बाद ट्राइसिटी में मेट्रो परियोजना को धरातल पर उतारने की भी तैयारी शुरू कर दी गई है। रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (राइट्स) ने चंडीगढ़ प्रशासन को मेट्रो परियोजना की इंसेप्शन यानी स्थापना रिपोर्ट को हाल ही में मंजूरी प्रदान की है।
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देश का पहला सुव्यवस्थित एवं नियोजित शहर चंडीगढ़ विरासत को सहेजते हुए नई ऊंचाइयों को हासिल कर रहा है। 1966 में स्थापना के समय से लेकर चंडीगढ़ ने कई उतार-चढ़ाव देखे। हालांकि लगभग पांच लाख की आबादी के लिए नियोजित किए गए इस शहर की आबादी अब 12 लाख से ऊपर हो गई है, जिसकी वजह से शहर पर यातायात सहित जनसंख्या का दबाव बढ़ गया है।
सिटी ब्यूटीफुल के नाम से मशहूर आपके सपनों के इस शहर की तस्वीर आने वाले डेढ़ दशक में बदलने जा रही है। शहर के लिए लगभग 16,509 करोड़ रुपये की लागत से मेट्रो परियोजना के लिए डीपीआर के शुरुआती चरण का काम शुरू हो गया है। शहर में यातायात को और सुगम और गतिशील बनाने के लिए एमआरटी यानी मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर काम चल रहा है। मौजूदा सड़क संरचना पर नियो मेट्रो चलाना भी इसी प्रस्तावित योजना का एक हिस्सा है।
ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद 1947 में पंजाब राज्य को भारत और पाकिस्तान में दो भागों में बांट दिया गया था। इसके साथ ही राज्य की पुरानी राजधानी लाहौर पाकिस्तान के भाग में चली गई। ऐसे में भारतीय पंजाब को एक नई राजधानी की आवश्यकता पड़ी। पूर्व स्थित शहरों को राजधानी बदलने में आने वाली बहुत सी कठिनाइयों के चलते एक नए योजनाबद्ध राजधानी शहर की स्थापना का निर्णय किया गया और 1952 में इस शहर की नींव रखी गई। इसके बाद 1 नवंबर 1966 में चंडीगढ़ को यूटी का दर्जा मिला।
उस समय में भारत में चल रही बहुत सी नवीन शहरी योजनाओं में चंडीगढ़ को प्राथमिकता मिली, जिसका मुख्य कारण एक तो नगर की स्थिति और दूसरी वजह तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की निजी रुचि का होना था। राष्ट्र के आधुनिक प्रगतिशील दृष्टिकोण के रूप में चंडीगढ़ को देखते हुए नेहरू ने इस शहर को अतीत की परंपराओं से उन्मुक्त और राष्ट्र के भविष्य में विश्वास का प्रतीक बताया।
शहर के बहुत से ढांचे और इमारतों की वास्तु रचना फ्रांस में जन्मे स्विस वास्तुकार व नगर-नियोजक ली कार्बुजिए ने 1950 के दशक में की थी। कार्बुजिए भी असल में शहर के द्वितीय वास्तुकार थे, जिसका मूल मास्टर प्लान अमरीकी वास्तुकार-नियोजक अल्बर्ट मेयर ने तब बनाया था जब वे पोलैंड में जन्मे वास्तुकार मैथ्यु नोविकी के संग कार्यरत थे। 1950 में नोविकी की असामयिक मृत्यु के चलते कार्बूजिए को परियोजना में स्थान मिला।
2027 में शुरू होगा मेट्रो का पहला चरण
14 साल के लंबे इंतजार और कई बैठकों के बाद ट्राइसिटी में मेट्रो परियोजना को धरातल पर उतारने की भी तैयारी शुरू कर दी गई है। रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (राइट्स) ने चंडीगढ़ प्रशासन को मेट्रो परियोजना की इंसेप्शन यानी स्थापना रिपोर्ट को हाल ही में मंजूरी प्रदान की है। अब जल्द इसकी वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का काम शुरू कर दिया जाएगा।
ट्राइसिटी में दो चरण में मेट्रो और तीन चरण में अन्य सभी काम पूरे होने हैं। ट्राइसिटी मेट्रो परियोजना पर 16,509 करोड़ खर्च होंगे। पहले चरण में मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला में 77 किलोमीटर तक मेट्रो नेटवर्क बिछाने की योजना है, जिसे वर्ष 2027 से 2037 तक पूरा किया जाएगा।
मेट्रो परियोजना का पहला चरण (2027 से 2037)
- सारंगपुर से आईएसबीटी पंचकूला
- रॉक गार्डन से इंडिस्ट्रयल एरिया व चंडीगढ़ एयरपोर्ट होते हुए जीरकपुर आईएसबीटी
- अनाज मंडी चौक से ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर-26
- दूसरा चरण (2037 से आगे)
आईएसबीटी पंचकूला से पंचकूला एक्सटेंशन
- न्यू चंडीगढ़ से सारंगपुर
- एयरपोर्ट चौक से माणकपुर कल्लर
- आईएसबीटी जीरकपुर से आईएसबीटी पिंजौर
पंजाब और हरियाणा की राजधानी एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ उत्तर भारत का दिल है। यह विविध सांस्कृतिक रंगों का शहर है, जहां देशभर के लोग अपने सपने लेकर आते हैं और उन्हें साकार करते हैं। शहर ने कई उतार चढ़ाव देखे और प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मैं चंडीगढ़ के स्थापना दिवस पर शहरवासियों को दिल से बधाई देता हूं। - बनवारीलाल पुरोहित, राज्यपाल के पंजाब एवं चंडीगढ़ प्रशासक।