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Chandigarh: चंडीगढ़ में हर साल लगाए जाते हैं ढाई लाख पौधे, इनमें से 90 प्रतिशत बढ़ाते हैं हरियाली

Mon, 01 Aug 2022 04:02 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 01 Aug 2022 04:02 PM IST
सार

भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) की इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021 के अनुसार चंडीगढ़ के ग्रीन कवर (हरियाली क्षेत्र) में करीब चार फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ में कुल ग्रीन कवर एरिया 46.25 फीसदी था जो दो साल में बढ़कर 50.05 फीसदी पहुंच गया है।

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Target has been set to plant about 2.80 lakh saplings in Chandigarh
पेड़ - फोटो : social media

विस्तार

चंडीगढ़ अपनी हरियाली के लिए जाना जाता है। हर साल मानसून में पौधे रोपकर वन विभाग, नगर निगम, इंजीनियरिंग विभाग और समाजसेवी संस्थाएं इसमें चार चांद लगाती हैं। इन सभी को मिलाकर हर साल लगभग ढाई लाख पौधे रोपे जाते हैं। इनमें से 90 प्रतिशत पौधे शहर के ग्रीन एरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। इस बार शहर में लगभग 2.80 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है।

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उप वन संरक्षक डॉ. अब्दुल कय्यूम ने बताया कि वन विभाग ने 80 हजार पौधे रोपने का लक्ष्य रखा है, वहीं 75 हजार पौधे बांटे जाएंगे। इनके अलावा शेष पौधे नगर निगम और इंजीनियरिंग विभाग लगाएगा। चंडीगढ़ में अब यहां के पर्यावरण के अनुकूल पौधे रोपे जा रहे हैं जिसमें फलदार पौधे ज्यादा होते हैं। इनमें नीम, पीपल, शहतूत, जामुन और कटहल प्रमुख हैं। जो पौधे रोपे जाते हैं उनकी देखभाल के लिए विशेष ध्यान रखा जाता है। वनों में पौधों को जानवर नुकसान न पहुंचाएं इसके लिए उसे पूरी तरह से सुरक्षित किया जाता है। 

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हर साल बढ़ रहा ग्रीन कवर एरिया

भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) की इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021 के अनुसार चंडीगढ़ के ग्रीन कवर (हरियाली क्षेत्र) में करीब चार फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ में कुल ग्रीन कवर एरिया 46.25 फीसदी था जो दो साल में बढ़कर 50.05 फीसदी पहुंच गया है। इसी तरह वर्ष 2017 की रिपोर्ट में चंडीगढ़ का कुल ग्रीन कवर एरिया 41.11 फीसदी था। इससे साफ है कि चंडीगढ़ में हरियाली का क्षेत्र बढ़ा है। जंगल और सड़क के किनारे लगे पेड़ों की संख्या में इजाफा हुआ है। पर्यावरण अधिकारियों का कहना है कि शहर में जिस तरह से विकास कार्यों का दबाव है उस हिसाब से सिटी के ग्रीन कवर का बढ़ाना एक चुनौती है जिसे मानसून में पौधे रोपकर पूरा करते हैं। आंकड़ों के अनुसार देश में पिछले दो सालों में वन क्षेत्र में 2,261 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है। 

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चंडीगढ़ का कुल वन क्षेत्र

कुल वन क्षेत्र- 3245.30 हेक्टेयर
सुखना वन्य जीव अभयारण्य- 2610.99 हेक्टेयर
लेक रिजर्व फॉरेस्ट - 105.57 हेक्टेयर
सुखना चो रिजर्व फॉरेस्ट - 387.12 हेक्टेयर
पटियाला की राव - 136.19
मनीमाजरा में - 5.53

पौधे से ज्यादा नेमप्लेट लगाने पर होता है खर्च

पर्यावरणविद प्रभुनाथ शाही ने कहा कि उन्होंने विभाग के साथ काम किया है। 100 रुपये का पौधा लगाने पर 500 रुपये की नेम प्लेट लग जाती है। उसके बाद वह कबाड़ में चली जाती है। नई पौधे के साथ फिर नई नेमप्लेट बनती है। इससे बेहतर है कि अच्छी गुणवत्ता वाला पौधा रोपा जाए। पहले शहर में खेर के पेड़ों की भरमार थी। आज आप बताए वह पेड़ कहां हैं। नए पौधे रोपने के साथ पुराने पौधों का ध्यान रखना भी जरूरी है। विभाग हर साल चंडीगढ़ ग्रीन एक्शन प्लान पर काम करता है, उसमें पुराने पौधों का डाटा क्यों नहीं देता कि कितने पौधे बचे। 

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