डेरा सच्चा सौदा के फरमान ने बदले चुनाव के राजनीतिक समीकरण
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पंजाब विधानसभा चुनाव-2017 में जीत के लिए जोड़तोड़ में लगे सभी राजनीतिक दल सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में नतमस्तक हो आए थे। अब डेरे के राजनीतिक विंग ने सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन को समर्थन देने का एलान किया है।
डेरे की इस घोषणा से प्रदेश में अगली सरकार को लेकर जारी विभिन्न ओपिनियन पोल नतीजों पर सवाल खड़ा हो गया है। ओपिनियन पोल के लिए सर्वे करने वाली मीडिया एजेंसियों को अब क्षेत्रवार फिर से राजनीतिक दलों को मिलने वाले वोटों का अनुमान लगाना पड़ेगा।
30 जनवरी को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपने अनुयायियों को एकजुट होने का संदेश दिया था। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि डेरे का राजनीतिक विंग जल्दी ही किसी राजनीतिक दल को समर्थन का एलान कर देगा।
डेरे का दावा है कि बठिंडा, मानसा, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, फिरोजपुर और मोगा समेत पूरे मालवा क्षेत्र में उसके 50 लाख से अधिक समर्थक हैं, जिनमें से 35 लाख डेरा प्रेमी वोटर हैं।
मालवा की 40 सीटों पर हैं डेरे के अनुयायियों का वर्चस्व
इस तरह मालवा की 40-45 विधानसभा सीटों पर डेरा प्रेमियों का खासा प्रभाव है, जो किसी भी पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं। खास बात यह भी है कि पंजाब के राजनीतिक इतिहास में सरकार उसी दल की बनती रही है, जिसने मालवा में सबसे ज्यादा सीटें जीती हों।
जाहिर है, डेरा प्रेमियों के समर्थन से यदि अब शिअद-भाजपा गठबंधन मालवा की 40-45 सीटों पर कब्जा जमा लेती है तो उसे तीसरी बार प्रदेश में सरकार में ज्यादा कठिनाई नहीं आएगी, क्योंकि दोआबा और माझा में भी गठबंधन की कई परंपरागत सीटें हैं।
फिर भी डेरा प्रेमियों के ही समर्थन के बावजूद गठबंधन के लिए यह इतना आसान नहीं रह गया है। हर सीट को गठबंधन को त्रिकोणीय जंग लड़नी है।
उसके सामने कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी है, जिन्हें विभिन्न मीडिया एजेंसियों ने इस बार चुनाव में पहले दो स्थान पर रहने वाली पार्टियां माना है।
डेरा सच्चा सौदा के समर्थन की घोषणा के साथ ही शिअद का पारंपरिक पंथक वोटर नाराज हो गया है। बीते 24 घंटे में ही पंथक सिखों ने कई स्थानों पर गठबंधन के विरोध का एलान कर दिया है।
इस तरह शिअद-भाजपा गठबंधन जहां डेरे के समर्थन से फायदे में दिखाई दे रहा है, वहीं पंथक वोटरों का गुस्सा गठबंधन को नुकसान भी पहुंचा सकता है। वहीं, पंथक वोटर अगर शिअद से अलग हुए तो यह वोटर कांग्रेस या आप में बंट सकते हैं, जिससे इन दो दलों की स्थिति में और सुधार आ सकता है।
जनवरी में पंजाब में ओपिनियन पोल के यह थे नतीजे
यानी, पंजाब में ओपिनियन पोल का सारा गणित डेरे के फरमान से बदल गया है। शिअद-भाजपा गठबंधन ने जहां राहत महसूस की है, वहीं कांग्रेस और आप को अपने वोटों का फिर से हिसाब-किताब लगाना होगा।
जनवरी में पंजाब में ओपिनियन पोल के यह थे नतीजे
मीडिया संगठन ------------------- शिअद-भाजपा गठबंधन ------- कांग्रेस ------- आप ------ अन्य
इंडिया टुुडे-एक्सिस --------------- 11-15 --------------------- 60-65 ------ 41-44 --- 0-2
लोकनीति-एबीपी-सीएसडीएस ----- 50-58 --------------------- 41-49 ------ 12-18 --- 0
टीवी 24 इंडिया ----------------- 20-25 --------------------- 27-35 ------- 70-80 ---- 0
इंडिया ट्रेंडिंग नाउ --------------- 9-14 ----------------------- 16-20 ------- 85-89 ---- 0
हफपोस्ट-सी वोटर -------------- 6-12 ----------------------- 8-14 -------- 94-100 --- 0-3
इन सीटों पर है डेरा प्रेमियों का वर्चस्व
डेरा सच्चा सौदा के प्रेमियों की तादाद जहां मालवा में 50 लाख से अधिक है। इस क्षेत्र में संगरूर, बरनाला, पटियाला, मोहाली, बठिंडा, मानसा, मोगा, फाजिल्का, लुधियाना और फतेहगढ़ साहिब की विधानसभा सीटों पर डेरा प्रेमी निर्णायक वोटर साबित होते हैं।
इन जिलों की हर सीट पर 15-40 हजार वोट डेरा प्रेमियों के ही हैं। इसके अलावा मालवा के बाकी हिस्सों में कई सीटों पर डेराप्रेमियों के वोट 10-20 हजार के बीच हैं, जो किसी भी प्रत्याशी की हार-जीत में उलटफेर करने में सक्षम हैं।