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पीयू वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षक बना रहे बीएससी कृषि के प्रश्नपत्र
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षक बीएससी कृषि के पेपर बना रहे हैं। इससे पेपर की गुणवत्ता से लेकर कई चीजें प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों के माध्यम से ही पेपर बनाए जाने चाहिए और चेक होने चाहिए। यह बात मुक्तसर के राजविंदर सिंह व कुलविंदर ने यूजीसी को बताई है। हैरत भी जताई है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को रोककर विशेषज्ञों की टीम बनाकर पेपर तैयार करने की मांग रखी गई है।
यूजीसी को भेजे पत्र में जिक्र किया गया है कि विशेषज्ञ ही अपने विषय को बेहतर समझ सकते हैं। दूसरे विषय के विशेषज्ञ उतना दूसरे विषय पर गौर नहीं कर पाएंगे और न ही गुणवत्ता आ पाएगी। उन्होंने कहा है कि पीयू बीएससी कृषि संचालन के लिए कॉलेजों को मान्यता दे रही है। कॉलेजों में फैकल्टी ही गिनती की है। यही नहीं इन विद्यार्थियों के प्रश्नपत्र बनाने का जिम्मा काफी समय से वनस्पति विज्ञान विभाग को दिया गया है। यहां एक जैक नामक कमेटी इस पर निर्णय लेती है। उनका कहना है कि इस कमेटी में अधिकांश शिक्षक वनस्पति विज्ञान विभाग के ही हैं। कृषि के विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में कृषि विभाग के पेपर वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षकों को बनाने पड़ रहे हैं।
इनसेट --
दोनों ही विभागों में बड़ा अंतर
बीएससी कृषि की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी को रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान के अलावा शस्य विज्ञान, पशुपालन विज्ञान, उद्यान विज्ञान से जुड़ी किताबें पढ़नी पड़ती हैं। इसके लिए बाकायदा एमएमसी होती है और पीएचडी भी। उसके बाद ही डिग्री कॉलेजों में या विश्वविद्यालयों में नौकरी कृषि शिक्षक के रूप में लगती है। वनस्पति विज्ञान के अपने विषय हैं। ऐसे में कृषि का पेपर इस विभाग के शिक्षक कैसे बना सकते हैं? यह सवाल यूजीसी को भेजे गए पत्र में खड़े किए गए हैं। यह भी कहना है कि कॉपियों की जांच भी पेपर बनाने वाले ही कर रहे हैं जबकि दूसरे शिक्षकों के पास कॉपियां जानी चाहिए।
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यह है वनस्पति विज्ञान विभाग की थ्योरी
वनस्पति विज्ञान विभाग का कहना है कि बॉटनी व कृषि मिलते-जुलते विभाग हैं। इसलिए कुछ पेपर यहां के शिक्षक भी बनाते हैं। इस बार तीन विशेषज्ञों को कमेटी में शामिल किया गया है जो कृषि की जानकारी प्रदान करेंगे। कॉपियों की जांच कॉलेजों के शिक्षकों से करवाई जाती है।
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यूजीसी को भेजे पत्र में जिक्र किया गया है कि विशेषज्ञ ही अपने विषय को बेहतर समझ सकते हैं। दूसरे विषय के विशेषज्ञ उतना दूसरे विषय पर गौर नहीं कर पाएंगे और न ही गुणवत्ता आ पाएगी। उन्होंने कहा है कि पीयू बीएससी कृषि संचालन के लिए कॉलेजों को मान्यता दे रही है। कॉलेजों में फैकल्टी ही गिनती की है। यही नहीं इन विद्यार्थियों के प्रश्नपत्र बनाने का जिम्मा काफी समय से वनस्पति विज्ञान विभाग को दिया गया है। यहां एक जैक नामक कमेटी इस पर निर्णय लेती है। उनका कहना है कि इस कमेटी में अधिकांश शिक्षक वनस्पति विज्ञान विभाग के ही हैं। कृषि के विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में कृषि विभाग के पेपर वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षकों को बनाने पड़ रहे हैं।
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दोनों ही विभागों में बड़ा अंतर
बीएससी कृषि की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी को रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान के अलावा शस्य विज्ञान, पशुपालन विज्ञान, उद्यान विज्ञान से जुड़ी किताबें पढ़नी पड़ती हैं। इसके लिए बाकायदा एमएमसी होती है और पीएचडी भी। उसके बाद ही डिग्री कॉलेजों में या विश्वविद्यालयों में नौकरी कृषि शिक्षक के रूप में लगती है। वनस्पति विज्ञान के अपने विषय हैं। ऐसे में कृषि का पेपर इस विभाग के शिक्षक कैसे बना सकते हैं? यह सवाल यूजीसी को भेजे गए पत्र में खड़े किए गए हैं। यह भी कहना है कि कॉपियों की जांच भी पेपर बनाने वाले ही कर रहे हैं जबकि दूसरे शिक्षकों के पास कॉपियां जानी चाहिए।
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यह है वनस्पति विज्ञान विभाग की थ्योरी
वनस्पति विज्ञान विभाग का कहना है कि बॉटनी व कृषि मिलते-जुलते विभाग हैं। इसलिए कुछ पेपर यहां के शिक्षक भी बनाते हैं। इस बार तीन विशेषज्ञों को कमेटी में शामिल किया गया है जो कृषि की जानकारी प्रदान करेंगे। कॉपियों की जांच कॉलेजों के शिक्षकों से करवाई जाती है।