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विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेला शुरू: देश का अनोखा चमत्कारी मंदिर, जहां आने से पूरी होती है संतान की मनोकामना!

Sun, 15 Oct 2023 12:26 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 15 Oct 2023 12:26 PM IST
सार

विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेले की मान्यता है कि जो लोग यहां संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगते हैं, उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है। संतान होने के बाद वह अपने बच्चों को लंगूर बनाकर माथा टिकवाते हैं। श्री बड़ा हनुमान मंदिर श्री रामायण कालीन युग से है। इस मंदिर में श्री हनुमान जी की बैठी अवस्था में मूर्ति है।

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Ten Day Langur Mela Begins at Shree Bada Hanuman Mandir in Amritsar
विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेला में पहुंचे भक्त। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अमृतसर के श्री दुर्ग्याणा तीर्थ के पास स्थित श्री बड़ा हनुमान मंदिर में रविवार यानी आज से विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेला शुरू हो गया है। यह मेला 10 दिनों तक चलता है। प्रशासन ने ट्रैफिक की खास व्यवस्था की है ताकि मेले में आने वाले लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़ा। हजारों की संख्या में बच्चे लंगूर की वेशभूषा में इस मंदिर में हर रोज 10 दिनों तक नतमस्तक होने आते हैं। इस मेले की खासियत यह है कि नवरात्र के पहले दिन से शुरू होता है और दशहरे के एक दिन बाद तक चलता है। बड़ी संख्या में लोग लंगूर की ड्रेस लेने आ रहे हैं। मंदिर कमेटी ने भी ड्रेस का इंतजाम किया है।

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क्या है मान्यता 

विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेले की मान्यता है कि जो लोग यहां संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगते हैं, उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है। संतान होने के बाद वह अपने बच्चों को लंगूर बनाकर माथा टिकवाते हैं। श्री बड़ा हनुमान मंदिर श्री रामायण कालीन युग से है। इस मंदिर में श्री हनुमान जी की बैठी अवस्था में मूर्ति है। 

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कहा जाता है कि यह मूर्ति श्री हनुमान जी ने स्वयं बनाई थी। यह वही मंदिर है, जहां लव-कुश और भगवान श्री राम जी की सेना के मध्य युद्ध हुआ था। तब लव-कुश ने इसी मंदिर में श्री हनुमान को वट वृक्ष से बांध दिया था। यह वट वृक्ष आज भी मंदिर परिसर में मौजूद है। जब हनुमान बंधन मुक्त हुए तो श्री राम ने उनको आशीर्वाद दिया कि जहां उनकी संतान का मिलन हुआ है, वहां जो भी प्राणी संतान प्राप्ति की मनोकामना करेगा, पूरी होगी। इसलिए यहां परिवार संतान प्राप्ति की मनोकामना करते हैं। संतान होने के बाद बच्चों को लंगूर बनाकर यहां माथा टेकाने लगाते हैं।
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यहा बच्चे अपने माता-पिता के साथ लगातार 10 दिन तक मंदिर में आकर माथा टेकेंगे। 10 दिनों तक चलने वाले इस मेले का समापन दशहरे के अगले दिन होता है, जब ये लंगूर अपनी विशेष पोशाक को बड़ा हनुमान मंदिर में सौंप देते हैं। लड़के भगवान हनुमान को प्रसन्न करने के लिए 10 दिवसीय उपवास रखते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। ये 10 दिवसीय उपवास दशहरा के बाद समाप्त होता है।

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