{"_id":"5d87d9398ebc3e014c4b5b95","slug":"take-medicine-regularly-and-defeat-cml-cancer-chandigarh-news-pkl351508836","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नियमित दवाई खाकर सीएमएल कैंसर को मात दे सकते हैं, मरीजों के सवाल-एक्सपर्ट के जवाब, पढ़ें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नियमित दवाई खाकर सीएमएल कैंसर को मात दे सकते हैं, मरीजों के सवाल-एक्सपर्ट के जवाब, पढ़ें
Mon, 23 Sep 2019 02:18 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2019 02:18 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन के हीमेटोलॉजी यूनिट की ओर से वर्ल्ड क्रोनिक मायलोइड ल्यूकेमिया (सीएमएल) दिवस मनाया गया। इस मौके पर हजार से ज्यादा मरीज मौजूद रहे। इन मरीजों ने पीजीआई में हुए इलाज के अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों से कई सवाल भी पूछे गए जिनका डाक्टरों ने विस्तार से जवाब दिए।
करीब चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बातें निकलकर सामने आईं हैं, जो मरीजों के लिए काफी लाभदायक साबित होंगी। हीमेटोलॉजी यूनिट के विशेषज्ञों ने कहा कि सीएमएल कैंसर से पीड़ित मरीजों को डाक्टर जो दवा बताएं, उसे नियमित रूप से खाना चाहिए।
यदि मरीज दवाएं खाते हैं तो वे कैंसर को मात दे सकते हैं। पीजीआई में आने वाले 50 फीसदी मरीजों की दवाएं बंद हो चुकी हैं। जिन मरीजों ने दवा खाने में लापरवाही बरती है, उनका मर्ज कम होने के बजाय बढ़ता गया है और उसे काबू कर पाना मुश्किल हुआ है।
विज्ञापन
इस मौके पर पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. जगतराम, पूर्व डायरेक्टर डा. बीके सिंह और पूर्व प्रो. बीके शर्मा मौजूद रहे। इस दौरान डाक्टर और मैक्स फाउंडेशन के अधिकारियों ने केक भी काटा।
कार्यक्रम में शामिल महिला अलका ने बताया कि उन्हें साल 2013 में पता चला था कि वे सीएमएल से पीड़ित हैं।
पीजीआई में उन्होंने डाक्टर पंकज मल्होत्रा को दिखाया। उन्होंने जांच के बाद दवा शुरू कर दी। एक भी दिन दवा खाने में गैप नहीं हुआ। फैमिली ने खूब सपोर्ट दिया। साल 2018 में डाक्टर ने दवा बंद कर दी। एक साल हो चुका है और बिना दवा के वह पूरी तरह से ठीक हैं।
सुनीता बंसल ने बताया कि वह साल 2013 में इस बीमारी से पीड़ित हुई थीं। पीजीआई में इलाज चला। अब दवा बंद हो चुकी है। सुनीता ने भी रेगुलर दवाई खाई और समय-समय पर टेस्ट भी करवाए।
विज्ञापन
करीब चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बातें निकलकर सामने आईं हैं, जो मरीजों के लिए काफी लाभदायक साबित होंगी। हीमेटोलॉजी यूनिट के विशेषज्ञों ने कहा कि सीएमएल कैंसर से पीड़ित मरीजों को डाक्टर जो दवा बताएं, उसे नियमित रूप से खाना चाहिए।
विज्ञापन
यदि मरीज दवाएं खाते हैं तो वे कैंसर को मात दे सकते हैं। पीजीआई में आने वाले 50 फीसदी मरीजों की दवाएं बंद हो चुकी हैं। जिन मरीजों ने दवा खाने में लापरवाही बरती है, उनका मर्ज कम होने के बजाय बढ़ता गया है और उसे काबू कर पाना मुश्किल हुआ है।
विज्ञापन
इस मौके पर पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. जगतराम, पूर्व डायरेक्टर डा. बीके सिंह और पूर्व प्रो. बीके शर्मा मौजूद रहे। इस दौरान डाक्टर और मैक्स फाउंडेशन के अधिकारियों ने केक भी काटा।
कार्यक्रम में शामिल महिला अलका ने बताया कि उन्हें साल 2013 में पता चला था कि वे सीएमएल से पीड़ित हैं।
पीजीआई में उन्होंने डाक्टर पंकज मल्होत्रा को दिखाया। उन्होंने जांच के बाद दवा शुरू कर दी। एक भी दिन दवा खाने में गैप नहीं हुआ। फैमिली ने खूब सपोर्ट दिया। साल 2018 में डाक्टर ने दवा बंद कर दी। एक साल हो चुका है और बिना दवा के वह पूरी तरह से ठीक हैं।
सुनीता बंसल ने बताया कि वह साल 2013 में इस बीमारी से पीड़ित हुई थीं। पीजीआई में इलाज चला। अब दवा बंद हो चुकी है। सुनीता ने भी रेगुलर दवाई खाई और समय-समय पर टेस्ट भी करवाए।
मरीजों की ओर से पूछे गए सवाल और डॉक्टरों ने दिए जवाब
सवाल : बोन मैरो टेस्ट करवाना क्यों जरूरी होता है?
जवाब : बोन मैरो से बीमारी की स्टेज का पता चलता है। स्टेज के मुताबिक दवाओं का डोज दिया जाता है।
सवाल : दवा खाने से पेट में गैस बनती है?
जवाब : गोली को गिलास में डाल दें और जब वह पूरी तरह से घुल जाए, तब उसे पी सकते हैं।
सवाल : क्या यह बीमारी साथ खाना खाने या सोने से भी हो सकती है?
जवाब : यह बीमारी अनुवांशिक नहीं है। किसी के खाने या सोने से नहीं हो सकती।
सवाल : क्या बीमारी होने पर फैमिली प्लानिंग कर सकते हैं?
जवाब : बिल्कुल कर सकते हैं, लेकिन इस बारे में डाक्टर को जरूर बताएं। दवा का असर बच्चे पर पड़ सकता है। फीड के दौरान भी इस बारे में देखना होगा।
सवाल : यदि शहर से बाहर हैं तो वहां दवा कैसे मिलेगी?
जवाब : ये दवाएं डाक्टरों के परामर्श से ही मिलती हैं। पीजीआई का कार्ड जरूर रखें। यदि बाहर जाना है तो एडवांस में ही दवा रख लें।
सवाल : सीएमएल इलाज के दौरान क्या अल्टनेटिव मेडिसिन ले सकते हैं?
जवाब : बिना पूछे मत लें। संभव है कि अल्टरनेटिव मेडिसिन सीएमएल की दवाओं की क्षमता कम कर सकती है और बढ़ा भी सकती है।
सवाल : कुछ दवाइयां अब भी महंगी हैं। क्या वे सस्ती होंगी?
जवाब : कुछ दवाओं के पेटेंट का समय खत्म हो रहा है। संभव है कि साल 2020 से कुछ दवाइयां सस्ती हो जाएं।
(पैनल में डा. गौरव प्रकाश, डा. शानो, डा. दीपेश, डा. अलका और डा. अरिहंत शामिल थे।)
जवाब : बोन मैरो से बीमारी की स्टेज का पता चलता है। स्टेज के मुताबिक दवाओं का डोज दिया जाता है।
सवाल : दवा खाने से पेट में गैस बनती है?
जवाब : गोली को गिलास में डाल दें और जब वह पूरी तरह से घुल जाए, तब उसे पी सकते हैं।
सवाल : क्या यह बीमारी साथ खाना खाने या सोने से भी हो सकती है?
जवाब : यह बीमारी अनुवांशिक नहीं है। किसी के खाने या सोने से नहीं हो सकती।
सवाल : क्या बीमारी होने पर फैमिली प्लानिंग कर सकते हैं?
जवाब : बिल्कुल कर सकते हैं, लेकिन इस बारे में डाक्टर को जरूर बताएं। दवा का असर बच्चे पर पड़ सकता है। फीड के दौरान भी इस बारे में देखना होगा।
सवाल : यदि शहर से बाहर हैं तो वहां दवा कैसे मिलेगी?
जवाब : ये दवाएं डाक्टरों के परामर्श से ही मिलती हैं। पीजीआई का कार्ड जरूर रखें। यदि बाहर जाना है तो एडवांस में ही दवा रख लें।
सवाल : सीएमएल इलाज के दौरान क्या अल्टनेटिव मेडिसिन ले सकते हैं?
जवाब : बिना पूछे मत लें। संभव है कि अल्टरनेटिव मेडिसिन सीएमएल की दवाओं की क्षमता कम कर सकती है और बढ़ा भी सकती है।
सवाल : कुछ दवाइयां अब भी महंगी हैं। क्या वे सस्ती होंगी?
जवाब : कुछ दवाओं के पेटेंट का समय खत्म हो रहा है। संभव है कि साल 2020 से कुछ दवाइयां सस्ती हो जाएं।
(पैनल में डा. गौरव प्रकाश, डा. शानो, डा. दीपेश, डा. अलका और डा. अरिहंत शामिल थे।)