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अमेरिका में छाए भारत के सुशांत आनंद, पानी पर कर रहे हैं रिसर्च, सरकार ने दिए 5 लाख डॉलर

Sun, 23 Feb 2020 02:11 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 23 Feb 2020 02:11 PM IST
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Tashan, NRI Doctor Sushant Anand Success Story from America
सुशांत आनंद - फोटो : अमर उजाला
एपीजे स्कूल के एक विद्यार्थी सुशांत आनंद ने अमेरिका में न केवल अपने स्कूल का, बल्कि पूरे भारत का डंका बजा दिया है। शिकागो के इलियांस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत्त जालंध निवासी डॉ. सुशांत आनंद को अमेरिका सरकार ने रिसर्च के लिए पांच लाख 30 हजार डॉलर दिये हैं। पानी पर रिसर्च करना सुशांत आनंद का जुनून है और वे इन दिनों अमेरिका में नई रिसर्च कर रहे हैं। 
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जालंधर से एपीजे स्कूल से 12वीं की कक्षा पास करने के बाद सुशांत का सपना एक इंजीनियर बनने का था और ऐसा कुछ कर दिखाने का था जिसके बारे में लोगों ने सोचा भी न हो। सुशांत ने खड़कपुर आईआईटी से मेकेनिकल में डिग्री व मास्टर डिग्री हासिल की और अमेरिका से पीएचडी कर उनके नाम के आगे डॉ. लग गया। बॉस्टन एमआईटी से पीएचडी के दौरान ही सुशांत ने ठान लिया था कि वह वाटर के उपर रिसर्च करेगा।
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शिकागो के ईलीन्यॉस विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर की जॉब मिलने के बाद सुशांत का मुख्य टारगेट रिसर्च था। सुशांत की इसी कसक ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। 2013 में सुशांत ने ब्रैंको वुईस फैलोशिप अवार्ड हासिल किया, जोकि स्विस फैडरल इंस्टीट्यूट ज्युरिक ने दिया। सुशांत ने पानी के उपर रिसर्च की और उन लोगों के लिए फायदेमंद थी, जो लोग पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे थे।
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नेशनल साइंस फाउंडेशन फेकल्टी अर्ली करियर अवॉर्ड से पुरस्कृत

डॉ. सुशांत आनंद को 1 अप्रैल 2019 को नेशनल साइंस फाउंडेशन फेकल्टी अर्ली करियर अवॉर्ड से पुरस्कृत किया गया है। डॉ. सुशांत को अवॉर्ड अमेरिका की तरफ से वाटर बेस्ड कंडें सेशन रिसर्च के लिए दिया गया। फ्लूडिक रिसर्च करके कंडें सेशन केमिकल तैयार किया है, जोकि माइनस 35 डिग्री में एयर क्त्रसफ्ट के शीशे पर फॉग कंट्रोल कर सकता है। जिसकी अमेरिका में खासी कमी महसूस की जा रही थी।

डॉ. सुशांत आनंद ने बताया कि वे काफी समय से फ्लूडिक प्रोजेक्टों पर काम कर रहे हैं। पानी जब सीधे हवा के संपर्क में आता है तो वह फॉग का रूप धारण कर लेता है, जिस कारण शीशों पर फॉग जम जाती है और व्हीकल का वेट भी बढ़ जाता है। अमेरिका के कई इलाकों में यह दिक्कत आम थी, सर्दी के सीजन में तो बुरा हाल हो जाता था।

सर्दी के सीजन में फॉग की समस्या को प्रमुख रखते हुए कंडें सेशन की रिसर्च की और केमिकल तैयार किया, जो क्त्रसफ्ट के वाइपर और गाड़ियों के शीशों पर कोटिंग कर देता है। इसके बाद शीशे पर फॉग नहीं ठहरती। इससे दुर्घटना का खतरा नहीं होता। शिकागो में यूनिवर्सिटी में ?उनको सरकार की तरफ से अलग लेबोरेटरी दी गयी है, जिसका नाम उनहोंने आनंद रिसर्च लैब रखा हुआ है।

युवाओं को दिए सफलता के मंत्र

अमर उजाला के साथ बातचीत में डॉ. सुशांत आनंद ने बताया कि उनकी आगे रिसर्च जारी है और अभी काफी कुछ करना है। नई रिसर्च शिकागो में उनकी टीम द्वारा की जा रही है। भारत के युवाओं को उनका यही संदेश है कि वह ज्यादा से ज्यादा समस्याओं को सॉल्व करें और हर समस्या को एक चुनौती लेकर कार्य करें। अपने जीवन में कुछ नया करने की जरूर ठानकर चले।

बेटा तो बचपन से ही कुछ अलग करना चाहता था
पेशे से शिक्षक रह चुकी नीलम आनंद का कहना है कि उनका बेटा तो बचपन से अलग ब्रेन का था। वह सबसे अलग था, उसमें कुछ नया करने का जुनून सवार रहता था। जब तक कुछ नया न कर ले चैन से नहीं बैठता था। मुझे ही नहीं अपितु पूरे भारत को सुशांत पर गर्व है। अभी काफी कुछ नया करने जा रहा है जो लोगों के लिए काफी फायदेमंद होगा।
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