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बुलंदी पर बेदी...सोच को मिली ‘चिंगारी’ और कनाडा-ऑस्ट्रेलिया में दस कॉलेज खोल अलख जगाई

Mon, 10 Feb 2020 03:41 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 10 Feb 2020 03:41 PM IST
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Tashan, NRI Raminder Jot Singh Bedi Success Story
कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए रमिंद्रजोत सिंह - फोटो : अमर उजाला
कब तक पैरों से धूल फेंकते रहोगे..कब तक दूर तारे को देखते रहोगे, तुम जरूर तारा बनकर चमकोगे..अगर अथक प्रयास करते रहोगे...। इन शब्दों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाने वाले गुरुनानक देव जी के वंशज रमिंदरजोत सिंह सिंह बेदी आज ऑस्ट्रेलिया व कनाडा में उन बुलंदियों पर पहुंच चुके हैं, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।
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पंजाब के सीमावर्ती इलाके डेरा बाबा नानक के सरकारी स्कूल में 12वीं की शिक्षा ग्रहण कर 19 साल पहले एक विद्यार्थी के रूप में ऑस्ट्रेलिया पहुंचे बेदी आज ऑस्ट्रेलिया व कनाडा में कई कॉलेजों के मालिक हैं और पंजाब का नाम रोशन कर रहे हैं। रमिंदरजोत बेदी बताते हैं कि उनकी पीढ़ी गुरुनानक देव जी के वंश से है।
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डेरा बाबा नानक में उनके परिवार की इसीलिए मान्यता भी है। वहां सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण की तो यही इच्छा थी कि कुछ ऐसा करना है कि दुनिया देखे। शिक्षा तो हमें श्री गुरुनानक देव जी से ही मिली थी कि किरत करो...। 12वीं पास की तो डेरा बाबा नानक से चंडीगढ़ आ गया। सरकारी कॉलेज चंडीगढ में बीए में दाखिला ले लिया।
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चंडीगढ़ आने के बाद देखा कि दुनिया कितनी मेहनत करती है और आगे निकल रही है। बस चंडीगढ़ ने मेरे अंदर चिंगारी फूंक दी। बीए पास करने के बाद नजरिया बदल चुका था और 2000 में उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया चला गया। इस दौरान सारी प्रक्रिया से निकला तो काफी कुछ सीखा।

मसलन विदेशी एजुकेशन में कैसे काम होता है, स्टूडेंट्स को क्या क्या करना चाहिए, क्या सीखना चाहिए?  वहां पर पीआर लेने के बाद अब मेरा मकसद वहां पर एक सफल बिजनेस खड़ा करना था, जिसके लिए 2005 में एक पेट्रोल पंप व स्टोर खोला और उसको चलाया।

पंजाबी युवाओं को भटकने से बचाया

2006 में एक दिन ख्याल आया कि पंजाबी युवा क्यों अवैध रूप से विदेशों में जाते हैं। क्यों न वहां से विद्यार्थियों को कानूनी ढंग से ऑस्ट्रेलिया स्टडी के लिए लाया जाए। मेलबोर्न में एक कॉलेज किराये पर लिया, तब वहां पर महज 100 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे लेकिन एक साल में ही वहां संख्या 700 तक पहुंच गई। इसके बाद एक अंदर हौसला पैदा हो गया।

इसके बाद एक और कैंपस खोला, जहां की शुरुआती संख्या एक हजार थी। 2007 में ही अपनी जमीन खरीदकर सनशाइन कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट की स्थापना की और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। ब्रिसबेन, सिडनी, मेलबोर्न के अलावा फिर कनाडा का रुख किया। वहां वैंकुवर, टोरंटो में जाकर कॉलेज खोले और सफलापूर्वक चलाए।

आज दोनों देशों में 10 कॉलेज चल रहे हैं, जिनमें क्वालिटी ऑफ एजुकेशन दी जा रही है। 2011 में लुधियाना की रवलीन कौर बेदी के साथ शादी करने वाले रमिंदरजोेत बेदी ऑस्ट्रेलिया में अपने नाम का ध्वज इस कदर फहरा चुके हैं कि वहां के पीएम 2017 में अपने भारत दौरे के दौरान उनको साथ लेकर आए थे।

ऐसा कुछ न करें कि विदेशी धरती पर देश का नाम खराब हो

बेदी कहते हैं कि हम पंजाबी हैं। जब हम विदेशों में जाते हैं तो भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए विद्यार्थी जो भारत से आते हैं तो हमेशा मेरा पहला मैसेज उनको होता है कि हम अपने देश को यहां पर रिप्रेजेंट कर रहे हैं, अगर कुछ गलत करेंगे तो हमारे देश का नाम खराब होगा।

मेरे गांव के स्कूल को ऊंचा उठाना मेरा सपना...
बेदी का कहना है कि मेरा सपना है कि मेरे डेरा बाबा नानक के सरकारी स्कूल का स्तर ऊंचा हो। इसलिए वहां के सरकारी स्कूलों को काफी कुछ दिया है और काफी कुछ करने की योजना है। ताकि बच्चे अच्छी शिक्षा लेकर आगे बढ़ें। डेरा बाबा नानक के सरकारी स्कूल के लिए आज भी जो मांग आती है तो बिना देरी किये वह तत्काल उसको पूरा करते हैं।
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