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बेरोजगार हुए सैकड़ों कर्मी...साढ़े 10 हजार वेतन, लॉकडाउन में दो हजार रुपये देकर नौकरी से निकाला

Fri, 08 May 2020 10:52 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 08 May 2020 10:52 AM IST
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Lockdown Increased Unemployment Figures, Employees Expelled to Leave Job
सांकेतिक तस्वीर
लॉकडाउन के दौरान कमर्मचारियों को समय से वेतन देने और नौकरी से नहीं निकालने की गुहार भले ही प्रधानमंत्री लगा रहे हों, लेकिन चंडीगढ़ में हकीकत जुदा है। यहां वेतन का भुगतान किए बिना ही कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है। फैक्टरी मालिक व ठेकेदार कर्मचारियों का वेतन हजम कर रहे हैं। प्रशासन की हेल्पलाइन 112 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कोई मदद नहीं मिल रही। पुलिस ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
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मलोया में रहने वाली निर्मला की बेबसी प्रशासन पर सभी दावों की पोल खोलती है। निर्मला सेक्टर-47सी के एक मॉड्युलर किचन के शोरूम में चाय बनाने का काम करती थीं। लॉकडाउन हुआ तो घर बैठ गईं। कई बार फोन करने पर शोरूम मालिक ने उन्हें दो हजार रुपये दिए जबकि वेतन साढ़े 10 हजार बनता है। पूरा वेतन मांगने पर नौकरी से निकाल दिया। उन्होंने बताया कि वह पिछले 6 साल से उस शोरूम के मालिक के पास काम कर रही थीं। पति की मृत्यु हो चुकी है और घर में चार बेटियां व एक बेटा है।
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घर का खर्च उनके वेतन से ही चलता है। बताया कि मार्च महीने में काम करने के बाद महीना खत्म हुआ तो वह अपने वेतन का इंतजार करती रहीं लेकिन उन्हें मार्च महीने की तनख्वाह नहीं मिली। कई बार फोन करने पर शोरूम के मालिक ने उनसे बैंक खाता मांगा। पहले एक हजार रुपये देने की बात कही। विरोध किया तो बैंक खाते में 2000 रुपये डाले। जब निर्मला ने पूरा वेतन मांगा तो शोरूम मालिक ने नौकरी पर नहीं आने की बात कहकर फोन काट दिया। इस मामले पर प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
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2000 रुपये वेतन मिला, उसमें भी 500 बैंक ने काट लिए

निर्मला ने बताया कि उनके खाते में 2000 रुपये आये, उसमें से भी 500 रुपये बैंक चार्जिंग की वजह से कट गए। निर्मला ने बताया कि जब उन्होंने मालिक ाक ेदोबारा फोन कर बताया कि 2 हजार से उनका खर्चा नहीं चल पाएगा क्योंकि घर का राशन खत्म हो गया है और गैस सिलिंडर भी भरवाना है। इस पर शोरूम मालिक भड़क गया और भेजे हुए पैसों को भी वापस कर देने की बात कही। शोरूम मालिक ने साफ कह दिया कि आगे से नौकरी पर आने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने 112 नंबर पर शिकायत की। पुलिसकर्मी भी आए।

शोरूम मालिक को फोन किया गया तो उसने एक हफ्ते का समय मांगा और कहा कि वह सारा वेतन दे देगा। साथ ही नौकरी से निकालने की बात से भी मुकर गया। निर्मला ने बताया कि अब करीब 2 हफ्ता बीतने को है। पुलिसकर्मियों ने दिया कहते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। शोरूम मालिक फोन नहीं उठा रहा है। अब निर्मला को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। निर्मला ने बताया कि उस शोरूम में अन्य कर्मचारी भी काम करते हैं जिन्हें करीब 2 से 3 महीने की तनख्वाह नहीं मिली है।

ऐसे सैकड़ों कर्मचारी, जो हो गए बेरोजगार
चंडीगढ़ लेबर वेलफेयर बोर्ड की सदस्य ईशा अरोड़ा ने बताया कि मलोया की निर्मला का मामला अकेला नहीं है। शहर में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जिन्हें वेतन नहीं मिला है और मांगने पर उन्हें नौकरी से निकाला गया है। प्रशासन ने मजदूरों के हेल्पलाइन जारी किए लेकिन निर्मला का मामला प्रशासन के दावों की पोल खोलता है कि उन्होंने 112 नंबर पर कॉल किया इसके बावजूद उनकी मदद नहीं की गई। रोजाना लोगों की नौकरियां जा रही हैं, प्रशासन को जल्द बोर्ड के साथ मिलकर ऐसे लोगों की मदद करनी चाहिए।

ईशा ने बताया कि उनके पास कई ऐसे लोगों के फोन आए हैं, जिनका कहना है कि मकान मालिक उन्हें किराये के लिए परेशान कर रहे हैं। कहा कि, कई ऐसे किरायेदार हैं जिनका घर ही आने वाले कियाये से चलता है ऐसे में प्रशासन को इस मामले में दखल देना चाहिए और दोनों वर्गों की मदद करनी चाहिए। मजदूरों के हक में हमने कुछ मांगे तैयार की हैं, जो जल्द ही प्रशासन को सौंपेंगे।
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