{"_id":"5e3dc81e8ebc3ee5cb233390","slug":"the-city-of-chandigarh-and-its-constructivists-reside-within-me-suresh-seth-chandigarh-news-pkl3657324101","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ शहर और यहां के रचनाधर्मी मेरे भीतर बसते हैं: सुरेश सेठ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ शहर और यहां के रचनाधर्मी मेरे भीतर बसते हैं: सुरेश सेठ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। रीडर्स एंड राइटर्स सोसायटी ऑफ इंडिया और आचार्यकुल चंडीगढ़ ने शुक्रवार को जालंधर से आए वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश सेठ की रचना धर्मिता के 60 वर्ष पूरे होने पर रू-ब-रू कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यह आयोजन सेक्टर 16 के गांधी स्मारक भवन के सभागार में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष केके शारदा और अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर अशोक नादिर ने की।
सुरेश सेठ के व्यक्तित्व व साहित्य पर प्रेम विज, विनोद खन्ना, कैलाश आहलुवालिया, जंग बहादुर गोयल, शशि प्रभा, सुशील हसरत नरेलवी, सुभाष भास्कर आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. देवराज त्यागी ने सभी को धन्यवाद दिया।
अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में सुरेश सेठ ने कहा कि मेरी उड़ान कहानी से उपन्यास, उपन्यास से व्यंग्य तक रही है। जो कुछ देश का आम आदमी झेल रहा है, उसमें रोशनी की लकीरें तलाश करने की कोशिश मेरी रचनाओं में है। जो बात उपन्यास में है, व्यंग्य में है, वही आजकल कविता में है। उन्होंने कहा कि मैं लेखन आखिरी दम तक जारी रखना चाहूंगा।
विज्ञापन
सुरेश सेठ ने कहा कि आदमी के अंदर एक शहर बसता है। मैं भी इसका अपवाद नहीं। मेरे अंदर भी चंडीगढ़ और यहां के रचनाधर्मी चेहरे दिन रात पीछा करते रहते हैं। सुरेश सेठ से अपने संबंधों का जिक्र करते हुए केके शारदा ने कहा कि वे उन्हें वर्षों से जानते हैं और उन्हें साहित्य में बुलंदियों को छूते हुए देखकर अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी भवन में ऐसे कार्यक्रम होते रहेंगे। इस अवसर पर ट्राइसिटी के कई साहित्यकार और अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।
विज्ञापन
सुरेश सेठ के व्यक्तित्व व साहित्य पर प्रेम विज, विनोद खन्ना, कैलाश आहलुवालिया, जंग बहादुर गोयल, शशि प्रभा, सुशील हसरत नरेलवी, सुभाष भास्कर आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. देवराज त्यागी ने सभी को धन्यवाद दिया।
विज्ञापन
अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में सुरेश सेठ ने कहा कि मेरी उड़ान कहानी से उपन्यास, उपन्यास से व्यंग्य तक रही है। जो कुछ देश का आम आदमी झेल रहा है, उसमें रोशनी की लकीरें तलाश करने की कोशिश मेरी रचनाओं में है। जो बात उपन्यास में है, व्यंग्य में है, वही आजकल कविता में है। उन्होंने कहा कि मैं लेखन आखिरी दम तक जारी रखना चाहूंगा।
विज्ञापन
सुरेश सेठ ने कहा कि आदमी के अंदर एक शहर बसता है। मैं भी इसका अपवाद नहीं। मेरे अंदर भी चंडीगढ़ और यहां के रचनाधर्मी चेहरे दिन रात पीछा करते रहते हैं। सुरेश सेठ से अपने संबंधों का जिक्र करते हुए केके शारदा ने कहा कि वे उन्हें वर्षों से जानते हैं और उन्हें साहित्य में बुलंदियों को छूते हुए देखकर अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी भवन में ऐसे कार्यक्रम होते रहेंगे। इस अवसर पर ट्राइसिटी के कई साहित्यकार और अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।