{"_id":"58c055ed4f1c1b6d43dc70b6","slug":"tagore-theatre-chandigarh-event-sector-18-thirunangai","type":"story","status":"publish","title_hn":"जब राजा को पता लगा कि उसकी बेटी है किन्नर, तो देखिए क्या हुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जब राजा को पता लगा कि उसकी बेटी है किन्नर, तो देखिए क्या हुआ
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 09 Mar 2017 09:34 AM IST
विज्ञापन
थिरूनंगाई में दिखाया किन्नराें का जीवन संघर्ष
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवता की बेटी और मैं क्याें नहीं दो कहानियाें को मिलकर थिरूनंगाई नाटक का मंचन बुधवार को टैगोर थिएटर में किया गया। इस नाटक के साथ ही तीन दिन से चल रहे रंगभोर-2017 फेस्टिवल का समापन हुआ। नाटक किन्नराें की जिंदगी पर आधारित रहा। समाज में उन्हें किस तरीके से समझा जाता है, वह किस ढंग से जीते है उसे बताया गया। इस नाटक को महेंद्र भीष्म ने लिखा है और चक्रेश कुमार ने डायरेक्ट किया है।
कहानी में राजा के घर में लड़की जन्म लेती है, जिसका नाम सोना है जब वो चार साल की हो जाती है तो जगतराज को पता चलता है सोना किन्नर है, तो वो उसको मारने का हुक्म दे देता है, लेकिन दीवान उसे मारने की बजाए किन्नरों के डेरे में छोड़ देता है। वहां उसे चंदा नाम से बुलाया जाने लगता है। बड़ी होने पर उसे पता चलता है कि उसके किन्नर होने पर उसके मां बाप भी उसे छोड़ देते है। यह जानकार उसे दुख होता है।
वह ठान लेती है कि अपने मां-बाप से जरूर मिलेगी। इसी बीच उसके जीवन में मनीष नाम का लड़का आता है, जो उसे प्यार करता है और हर कदम पर उसकी मदद करता है। जब चंदा अपने मां-बाप से मिलने के लिए जाती है तो मां-बाप उसका विरोध करते है, लेकिन बाद में उसे स्वीकार कर लेते है और मनीष के साथ उसकी शादी करवा देते है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कहानी में राजा के घर में लड़की जन्म लेती है, जिसका नाम सोना है जब वो चार साल की हो जाती है तो जगतराज को पता चलता है सोना किन्नर है, तो वो उसको मारने का हुक्म दे देता है, लेकिन दीवान उसे मारने की बजाए किन्नरों के डेरे में छोड़ देता है। वहां उसे चंदा नाम से बुलाया जाने लगता है। बड़ी होने पर उसे पता चलता है कि उसके किन्नर होने पर उसके मां बाप भी उसे छोड़ देते है। यह जानकार उसे दुख होता है।
विज्ञापन
वह ठान लेती है कि अपने मां-बाप से जरूर मिलेगी। इसी बीच उसके जीवन में मनीष नाम का लड़का आता है, जो उसे प्यार करता है और हर कदम पर उसकी मदद करता है। जब चंदा अपने मां-बाप से मिलने के लिए जाती है तो मां-बाप उसका विरोध करते है, लेकिन बाद में उसे स्वीकार कर लेते है और मनीष के साथ उसकी शादी करवा देते है।
विज्ञापन