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सरकार के फरमान को हाईकोर्ट ने पलटा, वन टाइम सेटलमेंट स्कीम का फायदा उठाने वाले जा सकते हैं कोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Updated Wed, 11 Jul 2018 09:47 AM IST
हाईकोर्ट
हाईकोर्ट - फोटो : SELF
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सरकार ने एन्हांसमेंट के भुगतान के लिए निकाली गई वन टाइम सेटलमेंट स्कीम का लाभ देने के लिए सेक्टरवासियों पर कोर्ट नहीं जाने की शर्त लगाई थी। इस फरमान को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पलट दिया है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि सेक्टरवासियों को कानूनी अधिकार को प्रतिकूल तौर पर प्रभावित किए बगैर स्कीम का लाभ दिया जाएगा। यह फैसला प्रदेश के 16 जिलों के सेक्टरवासियों के लिए राहत लेकर आया है। 
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रोहतक सेक्टर-1 की आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष कदम सिंह अहलावत ने सरकार की कोर्ट नहीं जाने की शर्त के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में तीन जुलाई को याचिका डाली थी। छह जुलाई को इस पर हाईकोर्ट ने फैसला दिया और 10 जुलाई को हस्ताक्षर के बाद कदम सिंह अहलावत को आदेश की प्रति मिली। न्यायाधीश सूर्यकांत और सुदीप अहलुवालिया ने याचिका पर फैसला दिया कि याचिकाकर्ता और आरडब्ल्यूए वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत बकाए का भुगतान कर सकते हैं। साथ ही हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को यह राशि सेक्टरवासियों के कानूनी अधिकार प्रभावित किए बगैर स्वीकार भी करनी होगी।

यानी सेक्टरवासियों को स्कीम का लाभ उठाने पर कोर्ट नहीं जाने की बात लिखकर देने की जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ता कदम सिंह अहलावत ने कहा कि इस फैसले से राज्य के 16 जिलों के सभी 44 सेक्टरों के निवासियों को राहत मिली है। 

यह थी स्कीम के तहत सरकार की शर्त
एन्हांसमेंट पर सरकार की ओर से वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लाई गई थी। इसके तहत किसी भी सेक्टरवासी की एन्हांसमेंट की कुल रकम पर सरकार की ओर से 40 फीसदी की छूट दी जा रही थी। इस स्कीम का लाभ 15 जुलाई तक उठाया जा सकता है, लेकिन इसके साथ ही सरकार की ओर से शर्त रखी गई कि जो भी इस स्कीम का लाभ उठाएगा, उसे लिखकर देना होगा कि वह एन्हांसमेंट को लेकर भविष्य में कभी कोर्ट नहीं जाएगा। 

लिखकर देना संवैधानिक अधिकारों के विपरीत 
याचिकाकर्ता कदम सिंह अहलावत ने बताया कि सेक्टर-1 आरडब्ल्यूए के एन्हांसमेंट पर कोर्ट ने फैसला 2003 में दिया, लेकिन एन्हांसमेंट नोटिस 2018 में दिए गए और 15 फीसदी का ब्याज लगा दिया, जो बहुत ज्यादा है। साथ ही प्लॉट धारकों की एन्हांसमेंट की गणना में कॉमन प्लेस यानी स्कूल, पार्क, मार्केट आदि की भूमि को शामिल कर लिया गया, जोकि गलत गणना है। यही नहीं सरकार एन्हांसमेंट के लिए नई पॉलिसी लाने जा रही है।

कोर्ट नहीं जाने की बात लिखकर देना संवैधानिक अधिकारों के विपरीत है। भले ही कोई सेक्टर वासी स्कीम का लाभ ले, लेकिन गलत गणना, अधिक ब्याज दर के खिलाफ कोर्ट की शरण ले सकता है। नई पॉलिसी का भी लाभ लेने का विकल्प सेक्टर वासी के पास खुला रहेगा। इसका लाभ नहीं मिलने पर भी सेक्टरवासी कोर्ट की शरण ले सकते हैं।

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