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जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट अब नगर निगम चंडीगढ़ का हुआ, अफसरों की दलील न आई काम

Sat, 20 Jun 2020 02:36 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 20 Jun 2020 02:36 PM IST
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Jaypee garbage processing plant is now under nagar nigam chandigarh
जेपी गारबेजिंग प्लांट - फोटो : अमर उजाला
नगर निगम ने आखिरकार छह साल बाद जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट को टेकओवर कर लिया। प्लांट के अधिकारियों ने कई दलीलें दीं, टेकओवर करने गई टीम को रोकने का प्रयास किया, लेकिन निगम के अधिकारी अड़े रहे कि स्टे ऑर्डर की लिखित कॉपी दिखाएं। मजिस्ट्रेट की निगरानी में डीसी ऑफिस के रिकवरी कानूनगो विनोद कुमार ने प्लांट पर ताला लगा दिया।
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नगर निगम ने वीरवार को जेपी प्लांट के अधिकारियों को 24 घंटे में टेकओवर करने का नोटिस जारी किया था। शाम साढ़े चार बजे निगम के अधिकारी प्लांट केबाहर पहुंच गए। पांच बजते ही एडिशनल कमिश्नर-1 तिलकराज, एडिशनल कमिश्नर-2 एसके जैन, चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह, एमओएच डॉ. एपी सिंह, लीगल ऑफिसर राकेश कुमार के नेतृत्व में अमला प्लांट पहुंच गया।
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इस दौरान हर एसडीओ के साथ एक फोटोग्राफर लगाया गया था ताकि पूरे सामान की वीडियो रिकॉर्डिंग व फोटो हो सकें। इसके अलावा डीएसपी गुरुमुख सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे।
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प्लांट में असिस्टेंट मैनेजर शैलेंद्र शर्मा और अकाउंट ऑफिसर बृजेश गौड़ भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जिला अदालत ने प्लांट टेकओवर करने के खिलाफ स्टे ऑर्डर दे दिया है।

ऑर्डर अभी टाइप हो रहा है। तब तक प्लांट के मैनेजर एनकेबोहरा व जेपी की ओर से लड़ने वाले वकील भी पहुंच गए। निगम के अधिकारियों ने कहा कि स्टे ऑर्डर की लिखित कॉपी दिखाएं। हम फोन पर किसी से बात नहीं करेंगे। प्लांट के अंदर कचरा प्रोसेस न होने से कचरे का अंबार लगा था। बदबू केकारण वहां खड़ा होना मुश्किल था।

पांच साल से चल रहा था विवाद

साल 2005 में जेपी प्लांट व निगम के बीच अनुबंध हुआ था। कंपनी ने 30 साल तक शहर का कचरा प्रोसेस करने के लिए निगम से समझौता किया। अनुबंध के तहत निगम ने एक रुपये प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से प्लांट को जगह दी। साल 2015 में कंपनी ने कहा कि हमें हर माह निगम टिपिंग फीस दे। इसके साथ ही गीला व सूखा कचरा भी अलग-अलग करके दे।

उसके बाद विवाद गहराया तो 2016 में कंपनी एनजीटी चली गई। एनजीटी में फैसला हुआ कि निगम टिपिंग फीस देगा। उसके बाद प्लांट के अधिकारी गीला व सूखा कचरा अलग-अलग न देने का आरोप लगाने लगे, वहीं निगम पूरा कचरा प्रोसेस न करने का आरोप लगाने लगा। मामला फिर एनजीटी में पहुंचा। फरवरी 2020 में एनजीटी ने निर्देश दिए कि टिपिंग फीस केवल 9 माह के लिए थी। निगम अब टिपिंग फीस नहीं देगा।

प्लांट कौन चलाएगा यह निगम तय करे। उसी माह सदन की बैठक में तय हुआ कि प्लांट को निगम संचालित करेगा। प्लांट को 7 दिन का नोटिस जारी कर बाहर करेंगे, लेकिन प्लांट केअधिकारी जिला अदालत चले गए। कोर्ट के अनुसार प्लांट केअधिकारी 90 दिनों में स्टे ऑर्डर नहीं ला सके। आखिरकार निगम ने प्लांट टेकओवर कर लिया।

शनिवार से प्लांट के कर्मचारी हमारे : एमओएच
निगम ने प्लांट को टेकओवर करने के बाद सभी को बाहर कर दिया। इस पर वहां काम करने वाले कर्मचारियों ने हंगामा कर दिया। उनका कहना था कि हम कई साल से यहां काम कर रहे हैं। हमारा काफी सामान अंदर है। हम क्या करेंगे अब। एमओएच ने सभी कर्मचारियों को समझाया कि अभी उनकेलिए मलोया स्थित जंज घर में रुकने की व्यवस्था की है। निगम उन्हें खाना भी देगा। शनिवार से वह सभी निगम के कर्मचारी होंगे। तब जाकर कर्मचारी माने।

सोशल डिस्टेंसिंग करवाते रहे पुलिसकर्मी

एक ओर निगम के कर्मचारी, वहीं दूसरी ओर प्लांट के कर्मचारी व अधिकारी। बार-बार बहस के दौरान भीड़ इकट्ठी हो जा रही थी। हालांकि, पुलिसकर्मी लगातार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उनकी कोशिश के बावजूद लोग नहीं मान रहे थे। इधर इतने सारे अधिकारियों व गाड़ियों को देखकर लोग भी सड़क पर इकट्ठा हो गए।

मेयर व कमिश्नर ने पहुंचकर हटवाया जेपी प्लांट का नाम
पूरी कार्रवाई होने के बाद मौके पर मेयर राजबाला मलिक व कमिश्नर केके यादव पहुंच गए। मेयर व कमिश्नर ने मुख्य दरवाजे पर ताला लगवाने के बाद जेपी प्लांट के बोर्ड पर नाम मिटाने को कहा। उसके बाद निगम के कर्मचारियों ने काले पेंट से प्लांट का नाम मिटा दिया। वहीं, मौके पर पूर्व मेयर राजेश कालिया भी पहुंच गए।

शहर को स्वच्छ बनाना हमारी जिम्मेदारी है। सदन में जो निर्णय लिया था। उसेआज पूरा कराया है। प्लांट में कचरा प्रोसेस हो ही नहीं रहा था। बदबू के कारण खड़ा होना मुश्किल था। अब नई योजना के तहत प्लांट चलाएंगे।
- राजबाला मलिक, मेयर

प्लांट केअधिकारियों का कहना था कि उन्होंने कोर्ट से स्टे ले लिया है, लेकिन उनके पास लिखित कॉपी ही नहीं है। नोटिस के अनुसार पांच बजे के बाद प्लांट को टेकओवर कर लिया है। प्लांट संचालन के लिए नई रणनीति बन रही है।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम

कचरा प्रोसेस नहीं होने से डड्डूमाजरा के लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था। कचरे का पहाड़ बढ़ रहा था। मेयर व कमिश्नर को धन्यवाद, जो यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया। कचरा प्रोसेस होगा तो यह पहाड़ बड़ा नहीं होगा।
- राजेश कालिया, पूर्व मेयर व वर्तमान पार्षद
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