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राजा के अंग्रेजों के गुणगान पर सुकवि सूर्यमल ने छोड़ा दरबार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 15 Feb 2017 12:57 AM IST
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टैगोर थिएटर में सुकवि सूर्यमल नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ सेक्टर - 18 स्थित टैगोर थिएटर में मंगलवार को कथा सुकवि सूर्यमल की नाटक का मंचन पैराफिन सोसायटी कोटा की ओर से किया गया। यह नाटक समारोह चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी और राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित किया गया।
नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि जब एक राजा देश के लोगों को साथ न देकर वह ब्रिटिश सरकार का गुणगान कर रहा है तो सुकवि सूर्यमल उससे अलग हो जाते हैं। उनका जीवन बहुत कठित हो जाता है। नाटक में सभी कलाकारों ने बहुत ही जीवंत अभिनय किया। नाटक में दिखाया गया कि कवि सूर्यमल बनौदी के राजा राम सिंह के यहां पर काम करते थे। वह अपनी कविताओं से समां बांध देते थे। लेकिन जब 1857 की क्रांति हुई औ राजा राम सिंह का विचार अलग था।
वह अंग्रेजी हुकूमत के फायदे की बात करने लगे। व्यापार, राजनीति सहित सभी चीजें उन्हीं के हिसाब से चलने लगीं। इस पर सुकवि सूर्यमल ने देश हित में राजा का दरबार छोड़ दिया। उन्होंने देश प्रेम की कविताएं लिखनी शुरू कर दी। इससे क्रांति में और तेजी आ गई। इसमें नाटक का निर्देशन राजेंद्र पांचाल ने किया।
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नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि जब एक राजा देश के लोगों को साथ न देकर वह ब्रिटिश सरकार का गुणगान कर रहा है तो सुकवि सूर्यमल उससे अलग हो जाते हैं। उनका जीवन बहुत कठित हो जाता है। नाटक में सभी कलाकारों ने बहुत ही जीवंत अभिनय किया। नाटक में दिखाया गया कि कवि सूर्यमल बनौदी के राजा राम सिंह के यहां पर काम करते थे। वह अपनी कविताओं से समां बांध देते थे। लेकिन जब 1857 की क्रांति हुई औ राजा राम सिंह का विचार अलग था।
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वह अंग्रेजी हुकूमत के फायदे की बात करने लगे। व्यापार, राजनीति सहित सभी चीजें उन्हीं के हिसाब से चलने लगीं। इस पर सुकवि सूर्यमल ने देश हित में राजा का दरबार छोड़ दिया। उन्होंने देश प्रेम की कविताएं लिखनी शुरू कर दी। इससे क्रांति में और तेजी आ गई। इसमें नाटक का निर्देशन राजेंद्र पांचाल ने किया।
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